पुनर्मिलन (बाल कहानी)

-जोहन पीटर हेबेल- कोई पचास बरसों से भी पहले की बात है कि फालुन में-जो कि स्वीडन में है-एक युवक खनिक ने अपनी प्रेमिका का चुम्बन लिया और उससे बोला, सेण्ट लूसी के दिन धर्म-गुरु हमारे प्यार को आशीर्वाद देंगे। तब हम पति-पत्नी बन जाएंगे-और तब हम अपना एक छोटा-सा घोंसला बनाकर उसमें रहेंगे। और वहां प्यार और शान्ति रहेगी, बड़ी प्यारी मुसकराहट के साथ उसकी खूबसूरत प्रेमिका ने कहा, क्योंकि तुम्हीं मेरे सबकुछ हो और तुम्हारे बगैर कहीं भी रहने से अच्छा होगा कि मैं कब्र में जा रहूं।…

Read More

बाल कहानी : सबसे अच्छी मम्मी

-हरीश कुमार ‘अमित’- अक्षय चौथी कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में अच्छा था, पर शरारतें भी ख़ूब करता था। अपनी शरारतों से वह बाज़ नहीं आता था, चाहे जितना भी समझा लो। किसी-न-किसी शरारत की योजना उसके दिमाग़ में हमेशा कुलबुलाती ही रहती। न जाने कैसे उसे नई-नई शरारतें सूझ जाती थीं। उसकी शरारतों की सबसे ज़्यादा शिकार उसकी मम्मी ही बनती थीं। अपने पापा से तो वह बहुत डरता था और उनसे कोई शरारत करने की हिम्मत कर नहीं पाता था। पापा तो वैसे भी सारा दिन ऑफिस में…

Read More

कहानी : अपनी तुलना दूसरों से न करें

एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौवा रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था, लेकिन एक बार उसने जंगल में किसी हंस को देख लिया और उसे देखते ही सोचने लगा कि ये प्राणी कितना सुन्दर है, ऐसा प्राणी तो मैंने पहले कभी नहीं देखा! इतना साफ और सफेद। यह तो इस जंगल में औरों से बहुत सफेद और सुंदर है, इसलिए यह तो बहुत खुश रहता होगा। कोवा हंस के पास गया और पूछा,…

Read More

बाल कहानी : आखिरी दरवाजा

-यशपाल जैन- एक फकीर था। वह भीख माँगकर अपनी गुजर-बसर किया करता था। भीख माँगते-माँगते वह बूढ़ा हो गया। उसे आँखों से कम दिखने लगा। एक दिन भीख माँगते हुए वह एक जगह पहुँचा और आवाज लगाई। किसी ने कहा, ‘आगे बढ़ो! यह ऐसे आदमी का घर नहीं है, जो तुम्हें कुछ दे सके।’ फकीर ने पूछा, ‘भैया! आखिर इस घर का मालिक कौन है, जो किसी को कुछ नहीं देता?’ उस आदमी ने कहा, ‘अरे पागल! तू इतना भी नहीं जानता कि यह मस्जिद है? इस घर का मालिक…

Read More

गलत लाइफस्टाइल है बच्चों में डायबिटीज का कारण, यूं करें बचाव

डायबिटीज देश में तेजी से बढऩे वाली बीमारियों में से एक है। रिसर्च की मानें तो पिछले 25 साल में इस बीमारी के मामलों में 64 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और विशेषज्ञ इस बढ़ौतरी को देश की आर्थिक प्रगति के साथ जोड़कर देख रहे हैं। इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि आने वाले 6 सालों में देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 13.5 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो वर्ष 2017 में 7.2 करोड़ थी। इंडियन काऊंसिल ऑफ मैडीकल रिसर्च, इंस्टीच्यूट फॉर हैल्थ…

Read More

जेनरेशन गैप

-निधि जैन- हमारा जमाना,“अम्मा… अम्मा… मैं पास हो गया।” “तो का करूँ हो गया पास तो… अब फिर जान खाएगा… नई किताबें माँगेगा… चल अब छुट्टियों में बापू के साथ काम पर जइयो तभी किताबें मिलेंगी…”  “अम्मा एक साइकिल तो दिला दे।” “बापू की है न उसी को चला…” “अम्मा वो बहुत बड़ी है…” “तो तू भी तो बड़ा होगा… जा यहाँ से… चलाना हो तो चला… नखरे मत दिखा…।” हमारे बच्चों का जमाना मम्मी चिंतित हैं। बेटे का रिजल्ट आने वाला है और बेटे से पहले माँ को खबर…

Read More

बाल-कहानी : गरीबों की पहचान

-संजय कुमार श्रीवास्तव- एक समय की बात है। कि एक छोटे से गांव में रामू नाम का व्यक्ति रहता था। वह बहुत गरीब था वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए वह दिन रात मेहनत करता और उससे जो चार पैसे मिलते वह अपने बच्चों की किताबे व कॉपी लाता और फीस जमा कर देता था । उसके मन की अभिलाषा थी कि उसके बच्चे इस दुनिया में कुछ कर दिखाए। रामू गांव के मुखिया के वहां काम पर जाता और भैंसों के लिए चारा फट्टा लाता उसी से अपना…

Read More

लोमड़ी और सारस

एक बार की बात है, एक जंगल में चालाक लोमड़ी था जो हर किसी जानवर को अपनी मीठी बातों में फंसा कर कुछ न कुछ ले-लेता था या खाना खा लेता था। उसी जंगल में एक सारस पक्षी रहता था। लोमड़ी ने अपने चालाकी से उसे दोस्त बनाया और खाने पर घर बुलाया। सारस इस बात पर खुश हुआ और लोमड़ी के घर खाने बार जाने के लिए आमंत्रण स्वीकार कर लिया। अगले दिन सारस, लोमड़ी के घर खाने पर पहुंचा। उसने देखा लोमड़ी उसके लिए और अपने लिए एक-एक…

Read More

बच्चों कों सिखाएं तमीज और तहजीब

जो बच्चा साफ-सुथरे ढंग से रहता है, वह सभी को प्यारा लगता है। अतः बच्चो का शरीर, नाखून, बाल, कपड़े, जूते इत्यादि साफ हों। -खांसी आने पर मुंह पर हाथ रखना सिखाएं। जुकाम होने पर रुमाल रखना अति आवश्यक है। -सबके बीच में नाक, कान, दांत कुरेदने की आदत ठीक नहीं है। -अपने निजी सामान (ड्रेस, जूते, कापी-किताब इत्यादि) को करीने से यथास्थान रखने की आदत डालें। -प्रयोग किए हुए डिस्पोजेबिल आइटम इधर-उधर न फेंककर डस्टबिन में ही डालना सिखाएं। -जब कोई बाहरी व्यक्ति घर में मिलने आए तो खड़े…

Read More

बच्चों का इंट्रोवर्ट नेचर कोई बीमारी नहीं, इन बातों का रखिए ध्यान

कई बच्चे छोटी उम्र से ही खुद में रहना पसंद करते हैं। अकेले बैठ कर म्यूजिक सुनना या कुछ पढ़ते रहना। बच्चों की इस आदत को अकसर अभिभावक समझ ही नहीं पाते हैं और दूसरे लोगों के साथ न घुलना-मिलने के कारण टेंशन में आ जाते हैं, लेकिन जरूरी नहीं ये बच्चे पूरी जिंदगी इंट्रोवर्ट ही रहें। बढ़ती उम्र के साथ बच्चे एक्सट्रोवर्ट यानी दूसरों के साथ बातचीत करने लगते हैं। अगर आपका बच्चा दूसरों से बातचीत करने की बजाय खुद में रहना पसंद करता है तो परेशान होने की…

Read More