Hamaaree Sehat : कहीं आप बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार तो नहीं तुरंत जाने

Health : कुछ लोगों का व्यवहार अजब-गजब होता है। इनके मूड का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इटकी रोड(रांची) स्थित जसलोक अस्पताल के डाक्टर जितेंद्र सिन्हा का मानना है कि ऐसे अजब-गजब व्यवहार मानसिक रोग बाइपोलर डिसऑर्डर में देखनों को मिलते है।

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बाइपोलर डिसऑर्डर क्या होता है :

बायपोलर में दो अलग-अलग तरह के व्यवहार मिलते हैं। बाइपोलर वन में मरीज आराम किए बिना नान स्टाप काम करता मिलेगा। उसकी चुस्ती फुर्ती देखकर तेज तर्रार और स्वस्थ्य आदमी की छवि बनती है। बातें करना खूब पसंद होगा। पीन मारते ही अपने सारे राज खोल कर रख देंगा। टोका टोकी से ये खिन्न होकर उत्तेजित हो जा्एगा। इसकी बातों में हां में हां मिलाने पर इसे असिम शांति मिलती है। दिखावे के लिए औकात से ज्यादा ख़र्च करेंगा। खु़द को सिकन्दर समझने के कारण ग़लत फैसले लेना इसके पतन का कारण बनता है जिससे डिप्रेशन का दौर शुरू होता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण :

बाइपोलर २ या हाइपो मेनिया के दौरे में मन उदास रहता है। बिना किसी कारण के रोते रहने का मन करता है। काम में मन नहीं लगता। हमेशा सोए रहने का मन करता है। बात करने का मन नहीं करता।

बॉलीवुड के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने बाइपोलर २ के तीव्र दौरे में ख़ुदकुशी कर ली थी। सुपर स्टार राजेश खन्ना, राजकुमार और दिलीप कुमार बायपोलर मरीज के बड़े उदाहरण है। चिकित्सकों ने ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार को हिदायत दे रखी थी कि सिर्फ हल्की फुल्की फिल्म करें वर्ना दवाएं काम नहीं कर पाएंगी। ये महारथी एक्टिंग को इतनी गम्भीरता लेते थे कि मस्तिष्क प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती थी।

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भारत में चुनाव व्यवस्था के सबसे बड़े सुधारक स्वर्गीय टी.एन शेषण को बायपोलर से इतनी ऊर्जा और आत्मविश्वास मिलता था कि सारे सिस्टम से टकरा जाते थे। इन्होंने लालू यादव जैसे ताकतवर नेताओं को मनमानी करने से रोक लगाई और चुनाव में बूथ कैप्चरिंग जैसी शब्दावली को मिटा दिया।

बायपोलर डिसआर्डर में डोपामिन की कमी पूरा करते ही मूड और व्यवहार स्थिर होने लगता है। मष्तिष्क की झिल्ली में स्टेबिलाइज़र डोपामिन का भी इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मामलो में मिर्गी की दवाएं अच्छा परिणाम देती है। उन्माद रोकने लिए उत्तेजना रोकने वाली दवाएं भी दी जाती है। मरीज को अकेले न रहकर परिवार के बीच रहने कहा जाता है ताकि अधिक प्यार और देखभाल मिले। बायपोलर सिर्फ दवाओं से नहीं बल्कि लाइफ स्टाइल और सोच में बदलाव कर ही ठीक किया जा सकता है।

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