मांगलिक की शादी मांगलिक से ही हो सकती है

आज भी जब किसी स्त्री या पुरुष के विवाह के लिए कुंडली का मिलान किया जाता है तो सबसे पहले देखा जाता है कि वह मांगलिक है या नहीं। ज्योतिष के अनुसार यदि कोई व्यक्ति मांगलिक है तो उसकी शादी किसी मांगलिक से ही की जानी चाहिए, इसके पीछे कई धारणाएं बनाई गई हैं। ज्योतिष के अनुसार मांगलिक लोगों पर मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव होता है, यदि मांगलिक शुभ हो तो वह मांगलिक लोगों को मालमाल बना देता है। मांगलिक व्यक्ति अपने जीवनसाथी से प्रेम-प्रसंग के संबंध में कुछ…

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हो जाएं पांच तत्वों से मुक्त

-सद्गुरु जग्गी वासुदेव- जहां तक शारीरिक रचना की बात है तो हम इतने सक्षम नहीं हैं, जितने कि दूसरे प्राणी। लेकिन हम कुछ ऐसी काबिलियत ले कर इस धरती पर आए हैं, जिससे हम लोग गुजर-बसर की मौलिक प्रवृत्ति के परे भी कुछ कर सकते हैंय इंसान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है। लेकिन गुजर-बसर की जरूरतों से परे कुछ करने की बजाय अधिकतर लोगों ने गुजर-बसर के अपने स्तर को बढ़ा लिया है। मानव-तंत्र के इस्तेमाल का यह तरीका बड़ा ही विवेकहीन है, क्योंकि यह मानव-तंत्र तो एक…

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विवाह से पूर्व ऐसे भेजें गणपति को निमंत्रण, निर्विघ्न होंगे सब काम

प्रथमपूज्य भगवान गणेश से ही विवाह कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसलिए पहला निमंत्रण पत्र भगवान गणेश को ही भेजते हैं। निमंत्रण पत्र भेजने से पूर्व पूजन भी किया जाता है। इस पूजा में दूल्हा अथवा दुल्हन, उसके माता-पिता, साथ में एक विनायक तथा पंडितजी, जो विधि से पूजा संपन्न कराते हैं, शामिल होते हैं। तब से ही विवाह कार्य एवं सभी प्रकार के रीति-रिवाज शुरू हो जाते हैं। इसमें सात प्रकार की वस्तुएं जौ, मूंग, हल्दी की गांठ, नाड़ा, चांदी की घूघरी, कोयला, दो सूपड़े, दो मूसल और औढना…

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भगवान का शयन करना

भगवान सूर्य के मिथुन राशि में आने पर भगवान मधुसूदन की मूर्ति को शयन कराते हैं और तुला राशि में सूर्य के जाने पर भगवान जनार्दन शयन से उठाये जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहते हैं। गरुड़ध्वज जगन्नाथ के शयन करने पर चारों वर्णो की विवाह, यज्ञ आदि सभी क्रियाएं सम्पादित नहीं होतीं। यज्ञोपवीतादि संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, ग्रहप्रवेशादि, गोदान, प्रतिष्ठा एवं जितने भी शुभ कर्म है, वे सभी चातुर्मास्य में त्याज्य हैं। भविष्य पुराण, पदमपुराण तथा श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार हरिशयन को योगनिद्रा कहा गया है। संस्कृत साहित्य…

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सभी के लिए आदर्श हैं भगवान श्रीराम

भगवान श्रीराम की मातृ-पितृ भक्ति भी बड़ी महान थी वो अपने पिता राजा दशरथ के एक वचन का पालन करने 14 वर्ष तक वनवास काटने चले गए और माता कैकयी का भी उतना ही सम्मान किया। भातृ प्रेम के लिए तो श्रीराम का नाम सबसे पहले लिया जाता है उन्होंने अपने भाइयों को अपने बेटों से बढ़ कर प्यार दिया इनके इसी भातृ प्रेम की वजह से उनके भाई उन पर मर मिटने को तैयार रहते थे। श्रीराम ने रावण का और अन्य असुरों का संहार कर धरती पर शांति…

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अक्षय तृतीया का महत्‍व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा

(अक्षय तृतीया 7 मई पर विशेष) अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचागं देखने की जरूरत नहीं है। अक्षय तृतीया पर किए गए कार्यों का कई गुना फल प्राप्‍त होता है। इस साल अक्षय तृतीया पर शनि की चाल बदलना भी एक विशेष घटना है जिसका प्रभाव सभी राशियों पर अगले 6 महीने तक देखने को मिलेगा। इसे अखतीज के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में बताया…

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मौत के बाद आत्मा के साथ कुछ ऐसा होता है

इंसान अगर पृथ्वी पर अच्छे कर्म किए हैं तो बार-बार के जीवन से मुक्ति मिलती है और उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में कहा गया है कि मरने के बाद इंसान यदि स्वर्ग जाता है तो उसकी आत्मा को सभी सुख दिए जाते हैं। अगर कोई इंसान पृथ्वी पर रहते हुए बुरे कर्म किए हों तो उसे नर्क भेजा जाता है। और वहां पर उसके साथ उसके कर्म के हिसाब से यातनाएं मिल सकती हैं। इसलिए जीवन में इनसे दूर रहने का प्रयास करें। कुंभीपाक: ऐसे व्यक्ति जो…

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करिए हनुमानजी के इन 5 स्वरूपों की पूजा, होगी हर मनोकामना पूरी

कहते हैं कलियुग में समस्त दुखों का नाश महज हनुमानजी की आराधना से हो जाता है। बैकुंठ जाते वक्त मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने परम भक्त हनुमान को इसी उद्देश्य से धरती पर रहने का आदेश दिया था। ऐसी मान्यता है कि कलियुग में हनुमानजी की पूजा से न सिर्फ घर की बाधा दूर होती है, बल्कि बिगड़े काम भी बन जाते हैं। हम आपको हनुमानजी की उपासना से जुड़ी कुछ अहम बातें बता रहे हैं। विद्वानों के अनुसार, हनुमानजी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने पर अलग-अलग फलों की…

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ईश्वर नाम स्मरण ही जीवन का परम सुख

सब दुःखों की जड़ देह है। उसमें भी यदि देह बीमार हुआ तो वह दुःख की हद होगी। नमक का खारापन, शकर की सफेदी, ये जैसे नमक और शक्कर से अलग नहीं होते वैसी ही बात देह और दुःख की जानो, यानी देह और दुःख अलग नहीं होते। देह मजबूत और ताकतवर होने पर भी दुःख भुला नहीं जाता। शरीर के लिए जैसी छाया है वैसे ही शरीर के लिए रोग है। रामकृष्ण आदि अवतार हो गए किन्तु वे भी अन्त में देह में नहीं रहे। अपना भी भरोसा नहीं…

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स्वस्थ शरीर में ही छिपा है सार्थक जीवन का रहस्य

-हरीश बड़थ्वाल- चिकित्सकों ने एक बीमार व्यक्ति को बार-बार सलाह दी कि जान बचानी है तो शराब को पूरी तरह छोड़ दो। वह समझ चुका था कि शराब ही उसकी बीमारी का मुख्य कारण है और इससे उसके अंदरूनी अंग नष्ट हो रहे हैं। पर वह शराब नहीं छोड़ पाया। एक दिन वह जीवन से ही हाथ धो बैठा। शंकराचार्य विरचित ‘स्तोत्ररत्नावली’ के चर्पटपंजिरिकास्तोत्रम् में मानवाचार की इस विडंबना का उल्लेख है कि अनुचित, आपत्तिजनक कार्य या व्यवहार में लिप्त व्यक्तियों को अंततः दुर्दशा में गिरते देखकर भी देखने वालों…

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