भारत में मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय : डॉ. जिम्मी

फतेहाबाद। पूरी दुनिया में करोड़ों लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं और इसका असर उनके साथ साथ उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। देखा गया है कि हर चौथे इंसान को कभी न कभी मानसिक रोग होता है। मनोचिकित्सक डॉ. जिम्मी जिंदल का कहना है कि दुनियाभर में इस रोग की सबसे बड़ी वजह है, निराशा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मानसिक रोग के शिकार बहुत से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे। जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। वे शनिवार को फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। मानसिक रोगों के बारे में जागरूकता विषय पर बोलते हुए डॉ. जिम्मी जिंदल ने कहा कि ब्रिटेन में मई माह में इसको लेकर एक वील सेलिब्रेट किया जाता है। इस बार भारत में भी यह मनाया जा रहा है।  
उन्होंने कहा कि भारत में 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं द्वारा आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत तक जा पहुंचा है जबकि विश्व में यह 10 प्रतिशत है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 में यह पाया गया है कि भारत की आबादी के करीब 14 प्रतिशत लोगों को सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की जरूरत है। करीब दो प्रतिशत लोग गंभीर मानसिक विकार से ग्रस्त हैं। करीब दो लाख लोग आत्महत्या
जैसे कदम उठाते हैं ।   

Submitted By: Edited By: Ved Pal Published By: Ved Pal at May 18 2019 5:15PM

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