महागठबंधन में राजद सबसे बड़ी पार्टी, तेजस्वी ही विपक्ष के नेताः शरद यादव

पटना। पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से इनकार किया। बुधवार को उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में हम कोई चेहरा नहीं हैं। बिहार में सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) है और तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता हैं। शरद यादव के इस बयान के बाद महागठबंधन की तरफ से अब तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी साफ दिखने लगी है। हालांकि कांग्रेस ने अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है।

शरद यादव ने तीसरे मोर्चे की संभावना से साफ इनकार करते हुए कहा कि हमारा पूरा प्रयास है कि बिहार में विपक्ष एकजुट हो, तभी ये लड़ाई जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकजुटता को लेकर लालू प्रसाद यादव से भी हमारी बात हुई है और जल्द ही इसका भी हल निकल जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कई लोग मुझे मुख्यमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं लेकिन एक बात साफ कर देता हूं कि दिल्ली ही मेरी राजनीति का दायरा है और मैं उसी में रहना पसंद करता हूं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पिछले दिनों महागठबंधन को ये प्रस्ताव दिया था कि समाजवादी नेता शरद यादव को इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के चेहरे के रूप में पेश किया जाना चाहिए। उसके बाद जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा, शरद यादव और मुकेश सहनी की पटना के एक होटल में बैठक भी की थी, लेकिन इसकी जानकारी राजद और कांग्रेस को नहीं दी गई। नतीजा हुआ कि राजद और कांग्रेस बैठक से दूर रहे थे। बैठक के बाद जीतन राम मांझी ने स्पष्ट कहा था कि गठबंधन में अगर सब मिलकर चुनाव नहीं लड़े तो दिल्ली जैसी हालत हो जाएगी।  

तेजस्वी को लेकर महागठबंधन की अब तक सहमति नहीं

महागठबंधन के दूसरे दलों ने अब तक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर सहमति नहीं जताई है। कांग्रेस इस मामले पर कुछ भी खुल कर नहीं बोल रही है। उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुप्पी साध रखी है। कुशवाहा और मांझी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में तेजस्वी पसंद नहीं हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने शरद यादव का नाम आगे बढ़ाया था। लोकसभा चुनाव के दौरान जीतनराम मांझी यह कहते थे कि महागठबंधन में एक ही चेहरा हैं और वह हैं तेजस्वी यादव। लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद मांझी के बोल बदल गये। अब वे तेजस्वी के नेतृत्व पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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