सरकारें चुनाव आयोग के माध्यम से आचार संहिता को धारा 144 की तरह इस्तेमाल कर रही है: ज्यां द्रेज

मेदिनीनगर। कुछ दिनों पहले गढ़वा में राईट टू फ़ूड विषय पर एक सभा का आयोजन कर रहे थें तो आचार संहिता का नाम लेकर गिरफ्तार कर लिया गया । जब मैंनेआचार संहिता पढ़ा तो पाया कि उसमें आम नागरिक पर कोई पाबंदी नहीं है। पाबंदिया राजनैतिक दलों पर है। देश मेरा, वोट मेरा व मुद्दा मेरा विषय पर एआइपीएफ व एनसीडीएचआर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता अर्थशास्त्री राईट टू फ़ूड एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज ने आज यह बातें कही। उन्होंने कहा कि सरकारें चुनाव आयोग के माध्यम से आचार संहिंता को धारा 144 की तरह इस्तेमाल कर रही है। चुनाव खुद को अभिव्यक्त करने का जरिया है और ऐसे समय में हमें अभिव्यक्ति की आजादी को बचाये रखने के बारे में सोचना होगा। गोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा माले राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव के समय मुद्दों पर ध्यान देना ही चाहिए और एक एक मुद्दा पर ध्यान देने के बजाये पुरे परिदृश्य पर नजर रखनी चाहिये। कहीं ऐसा न हो पेड़ गिनते गिनते जंगल पर ही नहीं दिखे। आज देश में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र, युवा, दलित व आदिवासी सभी अपना घोषणा पत्र जारी कर रहे हैं। सभी कह रहे हैं कि संविधान खतरे में है व लोकतंत्र खतरे में हैं। आज देश में आरक्षण, नागरिकता हर संवैधानिक शब्दों की परिभाषा बदली जा रही है। कुछ लोग जो कंसंट्रेशन कैंप का इंतजार कर रहे हैं, सरकार को फ़ासिस्ट कहने के लिए उन्हें असम की ओर देखने की जरुरत है, जहाँ आम नागरिकों को डिटेंशन कैंप में डाल कैदियों से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम आह्वान करते हैं कि ऐसी तमाम शक्तियों के खिलाफ वोट करें जो लोकतंत्र को कमजोर करने पर तुली है संविधान को बदलने पर तुली है। आइये अम्बेडकर व भगत सिंह के विचारों की ओर भारत को अग्रसर करें। भाकपा माले की प्रत्याशी सुषमा मेहता ने अपने विचारों को रखा। गोष्ठी की शुरुआत में एआइपीएफ कार्यकर्त्ता गुप्तेश्वर ने जन घोषणा पत्र को पढ़कर किया और कहा कि वर्तमान चुनाव में जनता से जुड़े मुद्दे गौण हो गए हैं। उनकी जगह कृत्रिम नारों ने ले लिया है, अति अधिनायकवाद ने ले लिया है, व्यक्ति पूजा होने लगी है। ऐसे में यह सेमिनार जनमुद्दों पर ध्यानाकर्षण का काम करेगा। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे जेम्स हेरेंज ने कहा कि हमलोगों ने इस गोष्ठी में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतृत्व को आमंत्रित किया और जनता के मुद्दों को सुनने का आग्रह किया परंतु दुर्भाग्यवश राजनितिक दलों के नेताओं ने जनता के मुद्दों से सरोकार रखना सही नहीं समझा । भाकपा माले नेताओं को इस बात के लिये बधाई है कि वो जनता के मुद्दों को सुनने आएं। गोष्टीी में दिहाड़ी मजदूर संगठन से राजीव कुमार, इप्टा से प्रेम प्रकाश, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति से शिवशंकर, जोगल पाल , गणेश रवि , गुप्तेश्वर सिंह, नन्दलाल सिंह , दिव्या भगत, रबिंदर भुइयां से अविनाश रंजन झरखंड प्रदेश रसोइया संघ से अनीता देवी, जेम्स हरेंज समेत कई उपस्थित थे।

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