(बच्चों के लिए कहानी) समझदार किट्टी

-अमृता गोस्वामी-

किट्टी एक बुद्धिमान और समझदार बालिका थी। अपने माता-पिता की इकलौती बेटी होने के कारण उसे सदैव खूब लाड़-प्यार मिलता था। खेल और पढ़ाई में किट्टी की खास रुचि थी। उसका परिवार एक छोटा परिवार था जिसमें वह अपने मां और पिताजी के साथ रहती थी। किट्टी के पिताजी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और मां गृहिणी। पिताजी का अधिकतम समय कम्प्यूटर पर बीतता था, किन्तु फिर भी वे किट्टी के लिए कहीं न कहीं से समय निकाल ही लेते थे। उनके घर पर हमेशा हंसी-खुशी का माहौल रहता था। किट्टी की हर एक्टिविटी में उसके माता-पिता हमेशा उसके साथ होते थे, पढ़ाई वह अपने पापा के साथ बैठकर करती तो खेल में उसकी मां उसके साथ रहती।

अपने जीवन में इतनी सब खूबियों के बावजूद किट्टी को एक बात सदा अखरती थी वह यह कि जब कभी उसके घर पर कोई मेहमान आ जाता तब पता नहीं घर को किसकी नजर लग जाती। जितने दिन घर पर मेहमान होते उन दिनों किट्टी को न तो माता-पिता का पहले जैसा लाड़-दुलार ही मिलता और न ही उसकी सभी बातों को ध्यान से ही सुना जाता। किट्टी को मेहमानों का आना तो अच्छा लगता किन्तु उन दिनों अपने माता-पिता से मिल रहे प्यार-दुलार में जो कमी आ जाती थी वह उसे पसंद न था। किट्टी चाहती थी कि उसके मम्मी-पापा बस उससे ही बात करें और उसके साथ ही समय गुजारें।

एक दिन की बात है किट्टी घर के दरवाजे पर खड़ी अपनी मम्मी के आने का इंतजार कर रही थी तभी उसे उसके नानाजी घर आते हुए दिखाई दिए। नानाजी को देखते ही किट्टी के मन में आया कि शायद अब फिर कुछ दिन उसे मम्मी-पापा के लाड़ से वंचित रहना पड़ सकता था। नानाजी ने किट्टी को देखते ही अपने पास बुलाया और हैलो बेटे कहकर बड़े प्यार से उसे गले लगाया और ढेर सारे खिलौने व टॉफियां उसे दीं। नानाजी का प्यार देखकर किट्टी के मन में कई सवाल उठे उसने सोचा कि नानाजी या कोई भी घर आया मेहमान उसके साथ इतना दोस्ताना रहता है फिर भी वह उनके आने पर इतना अकेलापन क्यों महसूस करती है। किट्टी ने मन ही मन उन सब बातों पर विचार किया जिनके कारण वह दुःखी होती थी। किट्टी ने नोटिस किया कि मेहमान के आने पर मम्मी-पापा को अपने काम के अलावा मेहमान के लिए भी समय निकालना पड़ता था और इसी वजह से वे उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे। किट्टी को समझ आ रहा था कि उसके मम्मी-पापा तो हमेशा ही उसे चाहते हैं किन्तु मेहमान के आने पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ जाने के कारण मां उसके साथ नहीं खेल पाती थी और मेहमान के स्वागत सत्कार में व्यस्त रहने के कारण पिताजी भी उसे थोड़ा कम समय दे पाते थे।

किट्टी बुद्धिमान तो थी ही जैसे ही पूरी बात उसकी समझ में आई उसने चुटकियों में इस समस्या का हल खोज निकाला। किट्टी जो पहले मेहमानों के घर आने पर भी अपने मम्मी-पापा को अपने साथ व्यस्त रखना चाहती थी अबकी बार उसने नानाजी के आने पर न सिर्फ मां के साथ घर के काम में हाथ बंटाया बल्कि नानाजी को भी अपने पास बैठाकर उनसे पढ़ाई और खेल की बातें कर उनका और अपना समय पास किया। किट्टी ने पाया कि नानाजी बुजुर्ग जरूर थे पर उनके पास ज्ञान का अथाह भंडार था ओर खेल में तो वे बच्चों के जैसे एक्टिव थे। अबकी बार मेहमान के आने पर किट्टी को जहां नया साथी मिला वहीं उसके खेल और पढ़ाई में भी नयापन आया। किट्टी बहुत खुश थी… अब जब भी उसके घर मेहमान आते वह मम्मी-पापा की जगह उनके साथ खेलती, पढ़ती व उनके देश-दुनिया की विशेषताओं से कुछ सीखने की कोशिश करती। इस तरह अब किट्टी के घर आए मेहमान का और किट्टी का समय खूब पास होता और दुनिया की नई-नई जानकारियां भी आपस में शेयर होतीं।

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