डी ए वी नंदराज में तीन दिनों का बाल संस्कार कार्यशाला प्रारंभ हुआ

  • जीवन का उद्देश्य अस्ति से स्वस्ति अर्थात् ईश्वरीय वस्तुओं को कल्याणकारी बनाना है।
  • इंटरनेशनल विद्वान आचार्यश्री आनंद पुरूषार्थी जी

Ranchi: डीएवी नंदराज में तीन दिनों तक चलने वाले संस्कार प्रशिक्षण शिविर का प्रारंभ यज्ञ के साथ शुरू हुआ।
यज्ञ के ब्रह्मा वैदिक विद्वान आचार्यश्री आनंद पुरूषार्थी जी , मध्यप्रदेश के थे । यज्ञ के यजमान
आर्य ज्ञान प्रचार समिति के प्रधान श्री मान एस एल गुप्ता जी , श्रीमती सुशीला गुप्ता जी, आर्यसमाज रांची के प्रधान श्री राजेन्द्र आर्य जी , प्राचार्य श्री रवि प्रकाश तिवारी आदि थे ।
आज के कार्यक्रम में
स्कूल के प्रधान श्री प्रेम प्रकाश आर्य जी सपत्निक, मंत्री श्री पुनीत पोद्दार जी, रांची आर्यसमाज के मंत्री श्री अजय आर्य जी , कोषाध्यक्ष श्री संजय पोद्दार जी, डा शांति प्रकाश जी ,शहर के अन्य गणमान्य महानुभाव आदि उपस्थित थे ।

इस अवसर पर श्रीमती सुशीला गुप्ता जी, श्रीमान गुप्ता जी, श्री प्रेम प्रकाश आर्य जी, श्री पोद्दार जी ने सम्मिलित रुप से झंडोत्तोलन करके शिविर का शुभारंभ किया । इस अवसर पर 500 छात्र – छात्राएं, शिक्षक – शिक्षिकाएं जिसमें नर्सरी के बच्चे भी उपस्थित थे ।
सर्वप्रथम विद्यालय के प्राचार्य श्री रवि प्रकाश तिवारी जी ने सभा को शिविर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जमाना है । एक मोबाइल रेडियो, सिनेमा, कैमरे, गेम के संसाधन ,ट्रार्च, कैलकुलेटर आदि सबों को खत्म कर दिया। आज हम मशीन बन रहे हैं ।बस! इसी से निकाल कर संस्कार देना, आत्मा को जगाना, जड़ों को मजबूत करना, चरित्र निर्माण करना आदि इस शिविर का उद्देश्य है। आपने सुना होगा धर्मों रक्षिति रक्षित: अर्थात् जो व्यक्ति धर्म नियम , कानून आदि का पालन करना है ईश्वर के संविधान को मानता है ईश्वर उसकी सुरक्षा करते हैं । यही सुरक्षा , उन्नति चरित्र है जिसके कला को आर्ट को सिखने के लिए आपको बुलाया गया है ।
इसके बात माता श्रीमती सुशीला गुप्ता जी ने बच्चों को आशीर्वाद दिया। फिर श्री प्रेम प्रकाश आर्य जी ने अपने संबोधन में कहा कि सभी स्कूल मोडर्न शिक्षा को दे रहे हैं । हम चाहते हैं कि मोडर्न शिक्षा के साथ भारतीय वैदिक शिक्षा भी बच्चों को मिले।इसी उद्देश्य से शिविर आयोजित किया गया है ।आप कुछ नया अच्छा सीखें,यह इच्छा है । इसी के साथ अपने संबोधन में श्री राजेन्द्र आर्य ने कहा कि कभी भारत में जितने गांव थे उतने गुरू कुल थे । साक्षरता दक्षिण भारत में शत प्रतिशत थी पर मैकाले की शिक्षा ने हमें क्या दिया आपके सामने है । यह शिविर आपको श्रेष्ठ बनाने का काम करेगा ,ऐसी आशा है ।
अब बरेली से आए श्री पं नेत्रपाल जी ने अपने मधुर भजनों से सबों का मन मोह लिया ।ये मनोरंजन के साथ साथ सहनशीलता, धैर्य आदि की शिक्षा भजनों के माध्यम से दिए।

अब मुख्य इंटरनेशनल वक्ता मध्य प्रदेश से पधारे श्री आचार्य आनंद पुरूषार्थी जी ने अपने
संबोधन में कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। मन ठीक करो सब ठीक हो जाएगा। और मन ठीक करना है तो सवेरे जगो। जो जागते हैं वे पावत हैं जो सोवत हैं वे खोवत हैं । अपनी दिनचर्या सुधारो । पवित्र मन में परमात्मा का दर्शन होता है ।कींचड़ भरे पानी में पानी का तल नहीं दिखता है उसी तरह गंदे लोग ईश्वर को नहीं जान और पा सकते हैं ।
तुम्हारा आचरण और व्यवहार ही तुम्हें महान बनाएगा । बुद्धिमानों के सात गुण है सुनने की इच्छा, श्रवण, ग्रहण, धारणा, तर्क वितर्क, विज्ञान, अर्थ ज्ञान, तत्व ज्ञान। यही सीढियां है सीखने के। तो आओ! इसे धारण कर आगे बढ़े ।
अंत में शांति पाठ के साथ आज का कार्यक्रम पूरा हो गया ।

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