विष्णु के ऋषि अवतार नर और नारायण

भगवान विष्णु ने धर्म की पत्नी रुचि के माध्यम से नर और नारायण नाम के दो ऋषियों के रूप में अवतार लिया। वे जन्म से तपोमूर्ति थे, अतः जन्म लेते ही बदरीवन में तपस्या करने के लिये चले गये। उनकी तपस्या से ही संसार में सुख और शांति का विस्तार होता है। बहुत से ऋषि मुनियों ने उनसे उपदेश ग्रहण करके अपने जीवन को धन्य बनाया। आज भी भगवान नर नारायण निरन्तर तपस्या में रत रहते हैं। इन्होंने ही द्वापर में श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतार लेकर पृथ्वी…

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मन की व्यथा पर नियंत्रण

-ब्रह्मकुमार निकुंज- कहते हैं कि जैसा संकल्प वैसी सृष्टि अर्थात हम जैसा सोचेंगे, हमारे आसपास का संसार भी वैसा ही बनेगा। इसलिए ही तो आज हर डॉक्टर अपने मरीज को एक ही सलाह देता है- शुभ और अच्छा सोचोगे तो जल्दी-जल्दी ठीक हो जाओगे। परंतु अधिकांश लोगों का यह प्रश्न होता है- क्या यह सचमुच संभव है कि हमारे मन में कोई भी अशुद्ध संकल्प प्रवेश ही ना करे? जिन्होंने अपने मन में अशुद्ध संकल्पों के प्रवेश पर नियंत्रण कर लिया है, उनके मतानुसार आध्यात्मिकता द्वारा यह मुश्किल लगने वाली…

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असली सुंदरता

एक कौवा सोचने लगा कि पक्षियों में मैं सबसे ज्यादा कुरूप हूं। न तो मेरी आवाज ही अच्छी है, न ही मेरे पंख सुंदर हैं। मैं काला-कलूटा हूं। ऐसा सोचने से उसके अंदर हीनभावना घर करने लगी और वह दुखी रहने लगा। एक दिन एक बगुले ने उसे उदास देखा तो उसकी उदासी का कारण पूछा। कौवे ने कहा-तुम कितने सुंदर हो, गोरे-चिट्टे, तो बिल्कुल स्याह हूं। मेरा तो जीना ही बेकार है। बगुला बोला-दोस्त मैं कहां सुंदर हूं। मैं जब तोते को देखता हूं, तो यही सोचता हूं कि…

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पितरों के तर्पण का शुभ दिन

-पं. भानुप्रतापनारायण मिश्र- मार्गशीर्ष अमावस्या इस बार शनिवार को है। इस अमावस्या का अद्भुत फल है। उच्च का बृहस्पति वृश्चिक राशि में बैठे सूर्य, शनि, शुक्र और चंद्रमा को पांचवीं दृष्टि और केतु को नवम दृष्टि से देख कर गुरु कृपा बरसा रहा है। ग्रहों की इस बलवान स्थिति में अमावस्या का होना इस बात का संकेत है कि हम अपने पितरों को हर हा में इस दिन स्मरण करें और जो कुछ भी हमारे पास उपलब्ध है, पूरे परिवार के साथ उन्हें अर्पित करें। यूं तो हर अमावस्या का…

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पांच मंत्र जिनसे आप सफलता की ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं

-श्रीकृष्णचंद्र भट्ट- योग में पांच यम, पांच नियम, जैन परंपरा में पांच महाव्रत और बौद्ध धर्म के पांच शील प्रसिद्घ हैं। आज को दौर में उनके नए संस्करण जरूरी हैं। यम नियम और पंच महाव्रत या शील निजी जीवन को संस्कारित करने और सुगठित बनाने के लिए है। परंतु उनका शुद्धतम अर्थों में पालन करना कठिन है। बेहतर है कि पहले व्यावहारिक पंचशीलों को व्यवहार में शामिल रखा जाए। पारंपरिक योगसाधना में शामिल पंचशीलों को सुबोध अर्थों में समझना चाहें तो उन्हें श्रमशीलता, मितव्ययिता, शिष्टता, सुव्यवस्था और सहकारिता के नाम…

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जब आएं शनिदेव स्वप्न में!

शनि अगर सपने में गिद्ध पर सवार हुए दिखाए दें तो यह बड़ा ही अपशकुन माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गिद्ध पर शनि का दिखना शोक देता है। इस स्थिति में शनि शांति के उपाय करने चाहिए। शनि देव का कौए पर सवार होकर दिखना सुख शांति छीन लेता है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि शनि अगर कौए पर सवार दिखे तो परिवार एवं समाज में वाद-विवाद होता है। व्यक्ति को अपमान का सामना करना पड़ता है। शनि देव अगर सपने में हाथी पर सवार होकर दिख जाएं…

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उत्तम चरित्र ही सबसे बड़ा धन है

धन से अधिक महत्व चरित्र का माना गया है। अमेरिका के प्रसिद्ध विचारक इमर्सन ने लिखा है था कि उत्तम चरित्र ही सबसे बड़ा धन है। इसी तरह ग्रीन नामक विद्वान का कथन था, चरित्र को सुधारना ही मनुष्य का परम लक्ष्य होना चाहिए।्य स्वामी विवेकानंद प्रायः युवाओं को संबोधित करते हुए कहा करते थे, युवाओ! उठो! जागो! अपने चरित्र का विकास करो। इस तरह विभिन्न विद्वानों ने चरित्र के महत्व पर प्रकाश डाला है और मानव जीवन में इसे सर्वोपरि माना है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरित्र इसीलिए आकर्षक…

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भगवान विष्णु ने दिखाई ऐसी माया, चांडाल बन गया राजा

-योगाचार्य सुरक्षित गोस्वामी- गुरु वशिष्ठ, श्रीराम को गाधी ब्राह्मण की कथा सुनाते हैं कि गाधी के मन में माया को जानने की इच्छा हुई, इसलिए वो विष्णु की उपासना करने लगा। भगवान प्रसन्न हुए और तथास्तु कहा। कुछ दिनों बाद गाधी ने गंगा स्नान करते हुए जैसे डुबकी लगाई, तभी अनुभव हुआ कि उसकी मृत्यु हो जाती है और वह चांडाल के घर में जन्मता है। जवान होने पर उसकी शादी हो जाती है, बच्चे हो जाते हैं। एक बार उस देश में अकाल पड़ता है, जिससे उसके बच्चे और…

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कैसे करें शाश्वत मूल्यों की सुरक्षा?

-आचार्य डाॅ. लोकेशमुनि- कोई भी समाज अपने समय के साथ जीता और चलता है। समय बदलने के साथ ही अनेक सारी मान्यताएं तथा परम्पराएं बदल जाती हैं। जहां नहीं बदलती हैं वहां यह माना जाता है कि यह समाज दृढ़ और कट्टर है। जनसंख्या नियंत्रण का मामला हो या विकास की अवधारणा या फिर अंधविश्वास-अगर ये समय के साथ अपने आपको बदल नहीं पाए तो उसे देश या समाज की जड़ता मानी जाती है। हमें पहले यह जानना चाहिए कि हम किस समय और समाज व्यवस्था में जी रहे हैं।…

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आप भी जान लीजिए भगवान को नैवेद्य चढ़ाने के 12 खास नियम

देवताओं का नैवेद्य यानी देवी-देवताओं के निवेदन के लिए जिस भोज्य द्रव्य का प्रयोग किया जाता है, उसे नैवेद्य कहते है। उसे अन्य नाम जैसे भोग, प्रसाद, प्रसादी आदि भी कहा जाता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है देवताओं को नैवेद्य अर्पित करने के कुछ नियम, जिन्हें अपना कर आप भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते है। नैवेद्य चढ़ाने के नियम… -देवता को निवेदित करना ही नैवेद्य है। सभी प्रकार के प्रसाद में निम्न पदार्थ प्रमुख रूप से रखे जाते हैं-दूध-शकर, मिश्री, शकर-नारियल, गुड़-नारियल, फल, खीर, भोजन इत्यादि पदार्थ।…

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