दल बदल को बढ़ावा देने व मौकापरस्तों को स्थापित करने वाला फैसला : कांग्रेस

रांची ।  झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि तीन साल 10 महीने तक 10वीं अनुसूची के अंतर्गत दल बदल मामले में आया फैसला दल बदल को बढ़ावा देने एवं मौका परस्तों को राजनीति में स्थापित करने वाला फैसला है। बुधवार को उन्होंने कहा कि आज पूरे राज्य की जनता की निगाहें स्पीकार के फैसले पर टिकी हुई थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने पंच परमेश्वर को तार-तार कर दिया। स्पीकर का यह कहना है कि दल-बदल नहीं हुआ है, बल्कि एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हुआ है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। निराशजनक है और गलत है। सत्ता के साथ खड़ा रहना और सरकार को संरक्षण प्रदान करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने बहुप्रतिक्षित फैसला सुनाया है। कुमार ने कहा कि झारखंड विधानसभा के छह सदस्यों पर 10वीं अनुसूचि के अंतर्गत दल बदल कानून के मामले में स्पीकर कोर्ट का फैसला दल-बदल कानून का अपमान है। इससे लोकतंत्रिक ढांचा कमजोर हुआ है। उहोंने कहा कि स्पीकर ने सत्ता पक्ष के प्रभाव में आकर उनको मदद करने की नीयत से विलय को जायज ठहराया है। दसवीं अनुसूची में कहा गया है कि जब सदन में ऑरिजिनल पॉलिटिकल पार्टी का विलय दूसरी पॉलिटिकल पार्टी के साथ होता है और यह क्लेम किया जाए कि वह और दूसरे अन्य सदस्यों ने इनकी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है या इस तरह के विलय से नया राजनीतिक दल का गठन कर लिया है, तब यह मर्जर के दायरे में आयेगा और सदायता रद्द नहीं होगी। परंतु यहां पर झाविमो के छह सदस्य भाजपा में शामिल हो जाते हैं और नये दल की सदस्यता से संबंधित रसीद/खाता को 16 फरवरी 2015 को स्पीकर कोर्ट में पहली पेशी में सबूत के तौर पर जमा नहीं कर पाते हैं और बराबर कोर्ट द्वारा मांगे जाने पर छह महीना बाद फर्जी खाता दिखाते हैं। छह सदस्यों द्वारा पार्टी के किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के शामिल होने का कोई सबूत कहीं नहीं दिखलायी पड़ता है। सिवाय फर्जी रजिस्टर के जिसे गठन करने में छह महीना समय लगा और मंत्री बनने के बाद या सत्ता दल में शामिल होने के बाद अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से स्पीकर कोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध कराते है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि मर्जर को सही ठहराना गलत राजनीति को प्रश्रय देगा और भविष्य में भी इस तरह के दल बदल को अवसर मिलेगा। छले गये मतदाताओं के साथ विश्वासघात हुआ है, ठगे हुए मतदात आशा भरी निगाहों से स्पीकर के निर्णय की प्रतीक्षा में थे मगर उन्हें निराश हाथ लगी है।

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