एसकेएमयू कुलपति प्रो सिन्हा ने अपने सेवाकाल में कई ऐतिहासिक अध्याय जोड़े

दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा के कार्यकाल शनिवार को पूरे हो गये। कुलपति प्रो सिन्हा के तीन वर्ष के कार्यकाल के इतिहास में कई मामलों में ऐतिहासिक माना जाएगा।

कुलपति के रूप में योगदान करने के बाद उन्होंने पहला कार्य अमर शहीद सिदो कान्हू जिनके नाम से विश्वविद्यालय बना है, उनको उचित सम्मान प्रदान करते हुए मुख्यालय परिसर में लगी उनकी मूर्ति को शहीद टीले के रूप में विकसित कर सौंदर्यीकरण किया।
 

वर्तमान में शहीद टीला एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है और दूर-दूर से लोग उसे देखने आते हैं।संताल परगना की धरती से उत्पन्न अंग्रेंजो के खिलाफ पहले विद्रोह संताल हूल के महत्व को कुलपति प्रो सिन्हा ने राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में लगातार हूल दिवस समरोहपूर्वक मनाया गया। जिसमें राज्यपाल की भी गरिमामई उपस्थिति रही। 
इस अवसर पर हूल के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूरे विश्वविद्यालय में हूल पर निबंध, पोस्टर, पेंटिंग, भाषण आदि प्रतियोगिता आयोजित की जाती रही।

हूल दिवस के पूर्व संध्या पर शहर में मशाल जुलूस निकाल कर हूल के संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया। कुलपति प्रो सिन्हा के प्रयासों से विश्वविद्यालय ने हूल पर अंर्तराष्ट्रीय स्तर की दो पुस्तकें भी प्रकाशित की। जिसका विमोचन राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने की।कुलपति प्रो सिन्हा की सबसे बड़ी उपलब्धि सत्र को नियमित करने की रही है।

प्रो सिन्हा ने जब पद भार ग्रहण किया था तो विश्वविद्यालय का सत्र तीन साल पीछे चल रहा था। लेकिन अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष में ही सत्र नियमित करने के सकारात्मक परिणाम सामने आया और छात्रों का पलायन रोकने में सफल रहते हुए ग्रोस एनरोलमेंट में काफ़ी वृद्धि हुई।

प्रो सिन्हा के कार्यकाल को इसलिए भी ऐतिहासिक माना जाएगा कि उन्होंने विश्वविद्यालय को अपना दो प्रशासनिक भवन और एक अकडेमिक भवन दिया। इससे पूर्व पीजी विभागों के क्लास टीचर क्वॉर्टर में चल रहे थे। प्रो सिन्हा ने न सिर्फ़ सभी विभागों को अकादमिक ब्लाक में शिफ़्ट किया। बल्कि विभागों को वातानुकूलित क्लास रूम भी दिए जो स्मार्ट बोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक पोडीयम से सुसज्जित हैं।

प्रो सिन्हा की एक और बड़ी उपलब्धि यहां विज्ञान की प्रयोगशालाए है। उपकरणो और यंत्रो के अभाव में यहां विज्ञान के छात्रों को काफी मुश्किल हुआ करती थी। लेकिन आज विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाएं राष्ट्रीय स्तर की हैं।छात्रों की सुविधा के लिए प्रो सिन्हा के कार्यकाल में बस सेवा, बैंक, एटीएम, जिम, स्वस्थ केंद्र, पुलिस पिकेट, कैंटिन की भी शुरुआत करवाया।

विश्वविद्यालय में पहली बार युवा महोत्सव का आयोजन की शुरुआत की गई। चांसलर लेक्चर के तहत देश और दुनिया के कई जाने माने हस्तियों का व्याख्यान विश्वविद्यालय में करवाया गया। इनके अतिरिक्त विभिन्न अवसरों पर संगोष्ठी, प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती रही।प्रो सिन्हा के कार्यकाल की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही की छात्रों, शिक्षकों या कर्मचारियों का कोई बड़ा आंदोलन इनके कार्यकाल में नहीं हुआ। यहां तक कि सीनेट की बैठक जो आम तौर पर हंगामेदार होती थी वह भी शांतिपूर्ण सम्पन्न हुई।

इसके पीछे प्रो सिन्हा की ओपन डोर पॉलिसी रही। छात्रों और शिक्षकों से वो सीधा संवाद करते रहे। वर्ष 1996 में नियुक्त शिक्षकों के वर्षों से लंबित प्रमोशन के कार्य कर उन्होंने शिक्षकों का विश्वास जीत लिया। प्रो सिन्हा कोरोना काल में भी आनलाईन क्लास जारी रख कर सत्र को नियमित रखने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए उन्होंने नहीं सिर्फ शिक्षकों को ट्रेनिंग प्रदान करवाई बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी किया। विश्वविद्यालय में पूर्व से ही ऑनलाइन फॉर्म भाड़ा जाना और नामांकन होता रहा है। विश्वविद्यालय में सौ कम्प्यूटर का क्लास रूम बना हुआ है। जहां छात्रों को कम्प्यूटर की शिक्षा दी जाती है।

 यहां बता दें कि लॉक डाउन में कुलपति प्रो सिन्हा का कार्यकाल पूरा होने और डेढ़ माह से अधिक लॉक डाउन की अवधी गुजरने के कारण विश्वविद्यालय में कार्यो के निष्पादन का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। 
वहीं लॉक डाउन में कार्यकाल पूरा होने पर अधूरे कार्यो को संपादित करने को लेकर राजभवन से एसकेएमयू के कुलपति सहित राज्य तीन विश्वविद्यालय के कुलपतियों का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद भी दो माह का अतिरिक्त सेवा अवधी में विस्तार किया गया है।  

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