बजट 2021 : राष्‍ट्र की जरूरतों के अनुरूप

पिछले सप्‍ताह, बजट 2021 असामान्‍य परिस्थितियों में संसद के पटल पर रखा गया। महामारी ने हमारे सामाजिक और आर्थिक हालात के लिए गंभीर चुनौतियां पेश की हैं। इसने हमारी स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल प्रणालियों, अर्थव्‍यवस्‍था, शासन, सामाजिक संरचनाओं और इनसे भी ऊपर एक राष्‍ट्र के रूप में ऐसी संकटपूर्ण स्थिति का मुकाबला करने के लिए हमारे सामर्थ्‍य की परीक्षा भी ली है।

यह अक्सर कहा जाता है कि “संकटपूर्ण स्थितियां या तो आगे बढ़ने का अवसर देती है, या जहां हैं, वहीं रूक जाने के लिए बाध्य करती हैं।” यहां, मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन की सराहना करना चाहूंगा, जिन्होंने तेजी से विकसित हो रही ‘कोविड के बाद की विश्व व्यवस्था’ में आत्मनिर्भर होने के महत्व को अनुभव किया और तुरंत देश को ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ में बदलने की योजना तैयार की। बजट 2021, इसी विजन की अभिव्यक्ति है।

अर्थव्यवस्था में गिरावट, कल्याण कार्यों पर अतिरिक्त खर्च और बढ़ते हुए राजकोषीय घाटे के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को ‘वी’ आकार में वापस लाने और लोगों की आजीविका को सुरक्षित करने की दोहरी चुनौतियां मौजूद थी। इसके बावजूद, वित्त मंत्री एक शानदार बजट लेकर आई हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था से जुडी समस्याओं के लिए एक ‘वैक्‍सीन’ साबित होगी।

सरकार ने बजट 2021 के माध्यम से किसानों की आशंकाओं को दूर किया है। कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर की शुरुआत, कृषि ऋण को बढाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये किया जाना और एपीएमसी के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बुनियादी ढांचा कोष में आवंटन आदि से किसानों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का पता चलता है। सभी जिंसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करने के केन्द्र के वादे की सदन में प्रधानमंत्री के अपने शब्दों “एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा” में पुन: पुष्टि हुई है।

सरकार ने बुनियादी ढांचे के निवेश पर अधिक जोर दिया है और विकास एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे के खर्च के गुणक प्रभावों पर भरोसा जताया है। 5.54 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बजट अनुमान 2021-22 के लिए पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो बजट अनुमान 2020-21 की तुलना में 34.5 प्रतिशत अधिक है। 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ विकास वित्तीय संस्थान की स्थापना, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के निर्माण से आगामी परियोजनाओं के लिए संसाधनों को जुटाने में काफी मदद मिलेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को 1,08,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय सहित 1,17,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है और यह अब तक का सबसे अधिक आवंटन है। इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में दौरान अभूतपूर्व प्रगति हुई है और तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम राज्यों में लगभग 2,24,000 करोड़ रुपये के निवेश से तीन नए आर्थिक गलियारों की घोषणा से और प्रगति होने की उम्मीद है।

यह जानकर खुशी हुई है कि सरकार ने राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार की है। इसका वित्‍त मंत्री ने भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली के रूप में उल्‍लेख किया है। पश्चिमी और पूर्वी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं के 2022 तक पूरा होने के अलावा, सरकार ने नई फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं का भी प्रस्ताव किया है। इससे माल ढुलाई सहज हो सकेगी और हमारे उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी।

भारत में शहरी आबादी में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस बढ़ती हुई शहरी आबादी के लिए मौजूदा शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार करने, नई सुविधाओं की व्यापक योजना बनाने तथा रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है। बजट 2021 में सरकार ने 18,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पीपीपी मोड में सार्वजनिक बस परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। टियर-2 शहरों और टियर-1 शहरों के बाहरी हिस्से को कवर करने के लिए मेट्रो रेल और आरआरटीएस नेटवर्क को और मजबूत बनाया जा रहा है।

अगले 5 वर्षों में 2.87 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय के साथ 4,378 शहरी स्थानीय निकायों को पाइप से पानी की आपूर्ति करने के लिए जल जीवन मिशन (शहरी) की घोषणा की गई है। यह घोषणा जल जीवन मिशन (ग्रामीण) की शानदार सफलता पर आधारित है, जिसके माध्यम से 3.04 करोड़ ग्रामीण परिवारों को एक साल में नल से पेयजल उपलब्‍ध कराया गया है। आजादी के बाद से 2019 तक 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल आपूर्ति की सुविधा मिली थी।

मैंने अपने पहले के लेखों में जल जीवन मिशन (जेजेएम) को सामाजिक क्रांति की संज्ञा दी है, क्योंकि इस योजना का परिणाम सिर्फ लोगों को नल का जल उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने पाइप फिटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पंप ऑपरेटर आदि दक्ष कार्यबल की मांग भी पैदा की है। इसने गांव जलापूर्ति योजनाओं की योजना बनाने और उनकी निगरानी के लिए पानी समितियों में महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया है। इससे महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। इसमें समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रकार इसने समावेश और समानता को भी सुनिश्चित किया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में जिक्र करते हुए वित्‍त मंत्री ने बजटीय परिव्यय में 137 प्रतिशत की भारी वृद्धि की घोषणा की हैं। अगले 6 वर्षों में 64,180 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक नई योजना ‘पीएम आत्‍मनिर्भर स्‍वस्‍थ भारत योजना’ की घोषणा की गई है। सरकार ने मिशन पोषण 2.0 और शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 की घोषणा की है, जिनका स्वास्थ्य मानदंडों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

जनजातीय क्षेत्रों में 100 नए सैनिक स्‍कूलों, 750 नए एकलव्य मॉडल आवासीय स्‍कूलों की स्थापना और नई शिक्षा नीति के अनुसार 15,000 मौजूदा स्‍कूलों की गुणवत्ता के उन्‍नयन से युवा पीढ़ी की गुणवत्तायुक्‍त शिक्षा तक पहुंच में सुधार होगा। अगले 5 वर्षों में 35,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुसूचित जाति के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का पुनरुद्धार करना एक स्वागत योग्य कदम है। इससे अनुसूचित जाति के 4 करोड़ से अधिक छात्रों को लाभ होगा और पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी आने से सकल नामांकन अनुपात (उच्च शिक्षा) में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, सभी मंत्रालयों में अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं हेतु समग्र आवंटन को 83,256 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,26,259 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। साथ ही, हमारे बुजुर्ग नागरिकों का विशेष ध्‍यान रखते हुए उन्‍हें टैक्स रिटर्न दाखिल करने से छूट दी गई है, बशर्ते उनकी आय का स्रोत केवल पेंशन और ब्याज ही हो। इसलिए यह बजट मोदी सरकार के सबका साथ, सबका विकास एजेंडे का प्रतीक है।

कुल मिलाकर बजट को अच्‍छा माना गया है और बाजारों ने इसके प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हमारी वित्त मंत्री ने राजकोषीय सूझबूझ से कदम आगे बढ़ाते हुए ऐसा बजट पेश किया है, जो आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करने के लिए पूंजीगत व्‍यय और लोगों के कल्याण तथा लोगों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए सार्वजनिक व्‍यय के बीच एक अच्‍छा संतुलन बनाए रखता है। यह समय की मांग थी और आने वाले समय में आत्‍मनिर्भर भारत के लिए यह एक मजबूत नींव भी रखेगा, इसलिए, मैं इसे ऐसा बजट मानता हूं, जो राष्ट्र की जरूरतों के अनुरूप है।

लेखक – श्री रतन लाल कटारिया, जल शक्ति एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री।

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