विचारधारा के चक्रव्यूह में फंसी महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार

मुंबई : अयोध्या में 5 अग्रस्त को होने वाले राममंदिर भूमिपूजन समारोह को लेकर महाराष्ट्र की शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन की सरकार विचारधारा के चक्रव्यूह में फंस गई है। एक ओर अयोध्या आने का न्योता न मिलने की वजह से शिवसेना छटपटा रही है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी कांग्रेस और एनसीपी के नेता मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अयोध्या न जाने के लिए दबाव बना रहे है। इस पूरी उठा-पटक में गठबंधन को विचारधारा की दरारें पड़ती दिख रही हैं।
अयोध्या में राम जन्मभूमि में 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। इससे पहले ही रामजन्भूमि परिसर में पूजन उत्सव की शुरुआत होगी। राम जन्मभूमि में रामलला के मंदिर आधारशिला कार्यक्रम की शुरुआत 3 अगस्त को गणपति पूजन से शुरू होगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं। लेकिन उन्हें अब तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक न्योता नहीं मिला है। नतीजनत शिवसेना प्रताप सरनाईकने तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को चिठ्ठी लिखकर उद्धव ठाकरे को अयोध्या बुलाने की मांग की है। वहीं महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल कांग्रेस और एनसीपी ने ठाकरे पर अयोध्या न जाने के लिए दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया है।इस मामले में कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने कहा कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने का न्योता न देना अपने आपमें अपमान है। अयोध्या में मंदिर बन जाने से देश में दंगे खत्म नहीं होंगे। कोरोना महामारी के चलते अयोध्या में शारीरिक दूरी का पालन नहीं होगा। मंदिर बन जाने से देश में रामराज्य स्थापित नहीं होगा।दलवाई ने इशारों-इशारों में अपनी भावनाए व्यक्त कर उद्धव को अयोध्या न जाने की सलाह दी है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख बालासाहब थोरात ने भी अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले आयोजन पर कटाक्ष किया है। थोरात ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी से निपटने में केन्द्र सरकार नाकाम रही। इसी नाकामी को छिपाने के लिए भूमिपूजन समारोह का आयोजन किया गया है। एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने अयोध्या में आयोजित भूमिपूजन समारोह को लेकर पहले ही अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। वहीं एनसीपी के नेता एड. माजिद मेमन ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे को सलाह दी है कि यदि ठाकरे अयोध्या जाते हैं तो महाराष्ट्र सरकार की सेक्युलर छबि खराब हो जाएगी। 
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शिवसेना नेता संजय राऊत ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ते हुए ठाकरे की अयोध्या यात्रा को ले कर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का न्यूनतम साझा कार्यक्रम और ठाकरे की अयोध्या यात्रा दोनों अलग-अलग हैं। अयोध्या जाने को लेकर शिवसेना के मन में कोई दुविधा नहीं है। उद्धव की अयोध्या यात्रा से महाविकास गठबंधन का एजेंडा प्रभावित नहीं होगा। नतीजतन मुख्यमंत्री हरहाल में अयोध्या जाएंगे।एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने श्रीराम मंदिर आधारशिला समारोह को लेकर दिए बयान में कहा कि इसकी वजह से उनकी आलोचना हो रही है। लेकिन राऊत इस मामले में शरद पवार का बचाव करते नजर आए। राऊत ने कहा कि पवार ने मंदिर या भगवान राम को लेकर कोई अनुचित बात नहीं कही है। वहीं कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों को राऊत ने कोई तवज्जो नहीं दी। राऊत ने स्पष्ट शब्दो में कहा कि किसी को भले ही आपत्ति हो लेकिन उद्धव ठाकरे हरहाल में अयोध्या जाएंगे।

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