बालाकोट में मारे गए थे आत्मघाती हमलावर और आईएसआई एजेंट कर्नल सलीम: प्रत्यक्षदर्शी

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के हमले में पाकिस्तान के बालाकोट में बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावर और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ के एजेंट मारे गए थे, जिनके शवों को हटाने का काम 36 घंटे तक चला।
गत 26 फरवरी को हुए हवाई हमले में आईएसआई का पूर्व अधिकारी ‘कर्नल सलीम’ मारा गया और एक अन्य पूर्व अधिकारी ‘कर्नल ज़रार ज़ाकिरी’ घायल हो गया। पेशावर में जैश-ए-मुहम्मद का प्रशिक्षक मुफ़्ती मोइन और आईईडी विस्फोटक विशेषज्ञ उस्मान गनी भी इस बमबारी में मारा गया था। मृतकों में 12 संदिग्ध आत्मघाती हमलावर शामिल थे, जो एक लकड़ी की झोपड़ी में सो रहे थे। यह अस्थायी आवास जमींदोज हो गया।
भारत के मिराज-2000 विमानों के हमले के बाद पाकिस्तान की सेना ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जाबा अड्डे को अपने घेरे में ले लिया था और लाशों को वहां से हटाया।
आतंकवाद पर नज़र रखने वाली इटली की पत्रकार फ़्रांसेस्का मारिनो ने पहली बार बालाकोट में हुए नुकसान का ब्योरा दिया है। उसने बालाकोट और आसपास के लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से गुप्त भाषा का प्रयोग करते हुए जानकारी हासिल की।
एक वेबसाइट पर प्रसारित अपने लेख में उसने कहा कि चश्मदीद लोगों के अनुसार पाकिस्तानी सैनिकों ने इस अड्डे से 35 शवों को बाहर निकाला।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बमबारी के तुरंत बाद स्थानीय अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच गए। सेना द्वारा उस क्षेत्र को पहले ही घेरे में ले लिया गया था। सैनिकों ने वहां पुलिस को प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं दी। सैनिकों ने राहत के लिए पहुंचे एंबुलेंस और चिकित्सा कर्मियों के मोबाइल कब्जे में ले लिए।
इतालवी पत्रकार ने भारतीय सूत्रों के हवाले से कहा कि युद्धक विमानों ने बालाकोट में एक मदरसा सहित चार इमारतों को नष्ट किया। मीडिया में मृतकों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है लेकिन वायुसेना को जो काम सौंपा गया था वह उसने पूरी तरह अंजाम दिया।

 

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