समर्पित आसक्ति ही जीवन का मूलाधार

किसी व्यक्ति विशेष या वस्तु के प्रति स्वार्थ रहित भावनात्मक समर्पण से जीवन में आनंदानुभूति होती है। साथ ही किसी व्यक्ति, वस्तु एवं कला के प्रति अनुराग तथा लगाव से मानवीय संबंध सुदृढ़ होते हैं। कतिपय विचारक आत्मा के इस लगाव को व उत्तेजना की अवस्था को एक ही मानने का भ्रम पाल लेते हैं, क्योंकि वर्तमान परिवेश में सर्वत्र उत्तेजना ही फैली हुई है। अतः यह शब्द आज सभ्यता और संस्कृति से अधिक घुल-मिल गया है, किन्तु देखा जाए तो जीवन के प्रति आसक्तिजन्य मोह हमारे पास्परिक संबंधों से…

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जन्म के बाद राम नाम निकला था तुलसीदास के मुख से

-मृत्युंजय दीक्षित- हिंदी साहित्य के महान कवि व रामचरित मानस जैसी अनुपम -ति की रचना करने वाले संत तुलसीदास का जन्म संवत् 1556 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्तमूल नक्षत्र में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्मा राम दुबे व माता का नाम हुलसी था। जन्म के समय तुलसीदास जी रोये नहीं थे अपितु उनके मुंह से राम शब्द निकला था तथा उनके मुख में 32 दांत मौजूद थे। ऐसे अद्भुत बालक को देखकर माता−पिता बहुत चिंतित हो गए, माता हुलसी अपने बालक को अनिष्ट की आशंका से…

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सुख तो मन के भीतर है

शरीर की शुद्धि के लिए मनुष्य जितना सजग है, दूसरा कोई प्राणी नहीं है। वह शरीर को स्वच्छ बनाये रखने के लिए शरीर पर उबटन लगाता है, तेल लगाता है, साबुन से शरीर को मल-मलकर धोता है, अन्य प्रसाधन-सामग्री का भी उपयोग करता है। इस क्रम से गुजरने के बाद व्यक्ति सोचता है कि मेरे शरीर में अब किसी प्रकार की अशुद्धि नहीं रही। शरीर-शोधन की जो बात हो रही है, उसका संबंध ऊपर की स्वच्छता से नहीं है। शरीर की भीतरी स्वच्छता का तरीका वह नहीं है, जिसे आप…

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महाशिवरात्रि पर ऐसे करें महादेव को प्रसन्न…

कहते हैं कि महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की आराधना की जाए, तो मां पार्वती और भोले त्रिपुरारी दिल खोलकर कर भक्तों की कामनाएं पूरी करते हैं। महाशिवरात्रि पर पूरे मन से कीजिए शिव की आराधना और पूरी कीजिए अपनी हर कामना। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव के पूजन का सबसे बड़ा पर्व भी है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र…

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कवर्धा के भोरमदेव मंदिर में करें शिवलिंग के दर्शन, पूरी होगी हर मुराद

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में 10वीं सदी के भोरमदेव मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के बाद सुकून मिलता है। मंदिर देवताओं और मानव आकृतियों की उत्कृष्ट नक्काशी के साथ मूर्तिकला के चमत्कार के कारण सभी की आंखों का तारा है। यहां पूजन करने के लिए हर वर्ष देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान शिव को स्थानीय बोलचाल की भाषा में भोरमदेव भी कहते हैं। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य प्रतिमा शिवलिंग की है। भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 130 किमी दूर और कवर्धा जिले…

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इस तरह मनुष्य जीवन से पा सकते हैं मुक्ति

-श्री श्री आनन्दमूर्ति- वृत्ति मुख्यतः दो प्रकार की होती है- साधारण वृत्ति और सहजात वृत्ति। उन्नत जीवों में सहजात वृत्तियां और अन्यान्य वृत्तियां भी रहती हैं, जो अध्ययन, सामाजिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक अनुशीलन, आध्यात्मिक साधना से मजबूत होती है। मन विकसित अवस्था में धर्म, सामर्थ्य की उपलब्धि करता है तब यह माना जा सकता है कि मन की कुछ उन्नति हुई है। हर इस विकास के परवर्ती चरण में जब कर्मक्षमता को मान लिया जाता है, उस समय यह भी मान लिया जाता है कि जीव मन की और भी उन्नति…

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चरित्र मानव जीवन की स्थायी निधि है…

सद्भावना के लिए आवश्यक है चरित्र। सद्विचारों और सत्कर्मों की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छाओं को नियंत्रित रखते हैं और उन्हें सत्कर्मों का रूप देते हैं, उन्हीं को चरित्रवान कहा जा सकता है। संयत इच्छाशक्ति से प्रेरित सदाचार का नाम ही चरित्र है। चरित्र मानव जीवन की स्थायी निधि है। जीवन में सफलता का आधार मनुष्य का चरित्र ही है। चरित्र मानव जीवन की स्थायी निधि है। सेवा, दया, परोपकार, उदारता, त्याग, शिष्टाचार और सद्व्यवहार आदि चरित्र के बाह्य अंग हैं, तो सद्भाव, उत्कृष्ट चिंतन, नियमित-व्यवस्थित जीवन, शांत-गंभीर…

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शिव ने बनाया जीवन को मधुमय

-श्री श्री आनन्दमूर्ति- सामाजिक क्षेत्र में मनुष्य के बीच जो व्यवधान था, उसे समाप्त कर मानवता के कल्याण के लिए शिव हमेशा प्रयत्नशील रहे। कोमलता व कठोरता के प्रतीक शिव ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी वस्तु दी है, वह है धर्मबोध। इस कारण शिव ने मनुष्य को अंतर जगत में ईश्वर की प्राप्ति का रास्ता दिखाया। वह रास्ता परम शांति का रास्ता है। शिव के इसी पथ को शैव धर्म कह कर पुकारा जाता है। शिव ने देखा था कि उस ऋग्वेदीय युग में छंद थे, किन्तु राग-रागिनियों की…

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आजमाएं गुस्से को छूमंतर करने के लिए ये लाजबाव उपाय

कहते हैं क्रोध बुद्धि को खा जाता है, यह बात कई लोग जानते हैं फिर भी क्रोध करते हैं और बेवजह अपना और अपने साथी को परेशान करते हैं। वैसे अगर आपको कभी गुस्सा आ भी जाए तो इन उपायों से आप अपने गुस्से को काबू में रख सकते हैं। अमूमन देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति गुस्सा होता है तो उसके आस-पास का माहौल भी प्रभावित होता है। ऐसे में अगर आपको गुस्सा आ रहा हो तो एकांत मे चले जाइए और उस समस्या के बारे में एक…

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वाणी पर संयम आवश्यक

मनुष्य जीवन में मौन, मन की एक आदर्श व्यवस्था है। मौन का भाव है, मन का निस्पन्द होना। मन की चंचलता समाप्त होते ही मौन की दिव्य अनुभूति होने लगती है। मौन मन का एक दिव्य अलंकार है, जो इसके स्थिर हो जाने पर सहजता से प्राप्त किया जा सकता है। मौन से मानसिक ऊर्जा का क्षरण रोककर इसे मानसिक शक्तियों के विकास एवं वर्ध्दन में नियोजित किया जाना सम्भव है। मौन मन को ऊर्ध्वमुखी बनाता है तथा इसकी गति को दिशा विशेष में तीव्र कर देता है। विवादों से…

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