कश्मीर में बढ़ी हिंसा और कश्मीरियों की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय

-अनवार अहमद नूर-

भारत का अभिन्न अंग कश्मीर पिछले काफी समय से आतंक और हिंसा का केन्द्र बना रहा है राजनीतिक अस्थिरता के साथ साथ वहां से लगातार मुठभेड़ों और खून खराबे की खबरें आती रहीं हैं लेकिन पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों के साथ मारपीट और धमकी की खबरें कुछ अधिक बढ़ गयी हैं जिससे चिन्तित होकर भारतीय ग्रहमंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर कश्मीरी छात्रों और लोगों की सुरक्षा की व्यवस्था को कहा है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 44 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने के बाद देशभर के अलग-अलग हिस्सों से कश्मीरी लोगों पर हमले की खबरें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को गाइडलाइन जारी की है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कश्मीरी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है। कश्मीरियों पर हमले की खबरें सामने आने के बाद कश्मीर में बंद का एलान किया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि पुलवामा में आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों और छात्रों को धमकी और परेशान करने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं। इसलिए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि उनकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। वहीं जम्मू में दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई है। शहर में लगातार कर्फ्यू जारी है। एक खबर के मुताबिक देहरादून में किराए के घरों में रह रहे कुछ कश्मीरी छात्रों ने बताया कि उनके मकान मालिकों ने उनसे घर खाली करने के लिए कहा है, जो कि उनकी संपत्ति पर हमले से डर रहे हैं। पटना में कश्मीरी व्यापारियों ने बताया है कि उन पर भीड़ ने हमला कर दिया। कश्मीर के व्यापारी बशीर अहमद ने कहा है कि कुछ लोग लाठियों के साथ आकर उसकी दुकान के सामने इकट्ठे हो गए। उन्होंने नारे लगाए। उस वक्त तक उसे पुलवामा हमला के बारे में जानकारी भी नहीं थी। लेकिन उन्होंने दुकान में सामान तोड़ा,और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।वह पिछले 35 साल से पटना में काम कर रहे हैं। वहीं जम्मू कश्मीर से बाहर रह रहे कश्मीरियों को कथित तौर पर दी जा रही धमकियों की खबरों के मद्देनजर श्रीनगर स्थित सीआरपीएफ हेल्पलाइन ने कहा कि वे किसी भी तरह के उत्पीड़न के मामले में उनसे संपर्क करें। मददगार’ हेल्पलाइन ने इस सिलसिले में एक ट्वीट कर कहा है कि इस समय राज्य से बाहर कश्मीरी छात्र और आम लोग उसके ट्वीटर हैंडल पर संपर्क कर सकते हैं। जयपुर ग्रामीण के चंदवाजी थाना क्षेत्र स्थित एक निजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार छात्राओं को कॉलेज और हॉस्टल से निलंबित कर दिया प्रशासन की ओर से चारों छात्राओं के खिलाफ इस संबंध में चंदवाजी थाने में एक मामला दर्ज करवाया गया है। पुलिस अधीक्षक (जयपुर ग्रामीण) हरेन्द्र कुमार ने बताया है कि एक मामले में चारों छात्राओं के खिलाफ आई टी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जम्मू कश्मीर में पिछले पांच साल में देशी बम और अन्य बम विस्फोट लगातर बढ़े हैं एवं 2018 में ऐसी घटनाएं 57 फीसदी बढ़ी हैं, जबकि वाम चरमपंथ के क्षेत्रों और उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर में ऐसी घटनाएं घटी हैं। एक नवीनतम रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है। पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे इस राज्य में 2014 में 37 बम (देशी बम एवं अन्य बम) धमाके, 2015 में 46 ऐसे बम धमाके, 2016 में 69 ऐसे बम धमाके, 2017 में 70 ऐसे बम धमाके और 2018 में 117 ऐसे बम धमाके हुए। एनएसजी के नेशनल बम डेटा सेंटर (एनबीडीसी) ने अपने दो दिवसीय सम्मेलन में इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर और वहां देशी बम एवं अन्य विस्फोटों के बढ़ते खतरे का विशेष उल्लेख किया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आयी है जब जांचकर्ताओं को संदेह है कि 14 फरवरी का पुलवामा आतंकवादी हमला जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी ने किया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर छोड़कर देश के सभी हिस्सों में देशी बम धमाकों में काफी कमी आयी है। जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने 2018 में देशी बमों का अधिक इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार देश के वाम चरमपंथ क्षेत्रों में 2017 में 98 देशी बम विस्फोट हुए, जबकि 2018 में 77 ऐसी घटनाएं हुईं। उसके उलट जम्मू कश्मीर में 2017 में 21 देशी बम धमाके हुए और उसके अगले साल यानी 2018 में उससे 57 फीसद बढ़कर 33 हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे सर्वांगीण रूप से देशभर में देशी बम विस्फोट काफी घट गये, लेकिन जम्मू कश्मीर, वामचरमपंथ क्षेत्र एवं पूर्वोत्तर में ऐसी घटनाओं में इन विस्फोटों में हताहतों की संख्या काफी बढ़ गयी। पुलवामा हमले के बाद देश भर में आतंक के खिलाफ गुस्से की लहर है और इसी लहर के चलते कश्मीर के लोगों की सुरक्षा का सवाल भी गंभीर रूप से खड़ा हो गया है राजधानी दिल्ली से लेकर अन्य राज्यों तक में कश्मीरी छात्रों और वहां के रहने वालो की सुरक्षा को खतरा महसूस किया जा रहा है और सिर्फ खतरा ही नहीं बल्कि कई स्थानों पर उन्हें प्रताड़ित करने की भी खबरें हैं राजधानी के जंतर-मंतर पर पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत विरोधी नारेबाजी के आरोप में एक कश्मीरी युवक की लोगों ने जमकर धुनाई की। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे किसी तरह से भीड़ से बचा लिया, नहीं तो उत्तेजित भीड़ की पिटाई से उसकी जान भी जा सकती थी। फिलहाल इस युवक का प्राथमिक उपचार कराने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अलावा आईबी सहित अन्य एजेंसियों की टीम पूछताछ कर रही है। स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड आॅर्डर आर.पी. उपाध्याय के मुताबिक युवक नशे में है। इस कारण अभी यही पता नहीं चल पाया है कि आखिरकार उसने क्यों भारत विरोधी नारेबाजी की और क्यों पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने लगा। इस युवक की पहचान श्रीनगर स्थित हजरत बल निवासी 28 वर्षीय आबिद के रूप में हुई है। स्पेशल कमिश्नर के मुताबिक पूछताछ के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि उसने क्यों यह हरकत की और वह क्यों दिल्ली आया था। आबिद नाम का यह कश्मीरी युवक अचानक ही उस वक्त जंतर मंतर पर पहुंच गया, वहां मौजूद लोग पुलवामा में हुए आतंकी हमले में मारे गए सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे थे। इस पर श्रद्धांजलि सभा व कैंडल मार्च करने के लिए आए लोगों ने गुस्से में आकर उसकी जमकर धुनाई कर दी। कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमले के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पांच नेताओं की सुरक्षा हटा ली। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह कठोर कदम उठाया है। जिन हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ली है उनमें हुर्रियत कांफ्रेंस (एम) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शब्बीर शाह के नाम शामिल हैं। सरकार के इस फैसले के बाद इन अलगाववादी नेताओं को मुहैया कराई गई सुरक्षा और सभी सरकारी सुविधाएं वापस ले ली गयीं। सरकार के इस फैसले में पाकिस्तान समर्थक कट्टरवादी धड़े जमात-ए-इस्लामी के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का नाम नहीं है। सूत्रों का कहना है कि उनके पास पहले से ही कोई सुरक्षा नहीं है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब इन नेताओं और उनके समर्थकों में खलबली मच गई है। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश में कुछ स्थानों पर कश्मीरियों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने पर कहा है कि कश्मीर महज जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह लोगों से मुकम्मल होता है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरियों पर हमले कर लोग कह रहे हैं कि कश्मीर घाटी के बाहर उनके लिए कोई जगह नहीं है और देश की मुख्य भूमि (शेष भारत) में उनका कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि कश्मीरियों को निष्कासित कर किसके उद्देश्य पूरे किए जा रहे हैं। उमर ने कहा, जम्मू-कश्मीर के बाहर पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों को वैसे लोगों के उदाहरण के रूप में देखना चाहिए, जो कश्मीर में राजनीति और संघर्ष से अलग रहते हैं और जिन्होंने इसके बजाय अपने लिए एक भविष्य बनाना चुना है। लेकिन उन पर हमले कर, उन्हें आतंकित कर और उन्हें शरण लेने को मजबूर कर, उनसे कहा जा रहा है कि घाटी के बाहर उनके लिए कोई जगह नहीं है और न ही मुख्यभूमि पर उनके लिए कोई भविष्य है। उन्होंने कहा कि कश्मीर महज जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह लोगों से मुकम्मल होता है। उनका यह बयान जम्मू में कश्मीरियों पर हमले होने और राज्य के बाहर कुछ स्थानों पर उन्हें प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं के बाद आया है। उमर ने कहा कि दुश्मन कश्मीर घाटी के लोगों और देश के बाकी हिस्सों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। स्वराज इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव ने पुलवामा हमले और इस संबंध में भारत की किसी जवाबी कार्रवाई को चुनावी राजनीति का मुद्दा नहीं बनाएं जाने का आग्रह किया है। यादव ने कहा कि इस हमले का जवाब कैसे दिया जाए यह काम सुरक्षा बलों के नेतृत्व को सौंप दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए। यदि यह कार्रवाई सफल होती है तो सत्तारूढ़ दल को इसका ढ़िंढ़ोरा नही पीटना चाहिए। कार्रवाई में यदि कोई समस्या आती है तो विपक्ष को सरकार पर दोषारोपण भी नही करना चाहिए। स्वराज इंडिया के नेता ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इस बयान की आलोचना की कि केंद्र में कांग्रेस नही बल्कि भाजपा की सरकार है इसलिए जवाबी कार्रवाई अवश्य होगी। यादव ने टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से देश में उत्तेजना न फैलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों के साथ संवाद कायम करना समय की मांग है। पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद कश्मीरी छात्रों को कथित तौर पर सताए जाने की खबरों के बाद यहां राजधानी दिल्ली में कई कश्मीरी छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। वहीं, पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। मीडिया में आई खबरों के अनुसार जम्मू कश्मीर के बाहर रहने वाले कई कश्मीरियों ने पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद उन्हें प्रताड़ित किए जाने और उन पर हमले किए जाने का दावा किया है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक कश्मीरी छात्र ने कहा कि महज इसलिए कि कोई व्यक्ति कश्मीरी है, चाहे उसकी विचारधारा या झुकाव कुछ भी हो, उसके जीवन को जोखिम में डालने के लिए यह पर्याप्त है। यह पूरे देश में हो रहा है। देहरादून, अंबाला या बेंगलुरू, हर जगह कश्मीरी छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कश्मीर निवासी जेएनयू कार्यकर्ता ने कहा कि पूरे भारत में भीड़ कश्मीरी छात्रों को निशाना बना रही है, उन्हें गालियां दे रही हैं, उन्हें निष्कासित करने की मांग कर रही है और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर रही है। हर मामले में कहा जा रहा है कि उन्होंने (कश्मीरी छात्रों ने) पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए और यहां तक की पुलिस भी उनके इन झूठे दावों पर विश्वास कर रही है। अन्य राज्यों में जो कुछ हो रहा है, उसके दिल्ली में भी होने का भय प्रकट करते हुए शेहला ने कहा कि हमें भीड़ द्वारा छात्रों की पीट-पीटकर हत्या करने का अंदेशा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र अनीस अहमद ने कहा कि हम सोशल मीडिया पर किए जाने वाले किसी भी दुर्व्यवहार पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहें, यहां तक कि अगर हमें आतंकवादी भी कहा जा रहा तो भी नहीं। जो छात्र हॉस्टल के बजाय किराए के मकान में रह रहे हैं, वे अपनी सुरक्षा को लेकर अधिक डरे हैं। पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने ट्वीट किया कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों सहित पूरी दिल्ली में सुरक्षा सख्त कर दी गई है। उन्होंने कहा, पुलिस कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। हम कश्मीर निवासी और दिल्ली में रहने वाले छात्रों सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने भी कश्मीरियों पर किए जा रहे कथित हमलों की निंदा की है। गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों के संबंध में एक परामर्श जारी किया । बहरहाल कश्मीरियों की सुरक्षा का एक अहम मुददा अब सामने आ खड़ा हुआ है कश्मीर और कश्मीरियों के जान माल की सुरक्षा ज्वलंत विषय बना है इस पर कार्यवाही और समझदारी की आवश्यकता है ।

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