World Heart day : अगर आपका हृदय ठीक से काम नहीं कर रहा, तो कहीं इसकी वजह खून का गाढ़ा होना तो नहीं, जाने कैसे

Hamaaree Sehat : आज २९ सितम्बर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड हर्ट डे या विश्व हृदय दिवस मना रहा है। यह दिन हृदय रोगों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ल्ड हार्ट फाउंडेशन ने की थी।

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित उपाय सहायक सिद्ध हो सकते हैं :

1 प्रतिदिन अन्य कार्यों की तरह ही व्यायाम के लिए भी समय निकालें।

2 सुबह और शाम के समय पैदल चलें या सैर पर जाएं।

3 भोजन में नमक और वसा की मात्रा कम कर लें, अधिक मात्रा में यह हानिकारक होते हैं।

4 ताजे फल और सब्जियों को आहार में शामिल करें।

5 तनावमुक्त जीवन जिएं। तनाव अधि‍क होने पर योगा व ध्यान के द्वारा इस पर नियंत्रण करें।

6 धूम्रपान का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, यह हृदय के साथ ही कई बीमारियों का कारक है।

7 स्वस्थ शरीर और दिल के लिए भरपूर नींद लें।

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की रोड (रांची ) स्थित जसलोक अस्पताल के डाक्टर जितेंद्र सिन्हा का मानना है कि हृदय को ठीक से काम करता रहे इसके लिए जरूरी है कि रक्त को गाढ़ा(Thick) होने से बचाया जाए :

खून गाढ़ा क्यों होता है:

मोटापा,डायबिटीज ,थायराइड या ५५ वर्ष से अधिक उम्र होने पर खून स्वत: गाढ़ा होने लगता है। यदि आप जवान, स्लिम और बिमारियों से मुक्त है किन्तु तला- छना भोजन,मांस और शराब के प्रेमी है तो भी आपके खून में गाढ़ापन आने लगेगा। जवानी और बुढ़ापा देखकर हृदयाघात आक्रमण नहीं करता है।

कैसे पहचानें कि मेरा रक्त अधिक गाढ़ा हो रहा है?

तेजी से चलने या सीढ़ी पर चढने के दौरान यदि पसीना, घबराहट और सांस फूलने लगता हो । सीने में हल्की सी टीस या दर्द आती हो। हमेशा थकावट और सुस्ती रहता हो तो तुरंत खून के गाढ़ेपन की जांच करवानी चाहिए।

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जांच विधि :

बहुत ही सरल जांच है। प्रयोगशाला में यह खून के कुछ बुंदों से प्लेटलेट्स की संख्या माप ली जाती प्लेटलेट्स १.५ लाख से अधिक आने पर उसे गाढ़ा खून (thick blood) कहा जाता है। ६० वर्ष से अधिक उम्र होने पर प्लेटलेट्स को १ लाख या कम पर रखा जाता है।

हार्ट अटैक का खून से क्या सम्बंध है:

किसी अंग तक खून नहीं सही समय पर न पहुंच पाए तो उस अंग में लकवा मार सकता है। जिस तरह पानी के पाइप में सरसों तेल का बहना कठिन है, ठीक वैसे ही गाढ़े खून के साथ है । हृदय तक न पहुंचे तो प्राण निकल जाए। हार्टअटैक के बढ़ते मामलों को देखकर आधुनिक हृदय शास्त्र का मत है कि ५० वर्ष के बाद हरेक आदमी को एस्प्रीन की ७५ मिलीग्राम की गोली लेनी चाहिए । यह २४ घंटे खून को पतला रखता है। एस्प्रीन से कई गुणा अधिक शक्तिशाली प्रासोंग्रील है जिसे डाक्टर के देखरेख में ही लिया जा सकता है।

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