सऊदी शहज़ादे की पाकिस्तान यात्रा के निहितार्थ

लॉस एंजेल्स: सऊदी शहज़ादे मुहम्मद बिन सलमान की रविवार को इस्लामाबाद में दो दिवसीय यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब एक ओर जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद के कारण भारत के केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 48 शहीदों ने जानें गँवाई हैं, तो उसी वक़्त दूसरी ओर पड़ौसी देश ईरान में भी ख़श-जाहेदान रोड पर जैश अल-अदल के आतंकी हमले में ठीक उसी शैली में कार में भरे विस्फोटक से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के 27 जवानों को जान गँवानी पड़ी है। ईरान ने भी सीधे सीधे पाकिस्तान में पनाह लेने वाले आतंकी गुट जैश अल-अदल पर आरोप मढ़ा है।
इमरान खान सरकार ने सऊदी शहज़ादे की सुरक्षा के लिए विशेष बंदोबस्त किए हैं। सऊदी शहज़ादे के विशेष विमान के समय आकाश में सभी उड़ानों पर रोक लगाई गई है, तो विशेष मेहमान को प्रधान मंत्री के सरकारी आवास में ठहराया जा रहा है। अमेरिकी और पश्चमी मीडिया की माने तो पाकिस्तान की इस यात्रा का लब्बो-लुआब दोनों को ही एक दूसरे की गरज है। सऊदी शहज़ादे को खाड़ी में वर्चस्व के लिए ईरान पर नकेल कसने के लिए इस्लामिक बिरादरी में मित्र देश की दरकार के अलावा अमेरिका के वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के सिलसिले में बदनुमा दाग़ को दबाने ढकने में सहायक मित्र चाहिए। सऊदी अरब को यमन के लिए भी पाकिस्तानी सेना की टुकड़ी की दरकार रहेगी, जिसके लिए वह विशेष रूप से पाकिस्तान के जनरल कमर वहद बाजवा से मिलना चाहेंगे।
इसके विपरीत पाकिस्तान को ख़ाली ख़ज़ाने की भरपाई में ऐसे मित्रों की तलाश है, जबकि उसे आई एम एफ के आगे हाथ फैलाने का कम से कम मौक़ा मिले। सऊदी अरब ने ग्वाडार बंदरगाह के समीप एक बड़ी रिफ़ाइनरी में निवेश और आर्थिक मदद के लिए दस अरब डालर की मदद करने का आश्वासन दिया है।
अमेरिकी मीडिया की इस यात्रा को लेकर इसलिए भी रुचि बढ़ गई है कि अफ़ग़ानिस्तान पर शांति वार्ता के लिए बैठक इस बार क़तर में न हो कर पाकिस्तान में हो रही है। इस वार्ता को लेकर भारत और अमेरिका के साथ-साथ ईरान तथा चीन भी नज़रें लगाए हुए है। ऐसे में खाड़ी में अपने हितों को देखते हुए सऊदी अरब पीछे नहीं रह सकता। इस यात्रा के बाद सऊदी शहज़ादे का भारत सहित चीन के दौरे पर भी जाना तय है।

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