पाबंदियों के कारण दबाव में अर्थव्यवस्था, 40 हजार करोड़ के घाटे की आशंका

नई दिल्ली : कोरोना के संक्रमण को रोकने की कोशिश में महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में की गई पाबंदियों से देश की अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का लगने की आशंका बन गई है। रेटिंग एजेंसी केयर ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सिर्फ महाराष्ट्र में लगाई गई पाबंदियों और आंशिक लॉकडाउन की वजह से ही अर्थव्यवस्था को 40 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इन पाबंदियों के कारण होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के साथ ही व्यापारिक गतिविधियां सर्वाधिक प्रभावित होंगी। 
केयर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन पाबंदियों और आंशिक लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों में करीब 0.32 फीसदी की गिरावट आ सकती है। एक हफ्ते पहले ही इस रेटिंग एजेंसी ने जीडीपी विकास दर का अनुमान भी घटाकर 10.7 से 10.9 फीसदी के बीच कर दिया है। पहले जीडीपी में 11 से 12 फीसदी तक की ग्रोथ का अनुमान लगाय गया था। 
उल्लेखनीय है कि कोरोना के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण की वजह से महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। इन पाबंदियों में आंशिक लॉकडाउन भी शामिल है, जिसके तहत रोजाना रात के समय और हर सप्ताह शुक्रवार की रात से सोमवार सुबह तक पूर्ण बंदी रहेगी। इस दौरान कुछ सीमित गतिविधियों के संचालन की ही अनुमति दी गई है। ये पाबंदी इस महीने के अंत तक रहने वाली हैं।
चालू वित्त वर्ष में ऐसी पाबंदी सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं लगाई गई है। राजधानी दिल्ली में भी इस महीने के अंत तक नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया है। इसके अलावा कई अन्य राज्यों ने भी आंशिक लॉकडाउन किया है। रेटिंग एजेंसी केयर का मानना है कि इन पाबंदियों से प्रोडक्शन और खपत पर प्रतिकूल असर होगा। 
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में राष्ट्रीय सकल आय का अनुमान 137.8 लाख करोड़ रुपये का लगाया गया है। इसमें अकेले महाराष्ट्र का योगदान 20.7 लाख करोड़ रुपये का है लेकिन कोरोना पर काबू पाने के लिए लगाई गई पाबंदियों से महाराष्ट्र के कई सेक्टर्स को भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। इनमें ट्रेड, होटल और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स को करीबन 15722 करोड़ रुपये का घाटा होगा।
इसी तरह फाइनेंशियल सर्विसेस, रियल इस्टेट और पेशेवर सेवाओं पर भी पाबंदियों का प्रतिकूल असर पड़ेगा। पाबंदियों के कारण इन्हें भी करीब 9885 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, वहीं लोक प्रशासन को भी इसकी वजह से 8192 करोड़ रुपये का घाटा होने का अंदाजा है।
रेटिंग एजेंसी केयर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लॉकडाउन से ग्राहकों की ओर से आने वाली मांग में गिरावट आएगी। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी इसका असर दिखेगा। कम गतिविधियों के कारण पावर सेक्टर को भी नुकसान होगा। इसी तरह कंस्ट्रक्शन और नए प्रोजेक्ट पर भी इसका बुरा असर दिखेगा। 
एजेंसी ने कहा है कि गैर जरूरी उत्पादों पर जिस तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, उससे ई-कॉमर्स सेक्टर को फायदा हो सकता है लेकिन दूसरे सभी सेलिंग प्लेटफॉर्म्स को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। 

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