जीवन-रक्षा सबका कर्तव्य है

गिरीश्वर मिश्र कोविड विषाणु से उपजी महामारी के अप्रत्याशित प्रकोप ने आज सबको हिलाकर रख दिया है। इसके पहले स्वास्थ्य की विपदाएं स्थानीय या क्षेत्रीय विस्तार तक सीमित रहती थीं पर कोवड-19 से उपजी स्वास्थ्य की समस्या विश्वव्यापी है। उसकी दूसरी लहर पूरे भारत पर ज्यादा ही भारी पड़ रही है। आज कोविड की सुनामी में कई-कई लाख लोग प्रतिदिन इसकी चपेट में आ रहे हैं और सारी व्यवस्थाएं तहस-नहस हो रही हैं। कोविड के प्रसार और जीवन के तीव्र नाश की कहानी दिल दहलाने वाली होती जा रही है।…

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भारत का यश, अब मंगल पर होगा वश

ऋतुपर्ण दवेभारत दुनिया का इकलौता देश है जो अपने मंगल मिशन में पहली ही कोशिश में पूरी तरह से कामयाब रहने के साथ सबसे सस्ता अभियान पूरा करने वाला देश बन गया। वहीं अब नासा ने एक भारतवंशी के द्वारा बनाए गए हेलीकॉप्टर को न केवल मंगल ग्रह पर पहुँचाया बल्कि 23 करोड़ किमी दूर धरती पर बैठे-बैठे उड़ाकर दिखाने का सपना भी सच साबित कर दिखाया। इसी 18 फरवरी को 7 माह की लगातार यात्रा के बाद पर्सिवरेंस मार्स रोवर को रात करीब 2.30 बजे मंगल ग्रह के जेजेरो…

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आखिर क्यों हो रही है रेमडेसिविर के लिए मारामारी ?

योगेश कुमार गोयलकोरोना की दूसरी लहर भारत में इतना भयानक रूप धारण कर चुकी है कि दिल्ली हाईकोर्ट को कहने पर विवश होना पड़ा है कि यह दूसरी लहर नहीं बल्कि सुनामी है और अगर हालात ऐसे ही चलते रहे तो अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले कुछ महीनों के भीतर मौतों का कुल आंकड़ा लाखों में पहुंच सकता है। इन दिनों कोविड संक्रमण के प्रतिदिन साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं और हजारों लोगों की रोजाना मौत हो रही हैं। यही कारण है…

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ऑक्सीजन पर राजनीति नहीं, परस्पर सहयोग जरूरी

सियाराम पांडेय ‘शांत’इस विषम कोरोनाकाल में प्राणवायु के संकट पर भी राजनीति तेज हो गई है। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल बिज ने आरोप लगाया था कि दिल्ली ने उसका ऑक्सीजन से भरा टैंकर लूट लिया है। इसके बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को भी आरोपों के कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से दिल्ली के लिए आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति में हरियाणा और उत्तर प्रदेश अवरोध पैदा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि दिल्ली के…

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अमेरिका में सिखों पर नस्लीय हमला

प्रमोद भार्गवअमेरिका के इंडियानापोलिस में 16 अप्रैल 2021 को हुए नस्लीय हमले में चार सिख समुदाय के लोग मारे गए हैं। नतीजतन इस भारतीय समुदाय ने भय और अनिश्चितता का महौल है। स्थानीय सिख संगठन कोअलिशन ने कहा है कि यहां अमेरिकी नागरिकों की तुलना में सिखों को ज्यादा भेदभाव और नस्लीय उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। यह हमला 19 वर्षीय श्वेत अमेरिकी ब्रैंडन स्कॉट ने किया था। इस सरकारी कर्मचारी ने गोलीबारी में आठ लोगों की हत्या के बाद स्वयं आत्महत्या कर ली। इस हत्यारे ने हॉल फेडएक्स…

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कोरोनाः खात्मे की भूल से पैदा हुआ महामारी का खौफनाक मंजर

ऋतुपर्ण दवेकोरोना ने समूची दुनिया को सकते में डाल दिया। इसे बहुरूपिया कहें, नया यूके वैरिएँट कहें, डबल म्यूटेशन वाला कहें या फिर सीधे शब्दों में इंसान की तासीर को भाँप चकमा दे-देकर नए-नए तरीकों से साँसों का गच्चा देने वाला दुश्मन है कोरोना। इस अदृश्य वायरस ने समूची दुनिया को तो हिला ही दिया, कोविड-19 पर जितने भी नए शोध या खुलासे सामने आ रहे हैं हर बार स्क्रिप्ट कुछ अलग होती है। समूची दुनिया में बेबसी का आलम है। भारत में अब पहली बार हालात बद से बहुत…

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राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

डॉ. वेदप्रताप वैदिकदेश के सिर्फ पांच राज्यों में आजकल चुनाव हो रहे हैं। ये पांच राज्य न तो सबसे बड़े हैं और न ही सबसे अधिक संपन्न लेकिन इनमें इतना भयंकर भ्रष्टाचार चल रहा है, जितना कि हमारे अखिल भारतीय चुनावों में भी नहीं देखा जाता। अभीतक लगभग 1000 करोड़ रु. की चीजें पकड़ी गई हैं, जो मतदाताओं को बांटी जानी थीं। इनमें नकदी के अलावा शराब, गांजा-अफीम, कपड़े, बर्तन आदि कई चीजें हैं। गरीब मतदाताओं को फिसलाने के लिए जो भी ठीक लगता है, उम्मीदवार लोग वही बांटने लगते…

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कोरोनाः जनता-कर्फ्यू जरूरी

डॉ. वेदप्रताप वैदिककोरोना महामारी का दूसरा हमला जितनी ज़ोरों से भारत में हो रहा है, शायद दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं हुआ। एक दिन में सवा दो लाख मरीज़ों का होना भयंकर खतरे की घंटी है। हजारों लोग रोज़ मर रहे हैं। उनमें बुजुर्ग तो हैं ही, अब जवानों की संख्या भी बढ़ने लगी है। कई शहरों में श्मशान घाट और कब्रिस्तान छोटे पड़ रहे हैं। मरीज़ लोग दवा और पलंगों की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं।कोरोना की दवा की कालाबाजारी शुरू हो गई है। मध्यवर्गीय…

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कोरोना संकटः स्थिति को संभालने की चुनौती

डॉ दिलीप अग्निहोत्रीकोरोना संकट के पहले चरण पर बड़ी हद तक नियंत्रण स्थापित हुआ था। लेकिन यह सभी लोगों को पता था कि संकट समाप्त नहीं हुआ है। इसके बाबजूद प्रायः सभी स्तरों पर लापरवाही हुई। तब स्थिति को संभालने में लॉकडाउन भी कारगर साबित हुआ था। यह सही है कि देश की बड़ी आबादी को मुसीबतों का सामना करना पड़ा लेकिन इसका कोई विकल्प भी नहीं था। भारत जैसे विशाल आबादी में संक्रमण अधिक फैलने के दुष्परिणाम अधिक भयावह होते। किंतु ऐसा लगता है कि अनलॉक के पहले चरण…

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चार्ली चैपलिनः दुनिया वालों मेरी मृत्यु पर आंसू न बहाओ, ठहाके लगाओ

चार्ली चैपलिन के जन्मदिवस (16 अप्रैल) पर विशेषयोगेश कुमार गोयल इंसान के जीवन में हंसी न हो तो इंसान और जानवर में भला क्या फर्क रह जाएगा। कुछ इंसान ऐसे भी होते हैं, जो खुद भले ही कितने भी दुखी हों, दूसरों को हंसाने के लिए कुछ न कुछ करते ही रहते हैं। एक शख्स ऐसा भी हुआ है, जिसने अपना समस्त जीवन लोगों का स्वस्थ मनोरंजन करने और उन्हें हंसाने-खिलखिलाने में ही बिता दिया। काले बाल, सिर पर पुराना हैट, हिटलर जैसी तितलीनुमा मूछें, नेपोलियन जैसा चेहरा, नीली आंखें,…

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