केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना का मामला संविधान बेंच को रेफर

नई दिल्ली। देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में सुबह होने वाली प्रार्थनाओं को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने संविधान बेंच को रेफर कर दिया है। याचिका एक वकील विनायक शाह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी अनुदान पर चलने वाले स्कूलों में किसी खास धर्म को प्रचारित करना उचित नहीं। याचिका में कहा गया है कि छात्र चाहे किसी भी धर्म के हों उन्हें मार्निंग एसेंबली में हिस्सा लेना होता है और प्रार्थना करना पड़ता है। उस प्रार्थना में कई सारे संस्कृत के भी शब्द हैं। संस्कृत में असतो मा सदगमय ! तमसो मा ज्योतिर्गमय ! मृत्योर्मामृतं गमय ! को शामिल किया गया है। इस प्रार्थना में और भी ऋचाएं शामिल हैं, जिनमें एकता और संगठित होने का संदेश है। जैसे, ओम सहनाववतु, सहनौ भुनक्तुः सहवीर्यं करवावहै. तेजस्विना वधीतमस्तु मा विद्विषावहै ! याचिका में कहा गया है कि मार्निंग एसेंबली में शिक्षक सभी छात्रों पर नजर रखते हुए देखते हैं कि कोई भी छात्र ऐसा न हो जो हाथ जोड़कर प्रार्थना न करे। अगर ऐसा कोई छात्र मिलता है जो हाथ जोड़कर प्रार्थना नहीं करता पाया गया तो उसे पूरे स्कूल के सामने सजा दी जाती है। याचिका के मुताबिक ये प्रार्थना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है जो हर नागरिक को अपना धर्म मानने की आजादी देता है। केंद्रीय विद्यालय के प्रार्थना के जरिये अल्पसंख्यक और नास्तिक छात्रों पर भी ये प्रार्थना लादना गलत है।

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