बच्चों के संग ऐसे बना रहेगा प्यारा का गहरा रिश्ता

हम सभी ऐसा मानते हैं कि बच्चे अपने पैरेंट्स से, अपने घर से, बाहरी दुनिया से सीखते हैं। यह सौ फीसदी सच भी है। लेकिन हममें से कितने प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो अपने बच्चों से सीखते हैं, या उनके कहे अनुसार खुद को बदलने की कोशिश करते हैं। जिस दिन आपको ऐसा महसूस होगा कि सिर्फ आप ही अपने बच्चे को नहीं सिखा सकतीं, आपके बच्चे भी आपको सिखाने की ताकत रखते हैं। उस दिन से आप दोनों के बीच के रिश्ते एकदम सहज और सरल हो जाएंगे। बच्चों…

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तेनालीराम की कहानियां: जादुई कुएं

एक बार राजा कृष्णदेव राय ने अपने गृहमंत्री को राज्य में अनेक कुएं बनाने का आदेश दिया। गर्मियां पास आ रही थीं इसलिए राजा चाहते थे कि कुएं शीघ्र तैयार हो जाएं ताकि लोगों को गर्मियों में थोड़ी राहत मिल सके। गृहमंत्री ने इस कार्य के लिए शाही कोष से बहुत-सा धन लिया। शीघ्र ही राजा के आदेशानुसार नगर में अनेक कुएं तैयार हो गए। इसके बाद एक दिन राजा ने नगर भ्रमण किया और कुछ कुओं का स्वयं निरीक्षण किया। अपने आदेश को पूरा होते देख वे संतुष्ट हो…

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यही है सही तरीका परवरिश का

नन्हें-मुन्नों की मासूम शरारतें बरबस ही हमारे चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। उनकी एक मुस्कराहट के लिए माता-पिता कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, पर कभी-कभी ये नन्हें-मुन्ने हमारे धैर्य की परीक्षा भी लेने लगते हैं… बच्चों की शरारतें कभी-कभी मुश्किलें भी पैदा कर देती हैं। यह परिस्थिति तब अधिक बनने लगती है, जब वे स्कूल जाना शुरू कर देते हैं और धीरे-धीरे उनमें नए ज्ञान के साथ विभिन्न बातों की समझ विकसित होने लगती है। वे अपनी पसंद व नापसंद जाहिर करने लगते हैं। कई बार माता-पिता…

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बालकथा: गिर कर उठना

-स्व. घनश्याम रंजन- बाल दिवस के अवसर पर चिडि़याघर में बच्चों की कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। हर उम्र के बच्चे आए थे। करन भी अपने परिवार के साथ चिडि़याघर गया था। प्रतियोगिता कैसे आयोजित होगी इस बारे में माइक से बताया जा रहा था। पहले दौड़, फिर म्यूजिकल चेयर, फिर निबंध तब फिर कला प्रतियोगिता होनी थी। करन ने पहले भी कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया था और वह जीता भी था। चिडि़याघर में दौड़ प्रतियोगिता के लिए बच्चे लाइन लगा रहे थे। करन भी लाइन में खड़ा…

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बाल कहानी: पंख अभी छोटे हैं

-उपासना बेहार की- एक शहर के बीचों बीच बड़ा सा पार्क था, पार्क में बहुत सारे बड़े बड़े पेड़ लगे हुए थे। उन्ही पेड़ों में से एक पेड़ में चिडि़या अपने परिवार के साथ रहती थी। उसके तीन छोटे बच्चे थे। चिडि़या रोज बच्चों को घोंसले में छोड़ कर सुबह से खाना लाने चली जाती और शाम को घोसले में वापस आती थी। तब चिडि़या के बच्चों में से एक बच्चा अपनी मां से हमेशा पूछता कि मां पेड़ के बाहर की दुनिया कैसी होती है, आज आपने क्या क्या…

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(बाल कहानी) सपने में देखा खजाना

-अर्चना- मुगल सिपहसालार शायस्ता खां को विज्ञान और कला से बड़ा प्रेम था। फुर्सत के क्षणों में वह कला और विज्ञान पर नई-नई खोजें किया करता। एक दिन शायस्ता खां ने सपना देखा। किसी किले में बहुत-सा खजाना छिपा है।  दूसरे दिन उसने एक ज्योतिषी से स्वप्न के बारे में पूछा तो ज्योतिषी ने बताया, तुमने जो सपना देखा, वह सच है। सात दिनों के अंदर-अंदर तुम्हें यह भी विदित हो जाएगा कि वह खजाना कहां दबा है। ठीक सातवें दिन शायस्ता खां को एक जासूस ने बताया, पूना के…

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तेनालीराम की कहानियां: तेनालीराम बने महामूर्ख

विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय होली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाते थे। इस अवसर पर हास्य-मनोरंजन के कई कार्यक्रम होते थे। हर कार्यक्रम के सफल कलाकार को पुरस्कार भी दिया जाता था। सबसे बड़ा पुरस्कार महामूर्ख की उपाधि पाने वाले को दिया जाता था। कृष्णदेव राय के दरबार में तेनालीराम सबका मनोरंजन करते थे। वे बहुत तेज दिमाग के थे। उन्हें हर साल का सर्वश्रेष्ठ हास्य-कलाकर का पुरस्कार तो मिलता ही था, महामूर्ख का खिताब भी हर साल वही जीत ले जाते। राजा ने तेनालीराम को मूर्ख कहा, यह…

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(बाल कहानी) टिंकू और रोशी

-जयंती- टिंकू भारी मन से स्कूल का बैग अलमारी के ऊपर से उतार कर नीचे ले आया। रोशी का भी वही हाल था। दोनों सुबह जल्दी-जल्दी होमवर्क करने के बाद खेलने निकल जाते। और लौटते समय रोशी रोज टिंकू से पूछता, यार, छुट्टियां इतनी जल्दी खत्म क्यों हो जाती हैं? टिंकू और रोशी खरगोश का स्कूल में आखिरी दिन था। कल से छुट्टी। टीचर ने छुट्टियों का होमवर्क देने के बाद पूछा, होमवर्क के अलावा तुम लोग क्या करोगे छुट्टियों में? बिल्लू बंदर ने तुरंत जवाब दिया, सर, मैं क्रिकेट…

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चिडि़या का घोंसला (बाल कहानी)

दूर जंगल में एक पेड़ पर चिडि़या अपने बच्चों के साथ रहती थी। उसी पेड़ पर एक शैतान बंदर भी रहता था। जो रोजाना चिडि़या और उसके बच्चों को तंग करता था। चिडि़या का पुराना घोंसला तेज आंधी से टुट चुका था। जिसके बाद अब वो नया घोंसला बनाने में लगी हुई थी जब वो सवेरे उठकर काम पर जाती तो शैतान बंदर उसके बच्चों की खुब खिल्ली उड़ाता उनको पेड़ से गिराने की धमकी देता काफी दिन तक यूं ही चलता रहा। एक दिन चिडि़या के बच्चे ने कहा…

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बच्चे को क्या खिलाना चाहिए

जब बच्चा करीब चार से छह महीने का हो जाता है तब आप धीरे-धीरे उसे मां के दूध के अलावा खाने की और चीजें भी देना शुरू कर सकते हैं। जब हम बच्चे को मां के दूध के अलावा खाने की दूसरी चीजें भी देना शुरू कर देते हैं, हम कहते हैं कि हम ऊपरी खाना दे रहे हैं। मां का दूध पौष्टिक होता है। मां के दूध में खाने के वे पौष्टिक तत्व काफी मात्रा में होते हैं जो बच्चे को चार से छह महीने की उम्र तक चाहिए…

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