सीएजी रिपोर्ट: गुप्त सेवा व्यय को लेकर आपत्ति

नई दिल्ली। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी) ने वित्त मंत्रालय के सीक्रेट सर्विस एक्सपेंडिचर्स(गुप्त सेवा व्यय) को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। मंगलवार को संसद में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से रखा गया है। सीएजी इस बात से इतना नाराज दिखा कि इसे रिपोर्ट की विशेषताओं में सम्मिलित किया। मंगलवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी) ने संसद में वर्ष 2017-18 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
संसद में पेश सीएजी रिपोर्ट में गुप्त सेवा व्यय पर टिप्पणी करते हुए सीएजी रिपोर्ट में लिखा गया कि दो दृष्टांतों में वित्त मंत्रालय ने वस्तु शीर्ष ‘गुप्त सेवा व्यय’ के अंतर्गत प्रावधान को बढ़ाने के लिए पुनर्विनियोजन आदेश की सहमति प्रदान करने से पूर्व सीएजी के पूर्व अनुमोदन के संबंध में अपने स्वयं के अनुदेशों का उल्लंघन किया है।
इसके अंतर्गत सीएजी रिपोर्ट में लिखा गया कि वर्ष 2017-18 के लिए गृह मंत्रालय के तहत पुलिस से संबंधित अनुदान क्रमांक 48 में ’41 गुप्त सेवा व्यय’ में कुल मूल प्रावधान 163 करोड़ 65 लाख रुपये था। गृह मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के अनुमोदन से उपरोक्त प्रावधान को बढ़ाने के लिए 150 करोडn>रुपये का पुनर्विनियोजन आदेश जारी किया था। सीएजी ने गृह मंत्रालय के 04 जनवरी,2018 को जारी इसी आदेश पर आपत्ति जताई है।
इसी तरह सीएजी रिपोर्ट में लिखा गया है कि गृह मंत्रालय के तहत कैबिनेट से संबंधित अनुदान के लिए कुल मूल प्रावधान केवल पांच करोड़ रुपये था। गृह मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के अनुमोदन से फिर ’41 गुप्त सेवा व्यय’ के अंतर्गत प्रावधान को बढ़ाने के लिए एक करोड़ 25 लाख रुपये का पुनर्विनियोजन आदेश जारी किया। सीएजी रिपोर्ट में 07 जनवरी,2018 को जारी इसी आदेश पर आपत्ति जताई है।
इसके जवाब में वित्त मंत्रालय ने लिखा कि पुनर्विनियोजन से पहले सीएजी का अनुमोदन प्राप्त करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। लेकिन सीएजी ने वित्त मंत्रालय के इस उत्तर को नाकाफी बताया और रिपोर्ट में लिखा कि ये सुनिश्चित करना वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि बजट प्रावधान से गुप्त सेवा व्यय में वृध्दि की सहमति सीएजी के पूर्वानुमोदन से की गई है।
उल्लेखनीय है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी) ने मंगलवार को वर्ष 2017-18 के प्रतिवेदन को संसद के दोनों सदन, लोकसभा एवं राज्यसभा में प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में मार्च,2018 को समाप्त हुए वर्ष के लिए संघ सरकार के वित्त लेखे तथा विनियोग लेखे की नमूना लेखापरीक्षा से मामलों को शामिल किया गया है। सीएजी यह प्रतिवेदन संविधान के अनुच्छेद-151 के तहत राष्ट्रपति को प्रस्तुत करने के लिए तैयार करता है। मंत्रालयों की ऑडिट रिपोर्ट्स भी सीएजी अलग से तैयार करता है।

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