कोरोना महामारी के बीच सोमवती अमावस्या की मची धूम

– ग्रामीण इलाकों में नदी और प्राचीन तालाबों में श्रद्धालुओं ने किया स्नान
– शिवालयों में भी सामाजिक दूरी के बीच लोगों ने भोले नाथ किया जलाभिषेक

हमीरपुर : जनपद में सोमवती अमावस्या को लेकर ग्रामीण इलाकों में इसकी धूम मची हुई है। हालांकि कोरोना महामारी के कारण नगर और कस्बों में लोग सामाजिक दूरी के बीच शिव मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे हैं। ऐतिहासिक पतालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं में सामाजिक दूरी का पालन कराने में पुलिस बल मुस्तैद है। 
हमीरपुर में यमुना नदी में लोगों ने खराब मौसम के बावजूद स्नान कर पतालेश्वर मंदिर में भोले नाथ का जलाभिषेक किया। यहां मंदिर के अंदर और बाहर कोरोना महामारी को लेकर सामाजिक दूरी का पालन पुलिस कराने के लिये मुस्तैद रही। अभी तक इस मंदिर में सैकड़ों लोग पूजा अर्चना कर चुके हैं वहीं नगर के अन्य शिवालयों में भी पूजा अर्चना का दौर जारी है। जनपद के सिमनौड़ी गांव में एतिहासिक मनेश्वर बाबा मंदिर में भी गांव के लोग एक निश्चित दूरी में भोले नाथ के शिवलिंग का जलाभिषेक करते देखे गये।
इस मंदिर के बाहर भी महिला और पुरुष सिपाही भीड़ को नियंत्रित करने के लिये ड्यूटी पर मुस्तैद रहे। नगर, कस्बे और ग्रामीण इलाकों में भी श्रद्धालुओं ने नदी और प्राचीन तालाब में स्नान कर शिवमंदिरों में पूजा अर्चना कर बेल पत्र शिवलिंग में बेल पत्र चढ़ाये है। सरीला में एतिहासिक शल्लेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजन अर्चन किया है। यहां कांवडियों ने भी मंदिर आकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया है। 
यहां के पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि सोमवती अमावस्या का बड़ा महत्व है। आज के दिन पवित्र नदी या तालाब में स्नान कर भगवान भोले नाथ के शिव लिंग का जलाभिषेक करना चाहिये। उन्हेें बेल पत्र श्रद्धा भाव से अर्पित करने से सारे कष्ट दूर हो जाते है। सावन के सोमवार के दिन अमावस्या पर श्रद्धालुओं को कोरोना काल में सामाजिक दूरी के बीच विशेष पूजा और अनुष्ठान करना चाहिये। 
कंटेनमेंट जोन घोषित होने से संग महेश्वर मंदिर में पसरा सन्नाटाहमीरपुर से जुड़े मेरापुर गांव के पास यमुना नदी किनारे स्थित संगमहेश्वर मंदिर में कोरोना वायरस के कारण सन्नाटा पसरा रहा। मेरापुर गांव में कोरोना से संक्रमित एक कर्मचारी के मिलने के बाद इस इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित करते हुये सील कर दिया गया है जिससे श्रद्धालुओं मंदिर नहीं पहुंच सके। बताते है कि ये मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है। जहां सावन के पिछले सोमवार को पूजा अर्चना के लिये लोगों की भारी भीड़ जुटी थी। मगर आज कोरोना महामारी के कारण मंदिर और मेरापुर गांव में सन्नाटा पसरा है। 

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