हिन्दी दिवस पर विशेष : हिंदी कब बनेगी भारत की राष्ट्रभाषा?

-हिंदी बोलने में शर्म नहीं, गर्व महसूस करें भारतवासी -युद्धवीर सिंह लांबा- ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय के सूल’। हिंदी के महान कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र सही लिखते हैं कि मातृभाषा की उन्नति बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है तथा अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है। देश की उन्नति में राष्ट्र भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। पहली…

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अनुच्छेद 370 : प्रचार बनाम सच

-राम पुनियानी- अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के भाजपा सरकार के निर्णय को सही ठहराने के लिए एक प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। अनुच्छेद 370 का उन्मूलन, लंबे समय से आरएसएस के एजेंडे में रहा है और राम मंदिर व समान नागरिक संहिता सहित हिन्दुत्व एजेंडे की त्रयी बनाता है। यह तर्क दिया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान के कारण बाहरी उद्योगपति वहां जमीनें नहीं खरीद पाए और इस कारण राज्य का विकास बाधित हुआ। यह भी कहा जा रहा है कि अनुच्छेद 370 के…

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नौ सौ चूहे खा पाक बना हाजी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 115 पन्नों का झूठ का पुलिंदा रखा, तो भारत ने भी उसके तार्किक जवाब दिए। मानवाधिकार परिषद की ही अपनी कुछ पुरानी रपटें हैं, जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, उनके इस्लामीकरण के खुलासे करती हैं। ऐसी ही एक रपट में पाकिस्तान की तत्कालीन सर्वोच्च अदालत का भी उल्लेख है। रपटों के पूर्वाग्रह हो सकते हैं या उनके तथ्यों की भिन्न व्याख्या की जा सकती है, लेकिन पाकिस्तान के ही वजीर-ए-आजम इमरान खान की सियासी पार्टी-पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के पूर्व विधायक…

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चित्र नहीं चरित्र की पूजा करते है हिन्दू

-नरेन्द्र सिंह राणा- चित्र भी उसीका पूज्यनीय होता है जिसका चरित्र पूज्यनीय हो। हम हिन्दू चित्र की पूजा नहीं सत्य की पूजा करते है। मंदिर में जिस भी भगवान की पूजा हम करने जाते है उसका परम पवित्र परोपकारी चरित्र भी हम पढते, जानते अथवा सुनते है। उदाहरण के लिए परमात्मा श्री राम का चरित्र ही मर्यादा, त्याग, आज्ञा, दया, क्षमा, कृपा व प्रेम आदि सद्गुणों से भरा पडा है। श्रीरामचरित्रमानस ग्रंथ सम्पूर्ण विश्व में राम की लीलाओं को जानने समझने व उन्हें जीने के लिए उपलब्ध है। पूज्य गुरूदेव…

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कब तक सहते रहेंगे हिन्दी की उपेक्षा का दंश

–(हिन्दी दिवस, 14 सितम्बर पर विशेष)  –रमेश ठाकुर  धनाढ्य और विकसित वर्ग ने जब से हिन्दी भाषा को नकारा है और अंग्रेजी को संपर्क भाषा के तौर पर अपनाया है, तभी से हिन्दी के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। वैश्वीकरण और उदारीकरण के मौजूदा दौर में हिन्दी तेजी से पिछड़ रही है। 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। देशभर में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। हर साल मंचासीन लोग गला फाड़-फाड़कर हिन्दी की रहनुमाई करते और हिन्दी की रक्षा के लिए छाती पीटते हैं। लेकिन असल सच्चाई देखें…

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बिहार : राजग में शह-मात, क्या गुल खिलाएगा

मुरली मनोहर श्रीवास्तव बिहार विकास की पटरी पर दौड़ रहा है। इस बात से सभी इत्तेफाक रखते हैं। जिस बिहार ने जंगलराज से लेकर नरसंहार तक की काली तस्वीरों को देखा है आज उस बिहार का नक्शा पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। इस बदलते बिहार की तस्वीर के लिए एनडीए अपनी पीठ थपथपाता रहा है। बात में दम भी है। जो काम करेगा उसका नाम तो होगा ही। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई नए प्रयोग कर बिहार के विकास में खुद को मिल का पत्थर साबित करने में…

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विवेकानंद ने दुनिया में बजाया था भारतीय अध्यात्म का डंका

–(शिकागो वक्तृता दिवस, 11 सितम्बर पर विशेष) –योगेश कुमार गोयल अपने ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे स्वामी विवेकानंद 39 वर्षों के अपने छोटे से जीवनकाल में समूचे विश्व को अपने अलौकिक विचारों की ऐसी बेशकीमती पूंजी सौंप गए, जो आने वाली अनेक शताब्दियों तक समस्त मानव जाति का मार्गदर्शन करती रहेगी। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे नरेन्द्र नाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से विख्यात हुए। वह आधुनिक मानव के ऐसे आदर्श प्रतिनिधि थे, जिनकी ओजस्वी वाणी युवाओं को हमेशा प्रेरित करती…

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युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति

(विश्व आत्महत्या निवारण दिवस, 10 सितम्बर पर विशेष) प्रभुनाथ शुक्ल आत्महत्या जिंदगी का सबसे प्राणघातक फैसला है। जीवन में कई स्थितियां ऐसी बनती हैं जब इंसान उससे लड़ नहीं पाता। जब उसे समस्या का निदान नहीं दिखता तो उसके मन में आत्महत्या की प्रवृत्ति जाग्रत होने लगती है। आत्महत्या के संबंध में यह तर्क मनगढ़ंत हैं कि पढ़े-लिखे लोग आत्महत्या कम करते हैं या नहीं करते। भारत में कई उदाहारण हैं जहां सफल व्यक्ति अपनी जिंदगी से पस्त होकर ऐसा कदम उठाता है। जिसके बारे में आम आदमी यह सोच भी नहीं…

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हां, मुर्गे की बांग भी है जरूरी

डॉ. प्रभात ओझा मुर्गा प्रतीक बन गया है हमारी जीवन शैली का, हमारे स्वास्थ्य का और यह एक विदेश की धरती से हुआ है। फ्रांस में मुर्गे के बोलने को लेकर करीब दो साल से बहस जारी थी। जिस मुर्गे की बांग से लोगों को जागने की प्रेरणा मिला करती है, वही वहां एक दंपती के लिए परेशानी का सबब बन गया। इस पर मुकदमा हुआ और बहस को इस रोचक मुकदमे ने ही जन्म दिया। हुआ यूं कि लुइस बिरन और उनकी पत्नी छुट्टियां बिताने गांव आये। पड़ोस में…

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कुपोषण घटा पर मोटापे का संकट बढ़ा

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा इसे शुभ संकेत ही माना जाना चाहिए कि देश में कुपोषितों की संख्या में तेजी से कमी आई है। हालांकि बढ़ता मोटापा नए संकट की ओर इशारा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ की हालिया रिपोर्ट में यह कहा गया है कि दुनिया के देशों में रोटी का संकट बढ़ा है। दुनिया में करीब 82 करोड़ दस लाख लोग भुखमरी के शिकार हैं। एशिया और अफ्रीका में ही ज्यादा लोग भुखमरी के शिकार हैं। इसमें भी दक्षिण एशिया की स्थिति अधिक चिंतनीय मानी जा रही है।…

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