नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषण नियंत्रण और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ‘निष्क्रियता’ को लेकर उसकी आलोचना करते हुए कहा है कि वह केवल पर्यवेक्षी प्राधिकरण ही नहीं है बल्कि उसे खुद होकर कार्रवाई भी करनी होगी। न्यायमूर्ति रघुवेंद्र एस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि डीपीसीसी अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझे तथा जब भी पर्यावरण संबंधी कानून का उल्लंघन हो तो जरूरी कदम उठाए।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण मंगलवार को यहां मादीपुर गांव के रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कूड़ा बीनने वालों द्वारा ठोस अपशिष्ट की छंटाई के दौरान प्रदूषण फैलाए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिकरण ने कहा कि कार्रवाई करने के बजाय डीपीसीसी ने एक स्थिति रिपोर्ट दायर की जो घटनास्थल के हालात की पुष्टि करती है। एनजीटी ने कहा, ‘‘हम एक बार फिर डीपीसीसी को, अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर थोपने के बजाय शिकायत पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश देते हैं। यह शिकायत आरडब्ल्यूए ने दी है।’’ एनजीटी ने आरडब्ल्यूए की शिकायत का पूरी तरह समाधान करने के बाद 13 सितंबर को अगली सुनवाई के लिए डीपीसीसी के अध्यक्ष को पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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