केंद्र सरकार ने ट्रेनों को ही बेचने का फैसला ले लिया है, खुलेआम ट्रेनों के लिए बोली लगाई जा रही है: डी.के. पान्डेय।

धनबाद : ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन ने  रेलवे के निजीकरण के खिलाफ़ पूरे भारत में 9 अगस्त को एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
 इस बात की  जानकारी देते हुए ईसीआरकेयू के अपर महामंत्री डी के पांडेय ने कहा कि आल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने पिछले दिनों हुई कर्मचारी संगोष्ठी में सरकार के उक्त निर्णय का कठोर शब्दों में विरोध किया है । 
 पांडेय ने कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह मजदूर विरोधी है । कभी कर्मचारियों की सुविधाओ में कटौती की जाती है तो कभी रेल में स्वीकृत पदों को खत्म करने का फरमान सुना दिया जाता है । अब तो केंद्र सरकार ने ट्रेनों को ही बेचने का फैसला ले लिया है । खुलेआम ट्रेनों के लिए बोली लगाई जा रही है ।
 यूनियन का साफ मानना है कि कोई भी उद्योगपति ट्रेन का संचालन सेवा भाव के लिए नहीं  करने वाला है, वो यहां मुनाफ़ा कमाने ही आएगा। सरकार का कारपोरेट की ट्रेनों पर किराया निर्धारण करने या मनमानी वसूली को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं होगा। ऐसे में कारपोरेट पूरी तरह मनमानी करेंगे और देश की जनता को लूटेंगे ।
 हैरानी इस बात की है कि सरकार ये जानते हुए कॉरपोरेट के साथ सौदा करने पर उतारू है । मौजूदा हालात में फेडरेशन और इसकी अनुषंगी जोनल यूनियन चुप रहने वाले नहीं  हैं । 
ईसीआरकेयू पहले भी जन जागरण अभियान चला चुका है और अब फिर फेडरेशन के आह्वान पर 9 अगस्त को देश भर में “रेल बचाओ देश बचाओ” आंदोलन किया जाएगा । जिसका पालन ईसीआरकेयू की सभी शाखाएं करेंगी और रेल कर्मचारियों समेत आम जनता तक इस ठेकाकरण के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी । 
मौके पर डी. के. पांडेय, के. दा, एन. के. खवास, टी. के. साहू, ए. के. दास, राजेंद्र कुशवाहा, आरके सिंह, बिश्वजीत मुखर्जी, संजय सिंह, तपन विस्वास, राजू चौबे, सुबोध कुमार सिंह, आर. के. लकड़ा आदि शामिल थें।  

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