मई महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7 महीने के उच्चतम स्तर 3.05 प्रतिशत पर पहुंची

नई दिल्ली। इस साल मई महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर सात महीने के उच्चतम स्तर 3.05 प्रतिशत पर पहुंच गयी। हालांकि यह अब भी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के दायरे में है जिससे रिजर्व बैंक के पास मांग में तेजी लाने और औद्योगिक उत्पादन को गति देने में मदद के लिए नीतिगत ब्याज दर में और कटौती करने की गुंजाइश बरकार है। औद्योगिक उत्पादन वृद्धि इस साल अप्रैल में 3.40 प्रतिशत रही। यह औद्योगिक वृद्धि का छह माह का उच्चतम स्तर है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को ये आंकड़े जारी किये। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी का मुख्य कारण सब्जियों, मांस तथा मछली की कीमतों का बढ़ना है। यह अप्रैल के 2.99 प्रतिशत की तुलना में अधिक है लेकिन मई 2018 के 4.87 प्रतिशत से कम है। इससे पहले खुदरा मुद्रास्फीति का उच्चतम स्तर अक्टूबर 2018 में था और तब यह 3.38 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति मई 2018 के 1.10 प्रतिशत की तुलना में मई 2019 में 1.83 प्रतिशत रही। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में अप्रैल महीने में कमी देखने को मिली लेकिन खनन एवं बिजली उत्पादन क्षेत्रों में सुधार के दम पर यह अभी भी छह महीने के उच्चतम स्तर पर है। आईआईपी के आधार पर पिछले साल अप्रैल महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 4.5 प्रतिशत थी। इससे पहले, अक्टूबर 2018 में औद्योगिक वृद्धि दर सर्वाधिक 8.4 प्रतिशत थी। खनन क्षेत्र में वृद्धि आलोच्य महीने में 5.1 प्रतिशत रही जो पिछले वर्ष 2018 के इसी महीने में 3.8 प्रतिशत थी। इसी प्रकार, बिजली क्षेत्र में वृद्धि अप्रैल महीने में 6 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व वर्ष के इसी महीने में 2.1 प्रतिशत थी। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र में नरमी रही। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) आंकड़ो के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि अप्रैल में घटकर 2.8 प्रतिशत रही जो पिछले साल इसी अवधि में 4.9 प्रतिशत थी। पूंजीगत वस्तु खंड में वृद्धि अप्रैल में घट कर 2.5 प्रतिशत रही जो पिछले वर्षइसी महीने में 9.8 प्रतिशत थी। पूंजीगत वस्तु खंड में वृद्धि निवेश गतिविधियों का आइना माना जाता है। इसी प्रकार बुनियादी ढांचा / निर्माण सामग्री, टिकाऊ उपभोक्ता सामान तथा गैर-टिकाऊ उपभोक्ता माल बनाने वाले उद्योग वर्गों में वृद्धि आलोच्य महीने में धीमी रही। हालांकि, प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन में इस साल अप्रैल में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 2.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। रिजर्व बैंक ने लगातार तीन बार रेपो दर को 0.25-0.25 प्रतिशत घटाया है। उसने नीतिगत रुख को भी तटस्थ से बदलकर नरम कर दिया है। सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से नीचे रखने का लक्ष्य दिया है। मई महीने में भी खुदरा मुद्रास्फीति इसी दायरे में रहने के कारण उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक अगली नीतिगत बैठक में भी रेपो दर कम कर सकता है।

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