चालबाजियों में नहीं है जीवन का सुख

अगर हम खुद को श्रेष्ठ और बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कई तरह की चालबाजियां आने पर भी हम उनमें भाग नहीं लेते। हम ईमानदारी से जीवन जीते हैं। चालाकियों के साथ हम दूसरों को प्रभावित तो कर सकते हैं लेकिन ये हमें सुकून नहीं दे सकतीं। जब एक बच्चा गिरता है और पाता है कि कोई भी आसपास नहीं है तो वह खड़ा होकर आगे बढ़ जाता है। लेकिन अगर कोई आसपास है तो बच्चा उसका ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए…

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क्या आप जानते हैं ऊं नमः शिवाय महामंत्र की महिमा

भगवान शिव के षडक्षर मंत्र ऊं नमः शिवाय से तो आप भली भांति परिचित होंगे। प्रणव मंत्र ऊं के साथ नमः शिवाय (पंचाक्षर मंत्र) जप करने पर यह षडक्षर बन जाता है। पुराणों में इस मंत्र की बड़ी ही महिमा कही गई है। शिव महापुराण के अनुसार इस मंत्र के महात्म्य का विस्तांर से वर्णन सौ करोड़ वर्षों में भी नहीं किया जा सकता है। वेद तथा शैवागम में यह मंत्र शिवभक्तोंह के सम्पूेर्ण अर्थ का साधक अर्थात् सर्वमनोकामना पूर्ण करने वाला बताया गया है। ऊं नम: शिवाय इस मंत्र…

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जेब में पैसा ना टिकने का यह हो सकता है कारण, इन चीज़ों को रखने से होगा फायदा

अक्सर देखा जाता है कि आप खूब मेहनत करते हैं और अपनी मेहनत के हिसाब से आपको फल भी मिलता है। आपके पास हर प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में धन रहता है लेकिन यह धन अधिक समय तक टिक नहीं पाता। आप जो कुछ भी कमाते हैं वह बहुत जल्दी खर्च हो जाता है। ऐसे में वास्तु के हिसाब से कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आपके लिए बहुत जरूरी हो जाता है। 1.अक्सर आप अपने पैसे पर्स में रखते हैं और अगर बात करें…

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विष्णु के चतुर्थ अवतार श्रीनृसिंह

-अशोक “प्रवृद्ध”- यद्यपि सनातन वैदिक मतानुसार परमात्मा का अवतार संभव नहीं, तथापि बहुत सारे हिन्दुओं की मान्यता है कि सृष्टि में सभी प्राणी पूर्वनिश्चित धर्मानुसार अपने-अपने कार्य करते रहते हैं और जब कभी धर्म की हानि की होती है तो सृष्टिकर्ता धर्म की पुनः स्थापना करने के लिये धरती पर अवतार लेते हैं। पौराणिक मान्यतानुसार सृष्टि पालक भगवान विष्णु अब तक अधर्म के नाश के लिए नौ बार यथा मत्स्य, कुर्म (कच्छप), वाराह, नृसिंह (नरसिम्हा), वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध के रूप में धरती पर अवतरित हो चुके हैं और…

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जानें पूजा-पाठ में क्यों इस्तेमाल किया जाता हैं नारियल और सुपारी

पूजा-पाठ, हवन या किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में आपने देखा होगा कि नारियल और सुपारी का उपयोग किया जाता है। जब भी हम गृह प्रवेश करते हैं या फिर नया वाहन लाते हैं तो पूजा के समय नारियल फोड़ा जाता है। इसे शुभ माना जाता है। नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। नारियल का जहां औषधीय गुण होता है, वहीं पूजा के दौरान यह प्रतीक स्वरूप इस्तेमाल किया जाता है। हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार, कोई भी पूजा तब तक सफल नहीं मानी जाती है, जब तक की गणेश जी…

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इन चार ध्वनियों तक पहुंचे, फिर होगा आत्मा का परमात्मा से मिलन

-श्री श्री आनन्दमूर्ति विभिन्न अभिव्यक्तियों में ध्वनि सूक्ष्मतम होती है। प्रकाश से भी सूक्ष्म। इसीलिए कर्णेंद्रिय को सूक्ष्मतम माना गया है। मूल ध्वनि दो प्रकार की होती है। एक तो दैवी या आध्यात्मिक और दूसरी भौतिक। आम तौर पर तुम जो ध्वनि सुनते हो वह भौतिक ध्वनि है। उसी प्रकार से ध्वनियां दैवी किंवा आध्यात्मिक क्षेत्र में भी होती हैं। निर्गुण ब्रह्म में कोई अभिव्यक्ति नहीं है। निर्गुण ब्रह्म का अर्थ ही है जहां कोई अभिव्यक्ति न हो। सगुण ब्रह्म में पुरुषोत्तम की ही अवस्था से अभिव्यक्ति का प्रारंभ हो…

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बुरे दिनों से बचने के लिए आजमाएं इन लाभकारी उपायों को

यदि आप पर ग्रह नक्षत्रों की बुरी दशा चल रही है या आप कई महीनों से आप समस्याओं से घिरे हुए हैं, एक के बाद एक संकट आते रहते हैं तो यहां बताएं गए उपाय को अजमाएं। ये उपाय करने में किसी भी प्रकार की कोई बुराई नहीं है। 1. हनुमान चालीसा पढ़ना- सबसे पहले हनुमान चालीसा नियम से पढ़ना शुरू कर दें। पवित्र भावना और शांतिपूर्वक हनुमान चालीसा पढ़ने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है जो हमें हर तरह की जानी अनजानी अनहोनी से बचाती है। 2.…

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जरूरतमंदों की मदद करना सिखाता है रमजान

रमजान का पवित्र महीना शुरू होने के साथ ही मुस्लिम बहुल इलाकों में खुदा की इबादतों का रुहानी दौर शवाब पर है। रमजान की आमद से शहर से लेकर देहात तक के सभी मुस्लिम इलाकों में पुरनुर रुहानी मंजर जर्रे-जर्रे में दिख रहा है। मस्जिदों में नमाज अता करने वाले नमाजियों की तादाद बढ़ गयी है। कहा जा सकता है इस्लाम धर्म में इबादत का मूल उद्देश्य मनुष्य के जीवन को भक्तिमय बनाना और आदर्श जीवन का मार्ग दिखाना है। इंसान के शरीर और आत्मा को पवित्र बनाती है। रोजा…

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भगवान शिव ने क्यों किया चंद्र को मस्तक पर धारण

पौराणिक कथानुसार चंद्र का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र कन्याओं के साथ संपन्न हुआ। चंद्र एवं रोहिणी बहुत खूबसूरत थीं एवं चंद्र का रोहिणी पर अधिक स्नेह देख शेष कन्याओं ने अपने पिता दक्ष से अपना दुःख प्रकट किया। दक्ष स्वभाव से ही क्रोधी प्रवृत्ति के थे और उन्होंने क्रोध में आकर चंद्र को श्राप दिया कि तुम क्षय रोग से ग्रस्त हो जाओगे। शनैः-शनैः चंद्र क्षय रोग से ग्रसित होने लगे और उनकी कलाएं क्षीण होना प्रारंभ हो गईं। नारदजी ने उन्हें मृत्युंजय भगवान आशुतोष की आराधना करने…

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अगर घर में है वास्तु दोष तो करें यह आसान उपाय

-कमल सिंघी- वास्तु के अनुसार आपको घर में दक्षिण दिशा में सोना चाहिए। जिससे आपके स्वभाव में बदलाव होगा। ध्यान रखें कि पश्चिम की और सिर रख कर नहीं सोये। घर के उत्तर व पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा ना होने दें और ना ही इधर भारी मशीनें रखें। यह आपके घर में वास्तु दोष का कारण बन सकता है। हर कोई अपना अच्छा सा घर बनाकर उसमें हंसी खुशी रहना चाहता है। लेकिन जब हम घर का निर्माण करवाते है तो हमसे कई ऐसी चूक हो जाती है…

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