विपक्षी दलों के गठबंधन की संभावना पर मंडरा रहे हैं संशय के बादल

गुमला ।  आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन की संभावना की गांठ पर लगता है अब ग्रहण लग चुका है। इस ग्रहण के सूतक से इन्हें कब मुक्ति मिलेगी और मुक्ति मिलेगी भी कि नहीं, यह स्पष्ट होने में अभी वक्त लगेगा।
राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नेतृत्व, अडाणी, एस्सार व हिन्दू-मुस्लिम के पेंच के बीच गोड्डा, जमशेदपुर, चाईबासा, चतरा और पलामू सीट को लेकर इस पूरे मामले का समीकरण अभी फंसा हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव पर नजर गड़ाए बैठे झामुमो यह मानकर चल रहा है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व के नाम पर कांग्रेस, राजद व झाविमो अपनी सहमति जताने के लिए विवश हैं। जबकि झारखंड की राजनीति के चाणक्य समझे जाने वाले झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी इस पर कतई तैयार नहीं हैं। मरांडी यह बखूबी जानते हैं कि इस शर्त को मान लेने का मतलब अंततः उनकी राजनीति का कब्रगाह साबित होगा। इसी तरह का एक पेंच गोड्डा को लेकर भी फंसा हुआ है। झाविमो अपने अहम् सिपाहसलार प्रदीप यादव को तन्हा छोड़ नहीं सकती और यादव के लिए गोड्डा उनकी विवशता है। इतना ही नहीं, विस्थापन को लेकर अडाणी के विरूद्ध आंदोलन करते हुए छह माह तक जेल में बिताने वाले क्षेत्र के पूर्व सांसद प्रदीप यादव की नजर में कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार की अडाणी व एस्सार से नजदीकी रिश्तों के कारण उनका आंदोलन स्वतः कुंद होकर रह जाएगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए रास्ता छोड़ देने के बाद झाविमो की विश्वसनीयता खत्म हो जाने का खतरा भी उन्हें नजर आ रहा है। इस क्षेत्र में यादव पहले से ही एक कद्दावर नेता रहे हैं । जबकि 2014 के गत चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मो. फुरकान अंसारी इस सीट में दूसरे स्थान पर रहे हैं। कांग्रेस मो. फुरकान के नाम पर हिन्दू-मुस्लिम कार्ड खेलने की गरज से भी यह सीट छोड़ने के मुड में नहीं है। इसी तरह पलामू सीट पर भी झाविमो और राजद में से कोई भी समझौते के मूड में नहीं है। राजद अपनी नेत्री अन्नपूर्णा देवी के नाम पर विवशता दिखा रही है तो मजबूत कैडर व गत चुनावों में प्राप्त मत प्रतिशत झाविमो के लिए मुश्किलें खड़ी किए हुए है। चतरा में भी यही हाल है। जबकि चाईबासा में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की धर्मपत्नी व विधायक गीता कोड़ा को लेकर कांग्रेस काफी उत्साहित है और गत चुनाव में प्राप्त मतों के कारण झामुमो इस सीट को छोड़ने से मना कर रहा है। जमशेदपुर को लेकर भी संशय की बातें सामने आ रही हैं । जबकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार खुद यहां से सांसद रहे हैं और अभी भी इस क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता कायम है। दूसरी तरफ गत चुनाव के परिणाम को आधार बनाते हुए झामुमो ताल ठोक कर यहां से अपनी दावेदारी के साथ खड़ा है। इन तमाम तथ्यों के बीच अभी इस गठबंधन को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मान-मनौवल का खेल भी चल रहा है और दावे भी किए जा रहे हैं। इधर इसे लेकर आम लोगों में भी पर्याप्त उत्साह व उत्सुकता है जबकि गठबंधन के इस गठजोड़ में यहां गेम चेंजर बनने की पोटेंसीयलिटी को लेकर किसी के मन में कोई सवाल नहीं है।

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