झारखंड के 35 ब्लॉक में सितंबर से शुरू होगी बाइक एंबुलेंस सेवा

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य के दुर्गम ब्लॉक में बाइक एंबुलेंस शुरू की जायेगी। इसके लिए 35 ऐसे ब्लॉक चिह्नित किये गये हैं, जहां पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बड़े वाहन से मरीज लाना संभव नहीं है। हर ब्लॉक मे पांच-पांच बाइक एंबुलेंस रहेगी। इसके लिए सीएसआर से फंड की व्यवस्था की जायेगी।

दास शनिवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के 36.65 लाख लाभुकों को गोल्डन कार्ड मिला है। पूरे देश में झारखण्ड तीसरे स्थान पर है। हमें पूरे देश में इस योजना में मिसाल कायम करनी है। जिन लोगों को गोल्डन कार्ड नहीं मिला है, सरकार उन्हें अपने खर्च पर गोल्डन कार्ड उपलब्ध करायेगी। 15 जुलाई से अभियान चलाकर सबका गोल्डन कार्ड बनने का काम शुरू किया जायेगा।

दास ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत निजी क्षेत्र के अस्पतालों ने काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत अच्छा कार्य करनेवाले तीन सर्वश्रेष्ठ निजी अस्पतालों को सरकार आयुष्मान भारत योजना की वर्षगांठ पर 25 सितंबर को सम्मानित करेगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के शहरों के झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में क्लिनिक लगाने का निर्देश दिया है। इसकी शुरुआत अगस्त माह से की जायेगी। इस क्लिनिक में सामान्य जांच के साथ ही ओपीडी की सुविधा रहेगी। जिन मरीजों को इससे बेहतर इलाज की जरूरत होगी, उन्हें क्लिनिक द्वारा दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जायेगा। इस क्लिनिक के लगने से लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दें कि एक अभियान चलाकर 31 जुलाई तक अस्पतालों के कचरे का साफ करायें। दास ने कहा  कि राज्य के अस्पतालों में मैनपावर की काफी कमी है। छोटे-छोटे गैर तकनीकी कार्यों के लिए भी स्टॉफ की काफी जरूरत है। उन्होंने राज्य के आकांक्षी जिलों के आदिवासी व दलित युवाओं को इन कार्यों के लिए स्किल्ड करने का निर्देश दिया, जिससे इन्हें रोजगार मिले और अस्पतालों को भी मैन पावर मिल जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में मातृत्व मृत्युदर व शिशु मृत्युदर को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार इसके लिए गंभीर प्रयास कर रही है। पहले की तुलना में झारखंड में इन दोनों मानकों में काफी सुधार हुआ है। शिशु मृत्युदर 2014 में प्रति हजार जहां 34 थी, वह घट कर 29 पर आ गयी है। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, अपर मुख्य सचिव सह विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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