रांची में बने मोबाइल लॉन्चिंग पैड से भेजा जाएगा चंद्रयान-2

रांची। राजधानी रांची की एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) में बने मोबाइल लॉन्चिंग पैड से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का चंद्रयान-2 भेजा जाएगा। इस अंतरिक्ष यान का वजन 318 टन होगा। लाॅॅॅन्च होने के 40 दिन बाद ये चांद पर लैंड करेगा। इस मिशन से भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन जाएगा। एचईसी के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि इसरो को जिन उपकरणों की आपूर्ति की गई, उन सभी का निर्माण, आपूर्ति और इंस्टॉलेशन काफी चुनौती भरा था। हर स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत की गई। भारतीय अनुसंधान संगठन ने लॉन्चिंग पैड की जांच के बाद गुणवत्ता पर संतुष्टि जताई है।

इसरो ने चंद्रयान-2 को भेजने की तैयारी जाेेेरों पर चल रही हैंं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 9 से 16 जुलाई के बीच चंद्रयान-2 को भेजने के लिए सारे मॉड्यूल तैयार कर लिए हैंं। भारत के इस दूसरे चंद्र अभियान में 13 पेलोड (ऑरबिटर पर आठ, लैडर पर तीन और रोवर पर दो) होंगे और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का भी एक उपकरण पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा। यह अंतरिक्ष यान भी एचईसी द्वारा बनाए गए मोबाइल लॉन्चिंग पैड से ही भेजा जाएगा। इसके पहले भी चंद्रयान-1 एचईसी के बनाये गए मोबाइल लॉन्चिंग पैड से ही भेजा गया था। इस मिशन के तहत इसरो पहली बार अपने यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की कोशिश करेगा। 

उल्लेखनीय है कि भारत के चंद्रयान-1 अभियान ने ही पहली बार चांद पर पानी की खोज की थी। चंद्रयान-2 इसी अभियान का विस्तार है। अमेरिकी एजेंसी इस मॉड्यूल के जरिये धरती और चांद की दूरी भी नापने का काम करेगी। इसरो के वैज्ञानिक एचईसी के निर्मित मोबाइल लॉन्चिंग पैड को पहले ही सर्वश्रेष्ठ बता चुके हैं। एचईसी के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि इसरो को जिन उपकरणों की आपूर्ति की गयी, उन सभी का निर्माण, आपूर्ति और इंस्टॉलेशन काफी चुनौती भरा था। हर स्तर पर गुणवत्ता बनाये रखने के लिए काफी मशक्कत की गई।

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