3 साल में इस्पात उत्पादन 89 एमटी से बढ़कर 103 एमटी हुआ

नई दिल्ली। देश में कुल इस्पात उत्पादन 2014-15 में 88.98 मीट्रिक टन से बढ़कर 2017-18 में 103.13 मीट्रिक टन हो गया है। इस्पात राज्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री साय ने बताया कि सरकार ने सरकारी खरीद में राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 और डोमेस्टिक रूप से निर्मित लौह और इस्पात को प्राथमिकता प्रदान करने की नीति को अधिसूचित किया है, जो घरेलू उत्पादन और इस्पात की खपत में सुधार करने के लिए सुविधाजनक रहा। साथ ही सरकार ने घरेलू इस्पात उद्योग को बढ़ावा देेने के लिए कई कदम उठाए। बजट सत्र के दौरान देश के इस्पात उद्योग को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि स्टील पर सीमा शुल्क दो चरणों में जून-15 और अगस्त में 2.5प्रतिशत बढ़ाया गया। न्यूनतम आयात मूल्य(एमआईपी) निर्दिष्ट स्टील उत्पादों पर फरवरी 16 में लगाया गया। एमआईपी फरवरी 17 से समाप्त हो गया है। हॉट रोल्ड कॉइल्स पर 20प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया गया, जिसे अगस्त,2016 में अधिसूचित किया गया। इस्पात कॉईल्स के लिए एंटी डंपिंग उपायों को अगस्त में नियमित रूप से लागू किया गया और अंत में मई 17 में अधिसूचित किया गया। इसी तरह सीआर कॉइल्स के लिए एंटी डंपिंग उपायों को अगस्त में नियमित रूप से लागू किया गया और अंत में मई 17 में अधिसूचित किया गया। सितंबर में तार छड़ के लिए एंटी डंपिंग उपाय अंतिम रूप से 16 और अंत में 17 अक्टूबर को अधिसूचित किए गए।

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