अभी भी जारी है पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों का बलात्कार

-योगेश कुमार सोनी-

न कभी सुधरा है औऱ न ही कभी सुधरेगा। आतंक का गढ़ बन चुके पाकिस्तान में लगातार हिन्दू लड़कियों का बलात्कार करते धर्म परिवर्तन जारी है। लेकिन इस बार पाकिस्तान की मानवाधिकार की कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल के अनुसार पाकिस्तानी सेना वहां रहीं हिन्दू महिलाओं का बलात्कार करती है और बाद में उनको गायब कर देती हैं। इसके अलावा सेना आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर बेकसूर पश्तूनों की हत्या सिलसिला भी लगातार जारी है।

हालांकि यह मामला पहली बार सामने नही आया। दोनों देशों के बंटवारे लेकर आज तक हम ऐसी खबरें सुनते आ रहे हैं। हर मामलों को लेकर पाकिस्तान का झूठ पकड़ा जाता है और बेनकाब होता आया है लेकिन मानने व सुधरने को कभी राजी न हो सका। बेहद गंभीर स्थिति से गुजर रहे सभी अल्पसंख्यक यदि कोई आवाज़ उठाने का प्रयास करते भी हैं तो वह खुलेआम मार दिए जाते हैं।

हर घिनौनी कहानी को अंजाम देने वाला पाकिस्तानी शासन-प्रशासन से पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत भी करते हैं तो कोई कार्रवाई नही होती। वहां सरकार, सेना और आतंकवादी हर कोई मिला हुआ है। सबका उद्देशय एक ही है इस्लाम को छोड़कर अन्य धर्मों को खत्म करना। जब से भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ है तब से लेकर आज तक वहां हिन्दुओं व अन्य धर्मों पर अत्याचार होता आ रहा है। आजादी के समय पाकिस्तान में हिंदुओ और सिखों की जनसंख्या मिलाकर करीब एक करोड़ थी लेकिन अब ताजा आंकडों के मुताबिक बारह लाख हिंदू और दस लाख सिख रह गए। पाकिस्तान में हिन्दुओं के लिए आवाज उठा रहे लोगों ने हमेशा इस बात से अवगत कराया है कि यहां हिन्दुओं लड़कियों का रेप होता है औऱ फिर उनको गर्भवती करके उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता रहा है। ऐसी ही स्थिति सिखों और ईसाइयों की भी मानी जाती रही है। यह सिलसिला बंटवारे से लेकर अब तक जारी है।

इस बात की पुष्टि इसलिए भी हो जाती हैं क्योंकि वहां हिन्दुओं की जनसंख्या लगातार घट रही है। जितने हिंदू वहां पैदा होते हैं और फिर उनके मरने के आंकड़ों को देखा जाए तो वहा आपस में नही मिलते क्योंकि उनका धर्म परिवर्तन जारी है, खासतौर पर लड़कियों के आंकड़े ज्यादा आश्चर्यचकित करने वाले हैं। वहां के कुछ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में प्रारंभिकता से भेदभाव रखा जाता है। अल्पसंख्यक विधार्थियों को उनके धर्म से नफरत का पाठ पढ़ाया जाता है। यदि अभिभावक इसका विरोध करते हैं तो उनको स्कूल से नाम काटने की धमकी देते हैं। गुलामी की मानसिकता बनाने का काम यहीं तक नही रुकता, यदि अन्य धर्म के लोग अपना पर्व भी अपने तरीके से मनाना चाहें तो भी नही मना सकते। हर मामलें में तमाम तरह के प्रतिबंध लगाकर उनकी सांस तक को गिरफ्त कर लिया जाता है।

वैसे तो देश में यूएन में हरेक मुद्दा उठता आया है लेकिन इस मामले में हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह रहा है कि हम आज तक कुछ नही कर पाए। आतंकियों का स्वर्ग कहे जाने वाले पाकिस्तान से यदि किसी मुद्दे का हल निकालने की बात कही भी जाए तो वह किसी बात के लिए राजी नही होता। हाल ही में यून सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कितना जहर उगला वो साफ तौर दिख रहा था। यूएन के मंच से भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी। एक कहावत है कि ‘रस्सी जल गई लेकिन बल नही गए’ वाली तर्ज पर आज भी पाकिस्तान चल रहा है। पाक में रह रहे हिन्दुओं के साथ दुर्रव्यवहार से वहां के लोग बेहद परेशान हो चुके हैं। हमें यहां सुनकर बुरा लगता है और जो लोग इस तरह की यातनाएं सह रहे हैं उनके दिल पर क्या बीतती होगी। वहां रह रहे हमारे भाई-बहनों की जिंदगी को जहन्नुम बनाने वाले राक्षसों को सुधारने का समय आ चुका क्योंकि जिस तरह वहां अन्य धर्मों की जनसंख्या वहां घट रही है उस आधार पर अब वो दिन दूर नही कि वहां एक भी हिन्दू, सिख व ईसाई होगा। मंदिर, गुरद्वारों, चर्च के अलावा शियाओं की मस्जिदों पर हमले की खबर आम बात हो चुकी हैं। जग-जाहिर है कि आज पाकिस्तान की माली हालात कितनी बेकार है। इतने बड़े आर्थिक संकट से झूझने के बाद भी हरकतें वैसी की वैसी हैं। पूरे विश्व में हसी का पात्र बन चुका पाकिस्तान के पाप का घड़ा हर तरह से भर चुका। वैसे तो जो भी वहां हिन्दुओं व अन्य धर्मों के न्याय के लिए आवाज उठाता है तो उसको मार दिया जाता है लेकिन गुलालई इस्माइल जैसे लोग पूरी दुनिया में पाकिस्तान की सच्चाई बताने का दम रखते हैं। ऐसे लोगों ने समय-समय पर पाकिस्तान की स्थिति खुलासा किया है। हालांकि गुलालई अब अमेरिका में शरण लेने का प्रयास कर रही हैं क्योंकि यह बात उनकों और पूरी दुनिया को पता है कि यदि वो पाकिस्तान वापिस गई तो निश्चित तौर जान से मारी जाएगी। पाकिस्तान में रह रहे सभी अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे अत्याचार मामलें में विश्वस्तरीय जांच, सहयोग व एक्शन लेने की जरुरत है पाकिस्तान आसानी से मानने वाला देश नही हैं।

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