समाज में नकारात्मकता की बढ़ती स्वीकार्यता

-निर्मल रानी- पौराणिक कथाओं के अनुसार जहां भारत को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की पावन धरती के नाम से जाना व पहचाना जाता है वहीं आधुनिक इतिहास में भारत की पहचान गांधी के देश के रूप में होती है। भगवान राम हों या महात्मा गांधी दोनों ही त्याग-तपस्या,सत्य व अहिंसा के रूप में याद किए जाते हैं। भगवान राम ने जहां अपने जीवनकाल में माता-पिता के आदेश की पालना,भ्राता प्रेम,राजपाट के त्याग,प्राणियों में सद्भाव,घोर तपस्या तथा अहंकार के अंत के रूप में अपनी पहचान बनाई वहीं महात्मा गांधी ने भी…

Read More

कान में कांजीवरम साड़ी में कंगना

-विवेक कुमार पाठक- जिस कान फिल्म फेस्टिवल में अभिनेत्री ऐश्वर्या रॉय स्टायलिश गाउन पहनकर हॉलीवुड अभिनेत्रियों से कदमताल करती नजर आती हैं वहां इस बार विश्व सिनेमा फैशन जगत ने हिन्दुस्तानी पहनावे का दीदार किया। भारत की बेबाक अभिनेत्री और मणिकर्णिका के कारण देश दुनिया में चर्चित रहने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत इस बार अलग ही अंदाज में कान के रेड कारपेट पर उतरीं। कंगना ने यहां परंपरागत कांजीवरम साड़ी पहनकर हिन्दुस्तानी दस्तकारी व कसीदाकारी की दुनिया के लाखों कैमरों के सामने गजब ब्रांडिंग की। कंगना का लीक से हटकर…

Read More

तूफान फेनी का चुनावी गतिविधियों पर भारी पड़ने के निहितार्थ

-डॉ. हिदायत अहमद खान- जब तक पर्यावरण और प्रकृति आपका साथ दे रहे हैं तभी तक आप अपने सिद्धांतों, नियमों और कानून-कायदों की बात कर सकते हैं, उस पर कायम रह सकते हैं और दूसरों से उसके पालन के लिए भी कह सकते हैं, लेकिन जैसे ही यह प्रकृति विपरीत दिशा में जाकर आपके सम्मुख किसी ललकारने वाले योद्धा की तरह खड़ी हो जाती है, वैसे ही आप सब कुछ भूल सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की फिराक में लग जाते हैं। यह है हमारे पर्यावरण और प्रकृति की ताकत…

Read More

धूमिल न हो चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता

-रमेश ठाकुर- आचार संहिता के उल्लघंन को लेकर इसबार चुनाव आयोग में शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। शिकायतें देखकर आयोग भी सकते में है। ज्यादातर शिकायतें विपक्षी दलों से हैं। शिकायतों का निदान नहीं होने पर वह चुनाव आयोग की समूची कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। निष्पक्षता से लेकर पोलिंग में गड़बड़ियां, मतदान के दिन ईवीएम में खराबी, बेलगाम नेताओं पर समय पर कार्यवाई न करना आदि के आरोप लग रहे हैं। मौजूदा लोकसभा चुनाव में आयोग शिकायतों से पटा हुआ है। चुनावी रैलियों में उम्मीदवार…

Read More

चुनावी सीजन में बेकाबू होती महंगाई

-अनुज कुमार आचार्य- हिमाचल प्रदेश सहित भारतवर्ष में 17 वीं लोकसभा की चुनावी गहमागहमी के बीच इन दिनों अप्रैल महीने में ही सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं जोकि अमूमन प्रचंड गर्मी और बरसात के दिनों में देखने को मिलते थे। इस समय सभी प्रमुख राजनीतिक दल जहां केंद्र में नई सरकार बनाने की जद्दोजहद में जुटे पड़े हैं तो वहीं प्रशासनिक अमले पर इन चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने के साथ-साथ बढ़ती गर्मी के बीच मतदान प्रतिशत को बढ़ाने की महती जिम्मेदारी भी है। अफसरों की चुनावों…

Read More

सबसे तेज अर्थव्यवस्था का सच

-डा. भरत झुनझुनवाला- वर्ष 2014 में भाजपा ने आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव जीते थे। भाजपा का कहना था कि कांग्रेस में निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह गई थी। भाजपा अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाएगी जिससे कि तमाम रोजगार उत्पन्न होंगे। बीते समय में तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत को शाबाशी भी दी है। कहा है कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेजी से आर्थिक विकास की राह पर चल रहा है और शीघ्र ही भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। हम…

Read More

सिनेमा से सियासत : भारतीय राजनीति में उत्तर-दक्षिण का फर्क

-उर्मिलेश- जब 23 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान चल रहा था, सत्ताधारी बीजेपी समारोहपूर्वक फिल्मी हस्तियों की नई खेप अपने कुनबे में शामिल कर रही थी। इनमें कुछेक को लोकसभा चुनाव के टिकट भी घोषित हो गए। न्यूज चैनलों ने मतदान कवरेज छोड़ राजनीति में दाखिल हो रहे सनी देओल की ‘युद्ध और राष्ट्रवाद’ के थीम वाली फिल्मों के फुटेज दिखाने शुरू कर दिए। उत्तर भारत की राजनीति में फिल्मी हस्तियों और नामचीन कलाकारों को एकाएक राजनीति में दाखिल कराकर उन्हें संसद भेजने के मामले में…

Read More

क्या बदलाव की नई जमीन बनेगा बेगूसराय!

-प्रणव प्रियदर्शी- चौथे चरण में आज यूं तो नौ राज्यों की 71 लोकसभा सीटों पर वोट पड़ने हैं, लेकिन पूरे देश की नजरें अगर किसी एक सीट पर टिकी हैं तो वह है बेगूसराय। जेएनयू कांड से उभरे युवा नेता कन्हैया कुमार की मौजूदगी इस लड़ाई को विशिष्ट बना रही है। बीजेपी ने इस सीट पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को टिकट दिया है तो आरजेडी की तरफ से तनवीर हसन मैदान में हैं। बिहार में मतदान के ट्रेडिशनल पैटर्न में जाति और धर्म का अहम रोल होता है और…

Read More

मजदूर दिवस की प्रासंगिकता

(श्रमिक दिवस, 1 मई पर विशेष) योगेश कुमार गोयलप्रतिवर्ष 1 मई का दिन अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस अथवा मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। उस दिन को मई दिवस भी कहा जाता है। मई दिवस समाज के उस वर्ग के नाम किया गया है, जिसके कंधों पर सही मायनों में विश्व की उन्नति का दारोमदार है। इसमें कोई दो राय नहीं कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति एवं राष्ट्रीय हितों की पूर्ति का प्रमुख भार इसी वर्ग के कंधों पर होता है। यह मजदूर वर्ग ही है, जो अपनी…

Read More

बापू की ‘वसीयत’ और कांग्रेस की सियासत

मनोज ज्वालाआजादी के बाद गांधीजी (बापू) ने कहा था कि भारत की आजादी का लक्ष्य पूरा हो जाने के बाद राजनीतिक दल के रुप में कांग्रेस के बने रहने का अब कोई औचित्य नहीं है। अतएव इसे भंग करके लोक सेवक संघ बना देना चाहिए और कांग्रेस के नेताओं को सामाजिक कार्यों में जुट जाना चाहिए। गांधीजी ने अपनी हत्या के तीन दिन पहले यानी 27 जनवरी 1948 को एक नोट में लिखा था कि अपने वर्तमान स्वरूप में कांग्रेस अपनी भूमिका पूरी कर चुकी है। अतएव इसे भंग करके…

Read More