आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज

जोधपुर। पत्नी की बीमारी के नाम पर जेल से बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे आसाराम को हाईकोर्ट से झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को जोधपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने आसाराम की याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों से कोर्ट को किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीतराज लोढ़ा के सोमवार को आसराम की अंतरिम जमानत याचिका की सुनवाई से अलग हो जाने के बाद गुरुवार को न्यायाधीश संदीप मेहता की अदालत में इस पर सुनवाई हुई। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आसाराम की पत्नी लक्ष्मी देवी स्वस्थ हैं। उनकी स्थिति गंभीर नहीं है जबकि आसाराम की तरफ से कहा गया कि वे पांच साल से अधिक समय से जोधपुर जेल में बंद है। उनकी पत्नी की तबीयत खराब है। ऐसे में पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की जाए। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश मेहता ने कहा कि कोर्ट को ऐसे अपराधियों से किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं। यह कहते हुए उन्होंने आसाराम की याचिका को खारिज कर दिया।
उल्लेखनीय है कि आसाराम पांच साल से भी ज्यादा समय से जोधपुर सेन्ट्रल जेल में बंद हैं। गत वर्ष 25 अप्रैल को एससी-एसटी कोर्ट जज मधुसुदन शर्मा ने आसाराम को एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रखने की सजा सुनाई थी। इसके बाद से आसाराम जेल से बाहर आने की फिराक में हैं। आसाराम ने दो बार जिला पैरोल कमेटी के सामने पैरोल पेश की थी। एक बार हाईकोर्ट में भी पैरोल अर्जी पेश की लेकिन उसे कहीं से भी राहत नहीं मिली। इसके अलावा हाईकोर्ट में आसाराम की सजा स्थगन याचिका पर भी सुनवाई लंबित है। सजा स्थगन याचिका पर अब छह मार्च को सुनवाई होगी।

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