चलो तुम्हें पार्क में ले जाएं

आजकल के दौर में बहुत से बच्चे टीवी, कंप्यूटर व इनडोर गेम्स में इतने मस्त रहते है कि न तो वे बाहर खेलने जाना चाहते है और न ही उनके माता-पिता के पास इतना समय होता है कि वे उन्हे बाहर घुमाने ले जाएं। बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए ठीक नहीं है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को पार्क इत्यादि घुमाने अवश्य ले जाएं। बस कुछ बातों का ध्यान रखें।

-पार्क ले जाते समय बच्चों को मौसम के अनुकूल वस्त्र पहनाकर ले जाएं। पार्क ले जाने के दौरान बहुत महंगे कपड़े न पहनाएं अन्यथा आपको और बच्चों को हर वक्त धूल-मिट्टी से कपड़े खराब होने का डर बना रहेगा और बच्चा खुलकर खेल भी नहीं पाएगा।

-आप चाहें तो बच्चों के साथ परिवार के अन्य लोगों और पड़ोसी के बच्चों को भी ले जा सकती है। वह लोगों के साथ तालमेल बिठाना सीखेगा। इससे आपके बच्चे का मानसिक और सामाजिक विकास सही ढंग से होगा।

-जब भी बच्चे को पार्क ले जाएं, अपने साथ कुछ इंडोर गेम्स जैसे लूडो, छोटा सा कैरम बोर्ड, अन्य प्रकार के गेम्स और बैडमिंटन, फुटबाल आदि अवश्य ले जाएं।

-बच्चे के साथ स्वयं भी खेलें। इससे उसको यह महसूस होगा कि आप उसकी कितनी फिक्र करती हैं।

-पार्क जाते समय पानी की बोतल व खाने का कुछ सामान अपने साथ अवश्य ले जाएं। कई बार खेलते-खेलते बच्चों को भूख लग आती है। खाने का सामान साथ होने पर बच्चे को बाहर की खुली चीजें खरीदकर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उसका स्वास्थ्य भी सही रहेगा।

-झूला झूलते समय बच्चे के पास रहे और उस पर बराबर नजर रखें कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए।

-पति की छुट्टी हो तो उन्हे भी साथ चलने को कहे। इससे बच्चों को आपके साथ समय बिताने में और मजा आएगा। साथ ही पति को भी कुछ बदलाव महसूस होगा।

-पार्क में अगर कर्मचारी है तो उनसे बच्चों की जान-पहचान अवश्य करवा देनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे आपकी मदद कर सकें।

-बच्चों को घर से ही समझाकर ले जाएं कि पार्क में फूल-पली न तोड़े और न ही खाने-पीने की चीजें इधर-उधर फेंकें।

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