बच्चों की सही ‘परवरिश’ उनके सर्वांगीण विकास की गारंटी – एस. के मिश्रा

Ranchi: डीएवी पब्लिक स्कूल हेहल,राँची के प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों लिए विशेष सत्र ‘परवरिश’ का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य बच्चों में किताबी ज्ञान के साथ साथ चारित्रिक विकास एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन पर विचार विमर्श करना था|
सत्र की शुरुआत प्राचार्य श्री एस के मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की।उन्होंने अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि परिवार बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है,जहाँ से वह जीवन का पहला सबक सीखता है।माँ उसकी पहली गुरु होती है।बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन आज के दौर में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल-सा होता जा रहा है।बच्चों कोे कितना ही समझा लें,वे करते अपने मन की ही हैं।अगर उन्हें बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वे आगे चलकर संस्कारवान बनेंगे।इसलिए मेरा सभी अभिभावकों से आग्रह है कि वे अपने बच्चों के पालन-पोषण में ज्यादा से ज्यादा समय दें और उन्हें चरित्रवान,ईमानदार, सहनशील एवं संस्कारयुक्त नागरिक बनने की शिक्षा दें,जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो।क्योंकि बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट की तरह होता है, उस पर हम जो चाहे लिख सकते हैं। यह लिखावट उसके मन-मस्तिष्क में आजीवन रहती है।
बच्चों से बात करके ही उनका विश्वास जीता जा सकता है।ऐसे में वाे जो महसूस करते हैं, समझते हैं उसे वे पैरेंट्स से खुलकर बोल देते हैं। अगर उन्हें बात-बात पर डांटा-फटकारा जाए या टोका जाए तो बच्चे बातें छिपाना और बहाने बनाना सीख जाते हैं। उन्हें प्यार के साथ उदाहरण देकर सही-गलत में अंतर बताया जाए तो वे आपकी बात आसानी से समझ जाएंगे। संस्कारी बच्चे अच्छे समाज की नींव हाेते हैं। अच्छे संस्कारी समाज से ही राष्ट्र की उन्नति की दिशा तय होती है।
सत्र में चुनिंदा विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता के साथ भाग लिया जो संसाधक के रूप में अन्य बच्चों में सद्गुणों का विकास करेंगे। इस सत्र में प्राइमरी शाखा की प्रभारी श्रीमती अनुराधा सिंह,श्रीमती अमृता कुमारी, श्रीमती वर्षा राज, श्रीमती निकिता सिन्हा, सुश्री नीतू कमल, सुश्री नज़हत श्री रोहित राज एवं अन्य शिक्षकगण उपस्थित थे।

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