निरीक्षण के दौरान गुमला के 23 शिक्षकों को शोकॉज नोटिस जारी, तीन दिन के अंदर जवाब देने का आदेश

रांची। प्रयास सह प्रोजेक्ट इम्पैक्ट (एनईपी) के जमीनी कार्यान्वयन के लिए राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक आदित्य रंजन के निर्देशानुसार गठित राज्यस्तरीय अनुश्रवण दल की ओर से विभिन्न जिलों में सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। 24 पदाधिकारियों के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय दल द्वारा लापरवाही बरतने वाले स्कूलों, शिक्षकों, एचएम के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है।
सोमवार को राज्य के कई सरकारी स्कूलों में टीम द्वारा औचक निरीक्षण कर स्कूल में शैक्षणिक वातावरण, शिक्षकों एवं बच्चों की उपस्थिति, स्कूल की आधारभूत संरचना, लैब, हाउस आदि की समीक्षा कर टीम ने राज्य शिक्षा परियोजना को अपनी रिपोर्ट भेजी। अनुश्रवण दल ने कई स्कूलों में शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों को लापरवाही बरतने एवं राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के आदेशों की अवहेलना करने के मामले में दोषी पाया।
टीम ने गुमला के 23 शिक्षकों को ई-विद्यावाहिनी पोर्टल में नियमित बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करने के मामले में शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। इन शिक्षकों को तीन दिन के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही संतोषजनक जवाब ना मिलने की स्थिति में इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है। जिन शिक्षकों को शोकॉज किया गया है उनमें शशी तिर्की, किरण प्रसाद, पिंटू बारा, अशोक साहू, प्रियंका कुमारी, मोहम्मद असलम, संगीन मिंज, उज्ज्वला मिंज, श्वेता पांडे, जाकिर हुसैन, पुनीत मिंज, फिलसिता टोप्पो, सुधा लकड़ा, अनुपमा केरकेट्टा, शांता जोज्वार, रश्मी तिग्गा, ब्रिजेट कुजूर, अभिषेक लकड़ा, महादेव साहू, मुनमुन लकड़ा, हेमंत महतो, नैंसी प्रिया और लेना कुजूर के नाम शामिल हैं।
गुमला एवं गढ़वा निरीक्षण के लिए गए अनुश्रवण दल ने इन जिलों के एक-एक स्कूलों को लैब कार्यशील नहीं रहने एवं कम अटेंडेंस के मामले में दोषी पाया है। गुमला के कामडारा स्थित कुरकुरा राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय और पलामू के पाटन के राजकीयकृत प्लस टू हाई स्कूल के शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इन दोनों स्कूलों के शिक्षकों और एचएम की सैलरी रोकने का आदेश दिया गया है।
अनुश्रवण दल के पदाधिकारियों ने गढ़वा के रमना स्थित आरके प्लस टू हाई स्कूल में बच्चों की कम उपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक को रिपोर्ट भेजी है। टीम ने पाया कि स्कूल में कुल बच्चों के अनुपात में प्रार्थना सभा में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी। टीम ने स्कूल से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

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