झारखण्ड उच्च न्यायालय में कुल 88,229 सिविल और आपराधिक मामले लंबित

रांची। झारखण्ड उच्च न्यायालय में कुल 88,229 सिविल और आपराधिक मामले लंबित हैं। केन्द्रीय विधि और न्याय तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्यमंत्री पी.पी.चौधरी ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। मंत्री के सदन में रखे गए निवेदन के अनुसार, देश के 23 विभिन्न उच्च न्यायालयों में कुल 40,92,732 सिविल और दांडिक मामले लंबित हैं। झारखण्ड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की अनुमोदित पद संख्या 25 है, जिसके सामने 07 पद रिक्त हैं। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की अनुमोदित पद संख्या 1079 है, जिसके सामने 400 पद रिक्त हैं। नथवाणी भारत के सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पद, सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित सिविल और आपराधिक मामलों की संख्या के बारे में जानना चाहते थे। सदन में प्रस्तुत निवेदन के अनुसार एक फरवरी 2019 की स्थिति पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कुल 58,209 सिविल और आपराधिक मामले लंबित थे। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के अनुमोदित पदों की संख्या 31 है, उसके सामने न्यायाधीशों के 03 पद रिक्त हैं, ऐसा मंत्री के निवेदन में बताया गया। मंत्री के निवेदन के अनुसार, वर्ष 2015-2018 के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में 18 न्यायाधीशों और देश के 25 उच्च न्यायालयों में 384 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई थी। सरकार ने उच्च न्यायालयों की पद संख्या में मई 2014 में 906 से वर्तमान में 1079 तक वृद्धि भी की है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने न्यायपालिका द्वारा मामलों के निबटारे के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराने के लिए अनेक कदम उठाये हैं। इसमें न्याय परिदान और विधिक सुधारों के लिए राष्ट्रीय मिशन की स्थापना, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के लिए अवसंरचना (न्यायालय कक्ष और आवासीय इकाईयां) सुधार, बेहतर न्याय परिदान के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का लाभ उठाना और विशेष प्रकार के मामलों का त्वरित निपटान के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) पर जोर शामिल है।

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