जुमला और धोखाधड़ी वाला बजट : संजय पासवान

कोडरमा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने केन्द्रीय बजट पर पार्टी की ओर से बयान देकर कहा कि वैसे तो अंतरिम बजट केवल वोट आँन अकांउट होता है, ताकि पूर्ण बजट आने तक रोजमर्रा के सरकारी कार्यों में कोई बाधा न पड़े। मगर कार्यवाह वित्तमंत्री ने मोदी सरकार के विदाई के पूर्व अपने बजट में पांच साल तक के सपने दिखाये हैं,जबकि सरकार और बजट दोनों की आयु सिर्फ दो माह ही शेष है। उसके बाद जनता द्वारा निर्वाचित नई सरकार ही पूर्ण बजट पेश करेगी। उन्होंने बजट को जुमला बजट करार देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि के तौर पर हर दो एकड़ तक के किसान को जो सम्मान निधि देने की घोषणा की है, उसकी वास्तविकता यह है कि यदि किसी किसान परिवार में चार सदस्य हैं तो प्रति सदस्य यह राशि महज चार रुपए प्रतिदिन होगी। क्या यह कृषि संकट से परेशान किसानों के जख्मों पर नमक छिडक़ना नहीं है। दुसरी तरफ इस बार खाद सब्सिडी 5.5% से घटा कर 4.99% कर दिया गया. इसी प्रकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी प्रति माह  100 रु० की पेंशन की घोषणा मजाक के सिवाय और क्या हो सकता है। आयकर में छूट देते समय वित्त मंत्री ने टैक्स के स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया है, जिससे 5 लाख तक पर तो टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन 500001 रू० की आय पर टैक्स की गणना 250000 से ही शुरू होगा क्योंकि टैक्स स्लैब नहीं बदला है यानी जुमला और धोखधड़ी दोनों है। दूसरा जीएसटी और अन्य टैक्सों में छूट देकर पहले से ही कर्ज में डूबे राज्यों के बोझ को और बढ़ा दिया है।  माकपा नेता के अनुसार जब एनएसएसओ के आंकड़ों के अनुसार 45 सालों में सबसे अधिक बेरोजगारी बढ़ी है, तब बजट में रंगीन सपने दिखाने के पूर्व की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की शाईनिंग इंडिया जैसा ही है और इस वर्ष के लोकसभा चुनाव मे जनता की प्रतिक्रिया भी वैसी ही होने वाली है। मोदी सरकार के बजट मे गत वर्ष से ग्रामीण विकास मे इस बार खाद सब्सिडी 5.5% से घटा कर 4.99% कर दिया गया।

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