भारत का असली बैंक भूगर्भ जल: राजेंद्र सिंह

गया। मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित और जलपुरुष के रूप में विख्यात डा. राजेंद्र सिंह शनिवार को गया संग्रहालय के सभागार में आयोजित जल-जीवन-हरियाली योजना के अंतर्गत आयोजित  पानी पंचायत में उपस्थित जिले के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से रुबरु हुए। जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने वाटरमैन ऑफ इंडिया डाक्टर राजेंद्र सिंह का परिचय कराया। डीएम अभिषेक सिंह ने जल पुरुष राजेंद्र सिंह को गया की समस्याओं को अवगत कराया। डीएम श्री सिंह ने गया जिले की ओर से उनका स्वागत किया। राजेंद्र सिंह के साथ जगदीश चौधरी, पंकज मालवीय एवं सीमा सिंह का भी हार्दिक स्वागत किया गया। 

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने जिले के जन प्रतिनिधियों को राजस्थान में किए गए अपने कार्यों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारत का असली बैंक भूगर्भ जल है जिसे सुरक्षित करें। उन्होंने कहा कि आज भी देश में आधे से ज्यादा इलाका पानी से जूझ रहा है। 17 राज्यों के 365 जिले जल संकट से जूझ रहे हैं जबकि 190 जिले बाढ़ की समस्या से। उन्होंने कहा कि वर्षा के  जल से मिट्टी का कटना एवं तीव्र जलधारा के कारण नदी में गाद का जमना इस समस्या का प्रमुख कारण है। यदि इसको हम ठीक कर लें  तो समस्या समाप्त हो जाएगी। 

उन्होंने कहा कि वर्षा का जल मिट्टी का कटाव ना कर सके इसके लिए उसे वहीं पर रोकना जरूरी है। इसके लिए बड़े- बड़े तालाब, आहर, पोखर, कुएं  बनवाने होंगे। धारा के प्रवाह  को मंद  करना होगा। नदी जब गहरी रहती है तो पानी नदी में बहता  है और इससे भूगर्भ जल भी रिचार्ज होता है लेकिन नदी में गाद गिरने के कारण यह पानी गांव एवं शहर की ओर चला  जाता  है जिससे बाढ़ आ जाती है और भूगर्भ जल भी रिचार्ज नहीं होता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में वे ग्रामीण और युवकों के सहयोग से 11800 जोहड़ बनवाये हैं। 36 वर्षों में 12 नदियों को पुनः जिंदा किया है।

उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल का चयन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी समस्या के समाधान के लिए अपने भगवान का सम्मान करना होगा। उन्होंने समझाया कि किस तरह से ग्राउंड वाटर और सरफेस वाटर के कारण उस क्षेत्र में परिवर्तन होता है और वर्षा आकर्षित होती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक वर्ष में सिर्फ 6 इंच बारिश होती है जबकि बिहार में डेढ़ मीटर बारिश वर्ष में होती है इसलिए बिहार के लोग भगवान के लाडले हैं। यदि वे अपने व्यवहार में परिवर्तन कर लें  तो इस समस्या का समाधान आसानी से किया जा सकता है। केवल उन्हें पानी के महत्व को समझना होगा और अपने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा ताकि धरती का तापमान नियंत्रित  किया जा सके। नदी के फ्लो को स्लो करना होगा तभी जाकर बाढ़ और सुखाड़ की समस्या से निजात मिल पाएगी ।

 उन्होंने कहा कि वे बिहार के एक तिहाई जिले का भ्रमण कर चुके हैं साथ ही भारत के अनेक राज्यों का भ्रमण कर चुके हैं लेकिन जिस तरह से कार्य इस अभियान के अंतर्गत गया में किया जा रहा है, ऐसा कार्य कहीं नहीं किया जा रहा है उन्होंने जनप्रतिनिधियों को इस अभियान से जुड़कर इसे  सफल बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी समस्या का समाधान खुद करना होगा। उन्होंने कहा कि जब गया को उनकी जरूरत होगी जब उन्हें बुलाया जाएगा वह इस अभियान में सहयोग देने के लिए गया में हाजिर हो जाएंगे। उन्होंने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से धरती का  तापमान कम होने पर बरसात में वृद्धि होने के कारण को समझाया और इस बिंदु पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अनेक सवाल- जवाब किए। 

इस अवसर पर महापौर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी देवी, उप विकास आयुक्त किशोरी चौधरी, नगर आयुक्त सावन कुमार, सहायक आयुक्त केएम अशोक, उप महापौर मोहन श्रीवास्तव, जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेश पासवान उपस्थित थे।

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