यूजीसी की गाइडलाइन में छेड़छाड़ के खिलाफ राज्य के विश्वविद्यालयों में तालाबंदी

रांची। यूजीसी की गाइडलाइन में किये छेड़छाड़ का पूरे राज्यभर में विरोध शुरू हो गया है। रांची और डीएसपीएमयू विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति की नियमावली में संशोधन को लेकर गुरुवार को तालाबंदी कर दी गई लेकिन जिस नियमावली को लेकर विरोध किया जा रहा है उस नियमावली पर राज्य सरकार ने कोई निर्णय लिया ही नहीं है।

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सारे रिसर्च स्कॉलर, सहायक प्राध्यापकों ने विवि समेत सारे पीजी डिपार्टमेंट को भी बंद कराया। रांची विवि और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि में तालाबंदी की गयी। इस आंदोलन में छात्र संगठनों जैसे आजसू, एनएसयूआई और एबीवीपी का भी समर्थन मिल रहा है। हालांकि, छात्रहित में परीक्षा कार्य को बाधित नहीं किया गया। सारे प्राध्यापक नारेबाजी करते हुए विवि पहुंचे और तालाबंदी कराया।

प्राध्यापकों का कहना था कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में राज्य सरकार ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने जा रही है, जिससे राज्य के विश्वविद्यालयों से पीएचडी और पीएचडी करने वालों शोधकर्ताओं और शैक्षणिक अनुभव प्राप्त करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से वंचित हो जायेंगे।

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रिसर्च स्कॉलर का कहना है कि प्रस्तावित नियमावली में शोधार्थियों के पीएचडी अंक के लिए अधिकतम 30 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत नैक से ए/ए ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को 30 अंक और ए/बी ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालय से पीएचडी करने पर 15 अंक तथा शेष को पांच अंक प्रदान किए जाएंगे।

इस तरह के नैक ग्रेडिंग के आधार पर अंकों का निर्धारण करना कहीं से उचित नहीं है। नई नियमावली के अनुचित प्रावधान का सीधा प्रभाव राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों, अनुबंध एवं अतिथि शिक्षकों पर तथा ऐसी स्थिति में झारखंड के किसी भी पीएचडी धारक को भविष्य में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति मिलना असंभव है।

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