कल मांझी थामेंगे एनडीए का दामन, एनडीए में दस सीटों पर बनी बात

 कहा, बिहार में फिर एनडीए सरकार के लिए लगाएंगे एड़ी-चोटी का जोर

साथ ही किया दावा, बिना शर्त हो रहे एनडीए में शामिल      

पटना :  पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम)  3 सितंबर को एनडीए में शामिल हो जाएगी। सूत्र बताते हैं कि जीतनराम  मांझी को राज्यसभा भेजा जा सकता है। राज्यसभा में बिहार की सीट खाली होते ही मांझी को जदयू कोटे से टिकट मिल सकता है। बिहार विधानसभा की सीट शेयरिंग के समय ‘हम’ को 10 सीट देने पर बात बन गई है।

हम के कुछ नेता जदयू के सिंबल पर भी चुनाव लड़ सकते हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले यह महागठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले महीने ही हम ने महागठबंधन का साथ छोड़ा था। जीतनराम मांझी ने बुधवार को एनडीए में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मांझी ने कहा कि बिना शर्त एक पार्टनर के रूप में एनडीए में वह शामिल होंगे। हमारी पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) का जदयू में विलय नहीं होगा। हम एनडीए के सहयोगी दल के रूप में काम करेंगे। हमारी कोई शर्त नहीं है। सीट बंटवारा हो या कोई और बात, सभी पर समझौते के हिसाब से काम होगा।

मांझी ने कहा कि मेरे बेटे को एमएलसी बनाकर राजद ने कोई अहसान नहीं किया। राजद ने अपने फायदे के लिए यह किया था। राजद में भाई-भतीजावाद और करप्शन है। मैंने को-ऑर्डिनेशन कमेटी के लिए काफी समय तक आवाज उठाई। राजद और कांग्रेस को काफी समय दिया, लेकिन ये लोग को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने के पक्ष में नहीं थे, जिस वजह से हमारी दूरी बढ़ गई। उन्होंने कहा कि  बिहार में एनडीए की फिर से सरकार बने  इसके लिए वे एड़ी- चोटी का जोर लगाएंगे।

महागठबंधन में राजद के  एकतरफा फैसला लेने से सहयोगी दलों में नाराजगी थी, जिसका नतीजा 20 अगस्त को हम के महागठबंधन छोड़ने के रूप में सामने आया। हम के नेता जीतनराम मांझी ने महागठबंधन में संयुक्त रूप से फैसला लेने के लिए को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग की थी। उन्होंने कई बार अल्टीमेटम दिया, लेकिन इस पर पहल नहीं हुई, जिसके चलते वे  महागठबंधन से अलग हो गए। राजद ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। महागठबंधन के दूसरे दलों को यह एकतरफा फैसला ठीक नहीं लगा। राजद के 7 विधायक और 5 विधान पार्षद अभी तक जदयू में शामिल हो चुके हैं। जदयू के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने राजद में घर वापसी की थी।

नीतीश के इस्तीफे के बाद सीएम बने थे मांझी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए मई 2014 में  सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। नीतीश ने अपनी जगह अपनी कैबिनेट में मंत्री रहे जीतनराम मांझी को सीएम बनाया था। मुख्यमंत्री बनने के 10 महीने बाद नीतीश कुमार ने उनसे पद छोड़ने के लिए कहा तो मांझी ने मना कर दिया था। उन्होंने नीतीश पर आरोप लगाया था कि वह उन्हें रबर  स्टैंप सीएम बनाना चाहते हैं। इस पर नीतीश ने उनको पार्टी से निष्कासित कर दिया था। 20 फरवरी 2015 को बहुमत साबित न कर पाने के कारण मांझी ने इस्तीफा दे दिया था।

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