झारखंड के विपक्षी दलों में लोकसभा, विधानसभा सीट बंटवारे व नेतृत्व को लेकर झाम

राँची। झारखंड में कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, राजद में गठबंधन में नेतृत्व व सीटों को लेकर एक राय नहीं बन पा रही है । इसमें बाबूलाल मरांडी नेतृत्व के मामले में तनिक भी झुकने को तैयार नहीं हो रहे हैं। वह हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ना चाहते। विपक्षी गठबंधन में बाबूलाल व हेमंत अपनी-अपनी जिद पर हैं जिसके कारण निकट भविष्य में हल निकलता नहीं दिख रहा है | माना जा रहा है कि अगर विपक्षी दलों में गठबंधन हो गया तथा सीटों का बंटवारा ठीक से करके सभी चुनाव लड़े तो राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से लगभग 10 सीटें वे जीत सकते हैं और मात्र 4 सीट भाजपा के खाते में ही जा पायेगी |
गठबंधन में बाबूलाल व हेमंत की जिदः
कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, राजद गठबंधन में झाविमो के प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी चाहते हैं कि गठबंधन वाले दल आगामी विधानसभा चुनाव झामुमो के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में नहीं लड़ें। हेमंत सोरेन को गठबंधन का नेता नहीं घोषित किया जाये। उनके नेतृत्व में वह (बाबूलाल मरांडी ) चुनाव नहीं लड़ेंगे। बिना नेता घोषित किये गठबंधन किया जाये और लोकसभा चुनाव व आगामी विधानसभा चुनाव लड़ा जाये। जबकि हेमंत सोरेन की जिद है कि उनको आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन का नेता घोषित किया जाये। और गठबंधन के दलों में लोकसभा की सीटों के बंटवारे के साथ ही विधानसभा की सीटों का भी बंटवारा किया जाये। जबकि कांग्रेस कह रही है कि पहले लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ें , उसके बाद विधानसभा चुनाव के लिए सीटें तय करेंगे और नेतृत्व की बात तय की जायेगी। इसपर हेमंत सोरेन राजी नहीं हैं ।
गोड्डा,चतरा,पलामू,चाईबासा सीट पर तनातनीः
गोड्डा सीट को लेकर कांग्रेस और झाविमो अड़े हुए हैं। दोनों ही इस पर अपने प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं। पलामू सीट को लेकर राजद व झाविमो दावा कर रहे हैं। इस सीट पर राज्य राजद प्रमुख अन्नपूर्णा देवी लड़ना चाहती हैं और उनकी पार्टी चतरा सीट से किसी तथाकथित बालू ठेकेदार को टिकट देना चाहती है। चाईबासा सीट पर झामुमो दावा कर रहा है। बीते लोकसभा चुनाव में वह यहां दूसरे नम्बर पर था। जबकि कांग्रेस कई घोटालों के मामले में जेल की सजा वाले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कौड़ा की पत्नी दीपा कौड़ा को इस सीट से प्रत्याशी बनाना चाहती है।
विपक्षी दल गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़े तो जीत सकते हैं 10 सीटें :
विपक्षी दलों में यदि गठबंधन हो गया तथा सीटों का बंटवारा ठीक से करके लड़े ,तो राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से लगभग 10 सीटें जीत सकते हैं। भाजपा जो 2014 के लोकसभा चुनाव में 12 सीटें जीती थी पर अब 4 सीट पर सिमट सकती है। सूत्रों के मुताबिक गठबंधन दलों में से कुछ ने झारखंड में जो आंतरिक सर्वे कराया है उसके अनुसार कांग्रेस -रांची, लोहदरगा, जमशेदपुर, गोड्डा लोकसभा सीट; झामुमो –चाईबासा, दुमका, गिरिडीह,राजमहल सीटें, राजद – पलामू की सीट, झाविमो – कोडरमा लोकसभा सीट जीत सकती है।
झाविमो ने गठबंधन नहीं किया तो होगा 3 सीटों को नुकसानः
विपक्षी दलों के गठबंधन में यदि झाविमो शामिल नहीं हुआ तो कांग्रेस , झामुमो, राजद के गठबंधन को 3 सीटों का नुकसान होगा और ये लगभग 7 सीट जीतेंगे (गठबंधन करके लड़ने पर 10 सीटें जीतने की संभावना है )। अकेले लड़ने पर झाविमो एक सीट कोडरमा जीत सकती है। जहां से बाबूलाल मरांडी चुनाव लड़ेंगे। गोड्डा सीट ना तो कांग्रेस ना ही झाविमो जीत पायेगी । यह सीट फिर भाजपा की झोली में चली जायेगी। इसी तरह 2 और सीट भाजपा बचा ले जायेगी।
हेमंत चाहते हैं विधानसभा चुनाव में झामुमो-36 , कांग्रेस-25, झाविमो-15, राजद-5 सीटों पर लड़ें :
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहते हैं आगामी विधानसभा चुनाव में विधान सभा की 81 सीटों में से 36 पर झामुमो,25 पर कांग्रेस , 15 पर झाविमो, 5 पर राजद लड़े, जबकि कांग्रेस 40 सीटें मांग रही है। झाविमो भी 15 पर राजी नहीं हो रहा है। राजद भी अधिक सीटें मांग रहा है।

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