Lock-Down : अर्थव्यवस्था हो प्राथमिकता

देश में लॉकडाउन से हो रहीं परेशानियों से जूझते लोगों को राहत देने के लिए काफी सोच-विचार के उपरांत स्पेशल ट्रेनें चलाने और घरेलू उड़ानें शुरू करने का निर्णय किया गया। इससे जहां-तहां फंसे लोगों के चेहरों पर उम्मीद भरी मुस्कान आयी थी। लेकिन, दुखद रहा कि पहले दिन ही देशभर में लगभग 630 उड़ानें रद्द कर दी गयीं। सिर्फ दिल्ली एयरपोर्ट पर 80 फ्लाइट्स रद्द हुईं। मुंबई एयरपोर्ट पर 20 उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में लोगों को सपरिवार एयरपोर्ट पहुंच कर पुन: लौटना पड़ा। लॉकडाउन के चलते जब…

Read More

Lock-down : बेबसों की अब तो लें सुध

लम्बे लॉकडाउन और बेरोजगारी के मारे अनगिनत प्रवासी मजदूर अपने गांव जाने की समझ के साथ बीवी-बच्चों समेत देश के किसी-न-किसी हिस्से में फंसे हुए हैं। इनमें कई लोग तो पैदल ही अपने गांव के लिए सैकड़ों मील लम्बे सफर पर निकल पड़े हैं। वहीं, दूसरी ओर हजारों की संख्या में ऐसे परिवार भी हैं, जो ट्रेन मिलने की आस में स्टेशनों को अगोर रहे हैं। लेकिन, ट्रेन रद्द होने अथवा जगह नहीं मिलने के कारण सड़क पर ही डेरा डाले हुए हैं। किराये पर ले रखा गया स्थान यदि…

Read More

Unlock-1 : …और अब अनलॉक – 01

31 मई को लॉकडाउन-04 समाप्त होने के एक दिन पहले ही 30 मई को भारत सरकार ने लॉकडाउन-05 की घोषणा कर दी। यह 01 जून से प्रभावी हो गया है। फर्क केवल इतना है कि यह लॉकडाउन-05 के बजाय अनलॉक-01 के नाम से जाना जायेगा। चूंकि, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों व प्रशासकों से चर्चा के उपरांत ही केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन-05 की रूपरेखा तैयार की है, लिहाजा इसमें राज्यों की इच्छाओं व जन सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। लॉकडाउन-05 की जद में मुख्यत:…

Read More

बदलेंगे,बचेंगे और बढ़ेंगे भारत के अखबार

( लेखक-प्रो. संजय द्विवेदी/ईएमएस) डिजीटल मीडिया की बढ़ती ताकत, मोबाइल क्रांति और सोशल मीडिया की उपलब्धता ने पढ़ने की दुनिया को काफी प्रभावित किया है। पढ़े जाने वाले अखबार, अब पलटे भी कम जा रहे हैं। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक बार रायपुर में ‘मीडिया विमर्श’ पत्रिका के आयोजन में कहा था कि “पहले एक अखबार पढ़ने में मुझे 40 मिनट लगते थे अब उतनी देर में दर्जन भर अखबार पलट लेता हूं।” वे ठीक कह रहे हैं, किंतु पढ़ने का समय घटने के लिए अखबार अकेले…

Read More

सैन्य प्रमुख की प्राथमिकताएं और चुनौतियां

-योगेश कुमार गोयल- नये साल के ठीक एक दिन पहले 31 दिसम्बर को देश के 28वें थलसेना अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने वाले 59 वर्षीय वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मुकुंद नरवणे के सामने गंभीर सामरिक चुनौतियां हैं। उन्होंने ऐसे विकट समय में यह दायित्व संभाला है, जब भारत हर पल सीमा पर चीन और सीमापार पाकिस्तान से मिल रही सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त जनरल (रिटायर्ड) बिपिन रावत के बाद वे सेना में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। जनरल मुकुंद नरवणे भारतीय…

Read More

इन्हें है फ़िक्र, मनोबल न गिरे ‘ख़ाकी’ का?

-निर्मल रानी- भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी इन दिनों अपनी ही पार्टी के समर्थक ट्रोलर्स का शिकार हैं। उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में फैला नागरिक संशोधन क़ानून व राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर विरोधी आंदोलन इन दिनों अपने चरम पर है। मेरठ व कानपुर जैसे संवेदनशील शहरों में इस आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। इसी नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान 20 दिसंबर को मेरठ में प्रदर्शनकारी काली पट्‌टी बांधकर अपना विरोध प्रदर्शित…

Read More

’75 पार’ के बाद ’65 पार’ का नारा भी हुआ धराशायी

-निर्मल रानी- देश के सभी राज्यों में भगवा परचम लहराने की लालसा पाले भारतीय जनता पार्टी को पिछले दिनों उस समय एक और बड़ा झटका लगा जब भाजपा शासित एक और राज्य, झारखंड की सत्ता उसके हाथों से निकल गयी और अपने सहयोगी दलों के साथ वही कांग्रेस पार्टी फिर सत्ता में आ गयी जिसे लेकर भाजपा पूरे अहंकार के साथ ‘कांग्रेस मुक्त भारत ‘बनाने का दावा ठोकती रही है। परन्तु हक़ीक़त तो यह है कि गत दो वर्षों के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी अथवा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने…

Read More

भाजपा की खींसकती ज़मीन, राज्यों में गंवाती सत्ता

-प्रभुनाथ शुक्ल- लोकतंत्र में जनता और उसके जनादेश का नजरिया कभी स्थाई नहीं होता। सरकारें अगर जनता के विश्वास पर खरी नहीं उतरती तो उन्हें अपनी सत्ता गंवानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में सरकारों को आम लोगों के नजरिये को गहराई से समझना चाहिए। लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है। लेकिन सत्ता की अकड़ डूबोती है। झारखंड का जनादेश कम से कम यहीं संदेश देता है। सरकारों को इस भूल से निकलना चाहिए। केंद्र और राज्य की कमान एक डोर से नहीं खींची जा सकती। बदलते राजनीतिक समीकरण में भाजपा…

Read More

अब आबादी का रजिस्टर

अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) शुरू होने से पहले ही विवादास्पद हो गया है। यह देश में रहने वाले निवासियों का राष्ट्रीय डाटा तैयार करने की रूटीन कवायद है। इसमें विदेशी भी शामिल किए जाएंगे, जो 6 माह से अधिक समय से एक स्थान पर रहते होंगे या आगामी 6 माह बसने की योजना बना रहे होंगे। आबादी के स्तर पर बदलाव स्वाभाविक हैं, क्योंकि कोई दिवंगत होता है, तो कोई जन्म लेता है, कोई कामकाज के सिलसिले में अपना पुश्तैनी घर, गांव या कस्बा भी छोड़ता है। बदलाव के…

Read More

झारखंड के नतीजों के मायने

-सिद्धार्थ शंकर- हेमंत सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। रघुबर दास ने हार स्वीकारते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। विपक्षी गठबंधन के सामने भाजपा की रणनीति धरी की धरी रह गई और यहां तक कि पांच साल तक राज्य सरकार का चेहरा रहे रघुबर अपनी सीट भी नहीं बचा सके। इस चुनाव की अच्छी बात यह रही कि झारखंड की जनता ने इस बार भी नए सरकार के लिए स्पष्ट जनादेश दिया। जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन ने 81 सीटों की प्रदेश विधानसभा में…

Read More