लोकतंत्र हमारी संस्कृति और विरासत का हिस्सा : मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आपातकाल को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र हमारी संस्कृति और विरासत का हिस्सा है और 19 महीनों के दौरान देश की जनता को लगा कि उससे कुछ छीन लिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद अपने पहले ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में रविवार को लोकतांत्रिक भावना की बात करते हुए कहा कि आपातकाल का राजनीतिक दलों और उसके नेताओं ने ही नहीं बल्कि आम आदमी ने भी विरोध किया था। उन्होंने कहा, जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था। राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था। जेल के सलाखों तक आंदोलन सिमट नहीं गया था। जन-जन के दिल में एक आक्रोश था। खोये हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी। दिन-रात जब समय पर खाना खाते हैं तब भूख क्या होती है इसका पता नहीं होता है, वैसे ही सामान्य जीवन में लोकतंत्र के अधिकारों की क्या मजा है वो तो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लेता है। आपातकाल में देश के हर नागरिक को लगने लगा था कि उसका कुछ छीन लिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत गर्व के साथ कह सकता है कि कानून और नियमों के अलावा लोकतंत्र हमारा संस्कार, संस्कृति और विरासत है और उसे ही लेकर हम पले-बढ़े हैं और इसलिए उसकी कमी देशवासी महसूस करते हैं और आपातकाल में हमने अनुभव किया था। इसके कारण 1977 में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान किया गया था।

हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव पर उन्होंने कहा कि देश की चुनाव प्रक्रिया का पैमाना हर भारतीय को गौरवान्वित करता है। यह हमारे लोकतंत्र में लोगों के विश्वास के बारे में बताता है। चुनाव में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिया। दूसरे अर्थों में कहें तो चीन को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लोगों ने मतदान किया था। यह आंकड़ा अमेरिका की कुल जनसंख्या से भी करीब दोगुना है। भारत में कुल मतदाताओं की जितनी संख्या है, वह पूरे यूरोप की जनसंख्या से भी ज्यादा है। यह हमारे लोकतंत्र की विशालता और व्यापकता का परिचय कराती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लोकसभा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। अरुणाचल प्रदेश के एक रिमोट इलाके में, महज एक महिला मतदाता के लिए पोलिंग स्टेशन बनाया गया। चुनाव अधिकारियों को वहां पहुंचने के लिए दो-दो दिन तक यात्रा करनी पड़ी। दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्र भी भारत में ही है। यह मतदान केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में 15,000 फीट की ऊंचाई पर है।

उन्होंने चुनाव में महिलाओं की सहभागिता पर खुशी जताई। कहा, इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि महिलाओं ने पुरुषों की तरह ही उत्साह से मतदान किया है। इस चुनाव में महिलाओं और पुरुषों का मतदान प्रतिशत करीब-करीब बराबर था। इसी से जुड़ा एक और उत्साहवर्धक तथ्य यह है कि आज संसद में रिकॉर्ड 78 महिला सांसद हैं।

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