जन्मजात दिल में छेद का निःशुल्क ऑपरेशन

  • रोटरी गिफ्ट ऑफ़ लाइफ : बच्चों के दिल का रखेगी ख्याल
  • 3 और 4 तारीख़ को राज हॉस्पिटल में स्क्रीनिंग , अब तक 107 बच्चों का हुआ रजिस्ट्रेशन, 300 का है लक्ष्य
  • 2010 से अब तक रोटरी ने 935 बच्चों का करवाया सफल ऑपरेशन

Ranchi : रोटरी पोलियो के बाद “ गिफ्ट ऑफ़ लाइफ “  प्रोग्राम के माध्यम से अठारह साल की उम्र तक के जिन बच्चो के दिल में छेद है या वॉल्व में सिकुडऩ है उनका देश के नामी गिरामी अस्पतालों में नामचीन डाक्टरों के माध्यम से निःशुल्क इलाज करवा रही है . 3 और 4 अक्टूबर को मेंन रोड अवस्थित राज हॉस्पिटल रांची में स्क्रीनिंग केम्प होगा .

रोटरी डिस्टिक 3250 के पूर्व गवर्नर योगेश गंभीर ने कहा की दिल में छेद या  वॉल्व में सिकुडऩ से निराश रोगियों के  बीच रोटरी की महतवपूर्ण परियोजना “ गिफ्ट ऑफ़ लाइफ “  इलाज का जरिया बनी है। जिनको भी इलाज की आवश्यकता है राँची स्थित राज हॉस्पिटल में 3 और 4 अक्टूबर को लगने वाले स्क्रीनिंग केम्प के लिए सम्पर्क नंबर
9204055678 और
9771488888 में संपर्क कर पहले से नंबर लगा सकते है . तमाम इलाज निःशुल्क होंगे . परिजनों को पूर्व की जाँच रिपोर्ट के साथ साथ इकोकार्डियोग्राम,  ई सी जी और चेस्ट के एक्सरे भी लानी है . राज हॉस्पिटल राँची में स्क्रीनिंग एम्स कोच्ची के प्रसिद्द डॉ ब्रजेश पी कोटाईल एवं उनकी टीम द्वारा की जाएगी।

रोटरी रांची मिड टाउन की अध्यक्ष मंजू गंभीर ने कहा कि किसी के भी परिजनों को जब ये मालुम होता है की उसके बच्चे के दिल में छेद है या उसके वाल्व सिकुड़ गए है, तो उनपर क्या बीतती है. मध्यमवर्गीय परिवार तो टूट जाते है उसके इलाज में . रोटरी ने केवल झारखंड बिहार में अब तक 935 जरुरत मदों का निः शुल्क इलाज किया है .
प्रवीण राजगढ़िया ने बतलाया की रोटेरियन पुरे झारखण्ड एवं बिहार के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से दिल की बीमारी से ग्रस्त बच्चों को खोज कर उसके इलाज की तत्काल व्यवस्था कर रहे है .अब तक रांची, खूंटी, चक्रधरपुर, रामगढ़, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, बोकारो, हज़ारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा के साथ साथ बिहार, छत्तीसगढ़ एवं बंगाल के 107 बच्चों का प्री रजिस्ट्रेशन हो चुका है । रोटरी सबों से अपील करता है की यदि आप किसी ऐसे मरीज को जानते हो तो कृपया उन्हें जरूर भेजें । उनका इलाज कोच्ची (केरल) के प्रसिद्ध अमृता अस्पताल में निःशुल्क होगा

रोटरी रांची के अध्यक्ष डॉ विनय ढानढनिया ने कहा कि जिन बच्चों के दिल के पर्दे में छेद होता है, उनका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता है या क्लोज़्ड टेक्नीक जिसको एंजियोप्लास्टी कहा जाता है,  उससे किया जाता है. ये निर्भर करता है कि बच्चे के दिल में छेद किस साइज़ का है, उसकी लोकेशन क्या है. इस सबकी जांच कर के डॉक्टर इलाज के लिए सबसे बेस्ट तरीका चुनते हैं. ओपन हार्ट सर्जरी में बच्चे के दिल की धड़कन को रोका जाता है. फिर चेस्ट ओपन कर के दिल में जो छेद है उसे बंद किया जाता है. बिना ऑपरेशन के तरीके में हाथ या पैर की नसों में एक यंत्र डाला जाता है. ये यंत्र दिल तक पहुंचाया जाता है. उसके बाद छेद को बंद किया जाता है. आजकल दोनों की टेक्नीक में काफ़ी सुधार हो गया है, 95-99 प्रतिशत केसेस में पेशेंट ठीक हो जाता है. सही टाइम पर इलाज हो वो ज़रूरी है.

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