पारस एचईसी अस्पताल, राँची में विश्व फ़ार्मासिस्ट दिवस मनाया गया।

पूरी दुनिया में आज का दिन यानि 25 सितंबर को विश्व फ़ार्मासिस्ट दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

हमारे जीवन को स्वस्थ रखने और विभिन्न बीमारियों को दूर करने के लिए डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का भी बहुत बड़ा योगदान है। 

नई दवाएं खोज करने, विभिन्न प्रकार के टीकों का आविष्कार करने और उन्हें बड़ी संख्या में बाजार तक पहुंचाने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

वे नई दवाओं का प्रशिक्षण, खोज और अनुसंधान करते हैं।

Ranchi : विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर भारत में  हर साल इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) इसके लिए एक थीम तय करता है। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2023 का थीम “ फार्मेसी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना ” है। आपको बता दें की इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) राष्ट्रीय रसायनज्ञ और फार्मास्युटिकल वैज्ञानिक समूहों का एक वैश्विक संघ है, जिसने दुनिया भर में स्वास्थ्य सुधार में फार्मासिस्टों की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए 25 सितंबर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस के रूप में स्थापित किया ।

विश्व फ़ार्मासिस्ट दिवस दिवस के मौक़े पर पारस अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ संजय कुमार ने फ़ार्मासिस्टों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जिस तरह से कंप्यूटर का CPU होता है ठीक उसी तरह से किसी भी स्वास्थ्य सेवा संस्थान के लिए फ़ार्मासिस्टों का महत्व है।किसी भी चिकित्सीय संस्थान में फ़ार्मासिस्टों का योगदान बहुमूल्य होता है।इस अवसर पर उपस्थित सभी फ़ार्मासिस्टों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप सब पारस परिवार के मुख्य अंग हैं जो मरीज़ और चिकित्सक के बीच में एक ब्रिज का काम करते हैं। किसी भी स्वास्थ्य संस्थान की रीढ़ होते हैं फ़ार्मासिस्ट। सजगता, अनुशासन,  समर्पण और जज्बा के लिए सभी को बधाई दी। 

इस मौक़े पर सभी फ़ार्मासिस्टों को बधाई देते हुए पारस एचईसी अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतीश कुमार ने कहा की फ़ार्मासिस्ट के ऊपर अस्पताल की बहुत ज़िम्मेवारी होती है। एक फार्मासिस्ट लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अपने सभी कर्तव्य करता है, जिसमें दवा की सही पहचान, उसकी रीस्टॉकिंग, एक्सपायरी डेट और दवाओं की उपलब्धता आदि शामिल है, ताकि किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर इसका कोई गलत प्रभाव न पड़े। फ़ार्मासिस्टों को चाहिए की अपनी जिम्मेवारियों को निभाते सजगता के साथ संस्थान और मरीज़ों का ध्यान रखें। 

भारतीय फार्मेसी के जनक

प्रोफेसर महादेव लाल श्रॉफ को भारतीय फार्मेसी के जनक के रूप में जाना जाता है।फार्मेसी के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में फार्मेसी के लिए 3 साल का पाठ्यक्रम शुरू किया, जिसका पालन अब भारत के हर सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालय में किया जाता है। बिहार के एक छोटे से शहर दरभंगा में जन्मे प्रोफेसर महादेव लाल श्रॉफ ने अपनी स्कूली शिक्षा भागलपुर में पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय चले गये।

पारस अस्पताल में आज विश्व फ़ार्मासिस्ट दिवस के मौक़े पर अस्पताल के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों संग फ़ार्मासिस्टों ने केक काटकर ख़ुशियाँ मनाई। साथ ही साथ इस अवसर पर अपनी कार्यप्रणाली को और बेहतर तथा मरीज़ों के प्रति समर्पण भाव में दृढ़ता लेन का संकल्प लिया।

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