व्यंग्य : फर्जी है सब फर्जी है, देखो भई मनमर्जी है

अगर फर्जी को फर्ज समझ लिया जाए और दुनियावालों पर एक कर्ज समझ लिया जाए तो बताइए हर्ज क्या है। कुछ सिरफिरों का कहना है कि दुनिया क्रांति से बेहतर होगी। अरे भइया, जब फर्जी से ही काम चल सकता है तो फिर क्रांति की क्या जरूरत है। मसलन, देखिए सबके लिए शिक्षा नहीं होगी, सबके लिए रोजगार नहीं होगा तो क्या? सबके लिए डिग्रियां तो होंगी। बल्कि सरकार चाहे तो देश की समृद्धि भी फर्जी ही दिखा दे। एक जरा सी कोशिश से अगर हमारे सुपर पावर बनने का…

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कहानी: हरम

-अजय गोयल- वेटिंग हॉल में टंगी गुलाम भारत की याद दिलाती दिल्ली दरबार की जीवन्त आदमकद पेंटिंग होटल में आने वाले को क्लीन बोल्ड कर देती। पहली नजर में सकपकाये आगंतुक को लगता कि बरतानिया के किंग जॉर्ज और रानी मेरी उसके स्वागत के लिए वर्षों से बैठे-बैठे पथरा गये हैं। उन दोनों के पीछे सजे-धजे खड़े और अपनी-अपनी पगड़ियों में बंधे भारतीय राजा महाराजे उनको लांघने के लिए नाकाम आतुर लगते। दस घंटे की लंबी सड़क यात्रा के बाद पंकज शिमला के उस होटल के कमरे में जाकर आराम…

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