चिटफंड पर नये विधेयक का हुआ स्वागत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को यहाँ हुई बैठक में अनियमित जमा योजना निरोधक विधेयक, 2018 के संशोधनों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अवैध संचालकों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलेगी। श्री सुप्रियों ने गुरुवार को ट्वीट किया,अनियमित जमा योजना निरोधक विधेयक, 2018 में संशोधनों को मंजूरी प्रदान करने से आम लोग अवैध संचालकों के खिलाफ और सशक्त होंगे। यह बिल्कुल नई , कड़ी तथा व्यापक कदम है। उन्होंने मोदी ने चिटफंड घोटालों को रोका लिखा हैसटैग भी जारी किया है। यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) गठबंधन शारदा चिट फंड समेत विभिन्न घोटालों की जांच के सिलसिले में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार से टकराव मोल ले चुकी है। दरअसल राज्य में शारदा और रोज वैली चिट फंड के नाम से दो प्रमुख घोटाले सामने आ चुके हैं जिसकी आंच ओडिशा और त्रिपुरा तक में फैली हुई है। इन मामलों की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारियों को उस समय मुंह की खानी पड़ी जब वे कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के घर पर शारदा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में पूछताछ करने उनके निवास पर पहुंचे। वहां स्थानीय राज्य पुलिस बल के जवानों ने सीबीआई अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया। सुश्री बनर्जी ने सीबीआई पर घोटाले के बहुत कुछ जानकार श्री कुमार के आवास पर सीबीआई छापेमारी के विरोध में धरना शुरू कर दिया जिसे खत्म करवाने के लिए तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एम चंद्रबाबू नायडू को कोलकाता आना पड़ा। इस बीच उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को शारदा चिटफंड मामले की जांच में सहयोग का निर्देश देते हुए सीबीआई के समक्ष शिलांग में पेश होने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि श्री कुमार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई फिलहाल नहीं की जाएगी, न ही उन्हें गिरफ्तार किया जायेगा। न्यायालय के इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताते हुए सुश्री बनर्जी ने अपने धरने का समापन कर दिया था। सरकार ने अनियमित जमा योजनाओं से जुड़े विधेयक में इन योजनाओं को पूरी तरह अवैध तथा अपराध करार देने का प्रावधान किया है और इससे सरकार को ऐसी कंपनियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिल जायेगा। नई परिभाषा के अनुसार कोई भी ऐसी जमा योजना जो नियमित की श्रेणी में नहीं है उसे अवैध और अपराध बनाया गया है। साथ ही ऐसी योजनाओं का किसी भी तरह से प्रचार-प्रसार तथा ब्रांड एम्बेसडर आदि के तौर पर उसका विज्ञापन करना भी अपराध होगा। ऐसी योजना चलाने वाली कंपनियों की संपत्ति जब्त कर जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने का भी प्रावधान विधेयक में किया गया है।

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