आपसी कलह का शिकार खन्ना परिवार

मुंबई। दिवंगत विनोद खन्ना की गुरदासपुर (पंजाब) सीट पर उनकी विरासत की गद्दी के नाम पर उनका परिवार ही कलह का शिकार नजर आ रहा है। इस सीट के लिए एक तरफ जहां उनकी दूसी पत्नी कविता दफ्तरी टिकट चाहती थीं, वहीं दूसरी ओर, विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना भी टिकट चाहते थे। भारतीय जनता पार्टी ने दोनों में से किसी को पार्टी का टिकट न देते हुए इस सीट से सनी देओल को उतारने का फैसला किया, तो खन्ना परिवार में ही कलह बढ़ गई। अक्षय चाहते थे कि इस सीट पर भाजपा का विरोध करने के लिए कांग्रेस का हाथ थामा जाए। इसके लिए वे शत्रुघ्न सिन्हा के संपर्क में बताए जाते हैं, जो अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। दूसरी ओर, कविता दफ्तरी चाहती हैं कि वे निर्दलीय रुप से मैदान में आएं और भाजपा के कथित धोखे का भांडाफोड़ करें। कविता दफ्तरी आरोप लगा रही हैं कि उनको टिकट का वादा किया गया था। उन्होंने क्षेत्र में पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ तैयारियां भी शुरु कर दी थीं। कविता का दावा है कि उपचुनाव के वक्त भी यही भरोसा दिलाया गया था कि आम संसदीय चुनावों में ये सीट उनको दी जाएगी। जहां अक्षय खन्ना अब कांग्रेस का साथ चाहते हैं, वहीं कविता कांग्रेस से दूरी बनाए रखने के पक्ष में हैं। इस परिवार के करीबी लोग आपसी कलह को सबसे बड़ी कमजोरी बताते हैं, जिनकी वजह से विनोद खन्ना की विरासत का मामला ही खत्म हो गया। विनोद खन्ना के समय से इस परिवार के करीबी एक निर्देशक का कहना है कि कविता दफ्तरी और अक्षय खन्ना में बोलचाल लगभग न के बराबर रही है। विनोद खन्ना की बीमारी और यहां तक कि उनके अंतिम संस्कार में भी दोनों के बीच अलगाव देखा गया। अक्षय के बड़े भाई राहुल खन्ना का ज्यादातर वक्त अमेरिका में गुजरता है और उन्होंने खुद को राजनीति से बिल्कुल अलग रखा हुआ है। जानकार मानते हैं कि विनोद खन्ना के रहते उनके राजनैतिक उतराधिकारी के तौर पर किसी ने काम नहीं किया। कविता अपने पति के साथ दौरों पर जरुर जाती थीं, लेकिन वे किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेती थीं और अक्षय खन्ना तो अपने पिता के निधन से कुछ वक्त पहले तक खुद को राजनीति से दूवाला इंसान मानते थे। अपने पिता के लिए एक बार रोड शो में हिस्सा लेने के अलावा अक्षय खन्ना ने गुरदासपुर की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। विनोद खन्ना के निधन के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी हार गई थी और ये सीट कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने जीत ली थी। उस उपचुनाव में भी विनोद खन्ना की पत्नी कविता दफ्तरी भाजपा का टिकट चाहती थीं और इस बाबत वे उस वक्त पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिली भी थीं, लेकिन पार्टी ने उपचुनाव में उनकी बात नहीं सुनी, क्योंकि अक्षय खन्ना भी टिकट चाहते थे, लेकिन वे अमित शाह से नहीं मिले थे। उपचुनाव के दौरान भाजपा चाहती थी कि कार्यकर्ता के तौर पर कविता दफ्तरी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करे, लेकिन कविता ने ऐसा नहीं किया। अक्षय खन्ना तो अपने पिता के चुनाव क्षेत्र में कभी नहीं गए।

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