Jharkhand : हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड स्थित गोन्दलपुरा में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज,सभी प्रत्याशी मैदान में उतरे

बड़कागांव (हजारीबाग) : हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड स्थित गोन्दलपुरा में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज है। यहाँ 27 मई को मतदान होना है। इस बार कुल नौ प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। सभी प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं और ग्रामीणों ने बीच जाकर वोट मांग रहे हैं। पिछली बार यह सीट महिला के लिए आरक्षित थी, जहाँ निर्विरोध तरीके से पानो देवी का चयन ग्रामीणों ने किया था। उससे पहले इनके पति श्रीकांत निराला यहाँ के मुखिया थे। लगातार दो टर्म के बाद यहाँ बदलाव की आहट इतनी तेज है कि इस बार नौ – नौ लोग अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। प्रत्याशियों के अनुसार, गोंदलपुरा में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, अनियमितता, बेरोजगारी, कालाबाजारी, पलायन, शिक्षा, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी इस बार के चुनावी मुद्दे हैं। उनका कहना है कि इस बार मुखिया के रूप में फिर से श्रीकांत निराला को जनता नहीं देखना चाह रही है।

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“सिर्फ कागजों पर हुआ है काम, न अच्छी सड़कें हैं और न ही शुद्ध पेयजल”

मुखिया पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी वासुदेव यादव ने बताया कि गोन्दलपुरा पंचायत में विकास के कई कार्य बचे हुए हैं। उसे पूरा करना बेहद जरुरी है। यहाँ अच्छी सड़कें नहीं हैं। शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाता है। गांव के लोगों ने जैसा सोचा था वैसा काम यहाँ नहीं हो सका। इनके कार्यकाल में आधे से अधिक कार्य सिर्फ कागजों पर हुए हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में कई कंपनियों को कोल ब्लॉक मिले हैं, जो चुनाव में एक बड़ा मुद्दा है। जिस हिसाब से गांव के लोगों ने उन्हें सम्मान दिया, उस हिसाब से उन्होंने काम ही नहीं किया।

वासुदेव यादव

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“शिक्षा की हालत खराब, जिनके दो तल्ले के मकान उन्हें भी मिला पीएम आवास, झोपड़ी में रह रहे मजदूर”

एक अन्य प्रत्याशी लालदेव कुमार कहते हैं कि निवर्तमान मुखिया के कार्यकाल में योजनाएं जमीन पर नहीं उतर सकीं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं में अनियमितता इतनी है कि असल जरूरतमंद तक इसका लाभ कभी पहुँच ही नहीं पाता है। गोन्दलपुरा में शिक्षा एक बड़ा मुद्दा है। गांव के स्कूल को देखने वाला कोई नहीं है। उदहारण के तौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ऐसे – ऐसे लोगों को मिला है, जिनके दो-तीन मंजिल के मकान पहले से हैं। इससे स्पष्ट है कि जिसने घूस में पैसे दिए, उन्हें ही घर मिला। पंचायत में कृषि योग्य भूमि है, लेकिन उसके लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ ग्रामीणों को अबतक नहीं मिली हैं। निवर्तमान मुखिया के चारों ओर सात से आठ लोग हमेशा रहते हैं, उन्हें ही सभी योजनाओं के लाभ मिले हैं। गोन्दलपुरा बस्ती में एक अच्छी सड़क तक नहीं है। यहाँ पंचायत भवन तक का उपयोग नहीं हो पा रहा है। किलनाथ महतो, कुच्चू महतो और मुटर राणा गोन्दलपुरा के ऐसे ग्रामीण हैं जो चिमनी भट्ठी के मजदूर हैं और मिट्टी के मकान में रहते हैं, इन्हें पीएम आवास मिलना चाहिए, लेकिन इन्हें आज तक इस योजना का लाभ नहीं मिला। वहीँ, जिसने निवर्तमान मुखिया को लाभ पहुँचाया उसे पीएम आवास मिल गया।

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आरोप – एक पीएम आवास के लिए लिए गए 20 हजार तक घूस

गांव में लोग बताते हैं एक आवास आवंटन के लिए 15 से 20 हजार रुपये का रेट है। जिसने इतनी रकम दी है उसे ही पीएम आवास आवंटित किया गया है। इसके अलावा पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में बड़े स्तर पर घपले – घोटाला किये गए हैं। श्रीकांत निराला के कार्यकाल में राज्य सरकार के द्वारा दी जा रही पेंशन योजना में भी खूब हेराफेरी हुई है। बिना घूस दिए किसी का भी पेंशन कार्ड नहीं बना है। इसीलिए इस बार चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों का एकमात्र उद्देश्य निवर्तमान मुखिया को हराना है। वहीँ, एक शौचालय निर्माण के लिए छह-6 हजार रुपये कमीशन लिए गए हैं। शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की कुल लागत थी, जिसमें छह हजार कमीशन ही रख लिया गया।

ख़राब सड़कें और घरों में नाले का पानी, यही बन गयी है गोन्दलपुरा की पहचान

गीता देवी

पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहीं गीता देवी कहती हैं कि गोन्दलपुरा पंचायत के गावों में अक्सर सड़कों पर पानी जमा रहता है। नाले का पानी घरों में घुस जाता है। मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी है। पूरे पंचायत में घूसखोरी का बोलबाला है। पिछली बार यहाँ के लोग जागरूक नहीं थे, इसलिए पानो देवी (पति – श्रीकांत निराला) निर्विरोध चुन लिए गए, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। अब लोग जागरूक हैं। वो तय करेंगे कि उनका नेता कौन और कैसा होगा। पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर है, जिससे ग्रामीण तंग आ चुके हैं। अब एक ईमानदार प्रत्याशी की जरुरत है। गली-मोहल्लों में पीसीसी सड़कें नहीं हैं। बिना पैसे दिए किसी का कोई काम नहीं होता है। उन्होंने बताया कि इलाका कोल प्रचुर क्षेत्र है। यहाँ कई कम्पनियाँ काम करना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए ग्रामीणों की रजामंदी बहुत जरुरी है।

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सभी आरोप निराधार, जनता का हर निर्णय स्वीकार: श्रीकांत निराला

श्रीकांत निराला

इधर, सभी आरोपों पर निवर्तमान मुखिया ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कुछ भी गलत नहीं हुआ है। सभी आरोप निराधार हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक होती है। जनता का जो भी फैसला होगा, उन्हें स्वीकार होगा।

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