यूपीः दुष्कर्म पर पोस्टर की नकेल

सियाराम पांडेय ‘शांत’उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो स्क्वॉयड की समीक्षा के दौरान राज्य में ‘ऑपरेशन दुराचारी’ चलाने की बात कही है। इसके तहत महिलाओं और बच्चियों से दुष्कर्म और छेड़छाड़ करने वालों के पोस्टर चौक-चौराहों पर लगाए जाएंगे। पोस्टर में दुष्कर्मियों और मनचलों के मददगारों के नामों का भी खुलासा होगा। महिलाओं के लिए इससे अच्छी खबर भला और क्या हो सकती है? अगर यह अभियान अमल में आता है और इसका हश्र पुराने अभियानों जैसा नहीं होता है तो इससे न केवल महिलाओं और बच्चियों को राहत मिलेगी बल्कि मनचलों और दुराचारियों पर भी शिकंजा कसेगा। मुख्यमंत्री ने इस अभियान में चौकी इंचार्ज से लेकर सर्किल अफसर तक की जिम्मेदारी तय किये जाने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। छेड़छाड़ और दुष्कर्म के आरोपियों को महिला पुलिसकर्मी से दंडित कराने का भी मुख्यमंत्री ने विचार जाहिर किया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस विचार का स्वागत किया जाना चाहिए और भारत के सभी राज्य में, सभी जिलों, तहसीलों और थाना क्षेत्रों में इस तरह के अभियान चलाए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने इधर कई बड़ी घोषणाएं की हैं। एक तो उत्तर प्रदेश में देश की सबसे खूबसूरत फिल्म सिटी बनाने की, दूसरी उत्तर प्रदेश को औद्योगिक प्रदेश बनाने की। दोनों ही घोषणाओं का मतलब है कि इसके लिए उन्हें प्रदेश में पुलिस का खोया हुआ रसूख वापस लाना होगा।एंटी रोमियो स्क्वॉड की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने यह तो कहा है कि जिस तरह एंटी रोमियो स्क्वॉड ने बेहतरीन काम किया, मनचलों और महिलाओं के साथ अपराध करने वालों की कमर तोड़ी, वैसे ही हर जनपद की पुलिस यह अभियान चलाती रहे। उन्होंने लगे हाथ यह भी चेतावनी दी है कि कहीं भी महिलाओं के साथ कोई आपराधिक घटना हुई तो संबंधित बीट इंचार्ज, चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और सीओ जिम्मेदार होंगे। किसी भी जिम्मेदार मुख्यमंत्री को यही कहना चाहिए। शासन-प्रशासन प्रोत्साहन और कार्रवाई के भय के संतुलन से ही ठीक-ठाक चलता है। अन्यथा अराजकता अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच जाती है।उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉयड गठित करने का भाजपा ने चुनावी वायदा किया था और महिलाओं और बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों को जेल के सीखचों में डालने की बात कही। योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण के दिन ही सूबे में एंटी स्क्वॉयड सक्रिय हो गया था लेकिन जिस तेजी के साथ एंटी रोमियो स्क्वॉयड सक्रिय हुआ, उसी तेजी के साथ वह निष्क्रिय भी हो गया। आंकड़े गवाह हैं कि मार्च 2018 तक एंटी रोमियो स्क्वॉड ने 26 लाख 36 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की थी। गौरतलब है कि 2017 से 18 के बीच जब स्क्वॉड काफी सक्रिय था, यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले काफी बढ़ गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में 9,075 से 11,249 तक इजाफा हो गया। लोग पकड़े जाएंगे, उनपर केस दर्ज होंगे तो जाहिर है कि वह दिखेंगे लेकिन जब न तो जांच होगी और न ही पुलिस इस तरह के मामले दर्ज करेगी तो महिला विरोधी अपराध कम होंगे। इसे किसी भी सरकार की सफलता का मानक नहीं कहा जा सकता।22 मार्च 2017 से 15 मार्च 2020 तक यूपी के 10 जोन में कुल 79 लाख 42 लाख 124 लोगों की चेकिंग की। जिसमें 10, 831 लोगों की गिरफ्तारी हुई और 33 लाख 34 हजार 852 लोगों को चेतावनी जारी की गई। इससे पता चलता है कि एंटी रोमियो स्क्वॉयड कितना सक्रिय रहा और कितना निष्क्रिय। पुलिसिया आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में लूट, रेप, हत्‍या और डकैती जैसे अपराधों में 99 फीसदी गिरावट आई है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में हर दिन महिलाओं के खिलाफ औसतन 162 मामले दर्ज होते थे। यूपी पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 के पहले 6 महीने में यूपी में 19,761 आपराधिक मामले सामने आए थे। इनमें रेप के 1,224, शारीरिक शोषण के 4,883, छेड़छाड़ के 293 और घरेलू हिंसा के 6,991, हत्‍या के 1,088 और अपहरण के 5,282, मामले शामिल थे।अपराध को छिपाने और दबाने की नहीं, उसे उजागर और समाप्त करने की जरूरत है। अपराध हुआ क्यों, उसका कारण और मनोविज्ञान जानने की आवश्यकता है। छेड़खानी और दुष्कर्म के ज्यादातर मामले रसूखदारों से जुड़े होते हैं। प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कितनी कार्रवाई होती है, किस तरह की कार्रवाई होती है, यह किसी से छिपी नहीं है। अपराधियों से सांठगांठ भी उजागर होती रही है। पुलिस पर हमलों की घटनाएं भी बढ़ी हैं। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। जिस देश-प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं होतीं, वह देश-प्रदेश तरक्की के मार्ग पर अग्रसर नहीं हो पाता।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर जब पहली बार तिरंगा फहराया था तो उन्होंने हर-माता पिता से अपने बेटों पर ध्यान देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सिर्फ बेटियों से ही मत पूछो कि वे कहां गई थीं, बेटों को भी नियंत्रित करो। इसपर कितना अमल हुआ, यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन दुराचार और छेड़छाड़ सामाजिक समस्या है। समाज के लोग जबतक रोक-टोक करना नहीं सीखेंगे तबतक अकेले पुलिस इस समस्या का समाधान नहीं कर सकती। चौक-चौराहों पर पोस्टर लगाना अच्छा उपाय है लेकिन इसकी अहमियत तभी है जब लोग ऐसे अनैतिक चरित्र के व्यक्तियों से हर तरह के रिश्ते तोड़ लें। स्कूल उनके बच्चों को प्रवेश न दें। दुकानदार उन्हें सामान न दें। लोग उन्हें सम्मान न दें। रहीम ने लिखा था कि भारी मार बड़ेन की चित से देहु उतार लेकिन अब आदमी की नजरों से शर्मो-हया का पानी उतर गया है। पहले जेल जाना शर्म की बात थी। अब जेल जाने वालों का स्वागत होता है। जबतक इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगेगी तबतक केवल पोस्टर लगा देने भर से बात नहीं बनेगी।पोस्टर लगाने से पहले पुलिस को इस बात की तहकीकात भी करनी होगी कि आरोपों में कितना दम है। अपने प्रतिद्वंद्वी को नीचा दिखाने के लिए भी कुछ लोग षड्यंत्र कर सकते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर विवेचनाधिकारियों को। चौराहों पर पोस्टर लगाने का विचार बुरा नहीं है लेकिन उसकर उचित ढंग से अनुपालन होना चाहिए और इसमें पूरी पारदर्शिता और नीर-क्षीर विवेक होना चाहिए तभी बात बन पाएगी। कुछ मानवाधिकारवादियों को इस पर ऐतराज भी हो सकता है लेकिन दुष्टों का साथ सभी के लिए कष्टकारी होता है। चाणक्य ने लिखा था कि दुष्ट और कांटे की प्रवृत्ति एक जैसी होती है, इनसे निपटने के दो ही मार्ग हैं। या तो इनका मुंह तोड़ दिया जाए या इनसे बचकर निकल लिया जाए। वैसे भी केवल पोस्टर लगाने से ही काम नहीं चलेगा, ऐसे लोगों को अविलंब सजा भी होनी चाहिए।

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