लास वेगास जैसा रंगीला शहर है एशिया का मकाऊ

अमेरिका के लास वेगास शहर के बारे में आपने जरूर सुना होगा। इस रंगीले शहर से मिलता-जुलता एक शहर एशिया में भी है। वह है चीन व हांगकांग के निकट मौजूद मकाऊ। जिन्होंने लास वेगास नहीं देखा, पर भारत का ओल्ड गोवा देखा है, वे इस शहर की कल्पना आसानी से कर सकते हैं। मकाऊ हमारे सामने वेनिस और ओल्ड गोवा की मिली-जुली तसवीर सजा देता है। हांगकांग दुनिया भर में लोकप्रिय पर्यटन स्थल और प्रसिद्ध बिजनेस सेंटर के रूप में जाना जाता है। ट्रांसपोर्टेशन के लिए अच्छी सुविधाएं और दिलकश जगहें इसे पर्यटकों का चहेता शहर बनाती हैं। हांगकांग जाने वाले अधिकतर पर्यटक यहां से कुछ ही दूरी पर बसे लुभावने मकाऊ की सैर पर जरूर जाते हैं।

जुड़े हुए द्वीप:- मकाऊ शहर तीन हिस्सों में बंटा है-मकाऊ, तायपा और कोलन। ये तीनों द्वीप वैसे तो अलग-अलग हैं, पर दर्जनों सुंदर पुलों के जरिये एक-दूसरे से जुड़े हैं। मूलतः मकाऊ चीन की मुख्य भूमि से जुड़ा है। पुल पार कर चीन में प्रवेश किया जा सकता है। हालांकि मकाऊ से चीन और चीन से मकाऊ आने-जाने के लिए परवाने की जरूरत पड़ती है। यहां बोलचाल की भाषा कैंटुनिज है। अंग्रेजी यहां बहुत कम लोग ही जानते हैं। इस खूबसूरत शहर को करीब से देखना और इसकी संस्कृति को जानना खास अनुभव है। द्वीपों की तरह संस्कृति भी मिली-जुली है। यहां लंबे समय तक पुर्तगीज शासकों का राज रहा है। इसीलिए यहां कैथोलिक्स खूब हैं। हालांकि अब धीरे-धीरे मकाऊ यूरोपियन संस्कृति में रंगता जा रहा है।

पहले बसे पुर्तगीज:- मकाऊ शहर का इतिहास सोलहवीं शताब्दी से शुरू होता है। तब मकाऊ सिर्फ एक बंदरगाह था और केवल फिशिंग के लिए ही जाना जाता था। पर्ल नदी में बसे इस द्वीप की खोज जॉर्ज अल्वारिस ने की। जब अंग्रेजों ने हांगकांग का विकास किया तो मकाऊ कमर्शियल बंदरगाह के रूप में विकसित होने लगा। इसके बाद इस पर पुर्तगीज योद्धाओं ने आक्रमण किया। बाद में वे यहीं बस गए। उन दिनों रोम भेजा जाने वाला रेशम यहीं से समुद्री मार्ग के जरिये जाता था। दिसंबर 1999 में यह बंदरगाह पूरी तरह चीन के पास चला गया और चीन के विशिष्ट प्रशासित क्षेत्र में बदल गया।

मकाऊ का वास्तविक विकास इसके बाद ही शुरू हुआ। आर्थिक, भौतिक और सामाजिक हर दृष्टि से मकाऊ का विकास अब पूरी दुनिया के लिए अजूबा बन चुका है। अब तो यहां चारों तरफ फैले वैभव से आंखें चुंधिया जाती हैं। ऊंची इमारतें, पश्चिमी संस्कृति में रचे-बसे लोग, आलीशान मॉल, सात सितारा होटल, हर तरफ तेज रफ्तार से दौड़ती कारें समृद्धि की दास्तां बयान करती हैं। मकाऊ और हांगकांग को रात में देखें तो लगता है, जैसे किसी स्वप्नलोक में आ गए हों। पूरा मकाऊ निऑन और लेजर की किरणों से जगमगाता है।

अब मकाऊ सिर्फबिजनेस सेंटर ही नहीं, बल्कि सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक शहरों में शामिल है। पर्यटन की दृष्टि से इसका काफी तेजी से विकास हुआ है। सफाई, जनसुविधाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य का खयाल मकाऊ ने अच्छी तरह रखा है। बसें और सड़कें यहां बेहद साफ-सुथरी हैं। किसी भी तरह की गंदगी फैलाने पर यहां एक हजार मकाऊ डॉलर्स का जुर्माना भरना पड़ता है। इसलिए ऐसे किसी कार्य से यहां सभी बचते हैं।

यहां सबसे प्रसिद्ध तो कैसिनोज हैं, पर शहर के भीतर अगर देखने लायक जगहों की बात करें तो चीनी लोकदेवी मां मंदिर, पुर्तगीज चर्च, सागरी किले और मकाऊ टॉवर प्रमुख हैं। यहां के टॉवर की 60वीं मंजिल से कुछ स्थानीय प्रशिक्षित लोग सीधे नीचे कूद जाते हैं। इसके लिए उन्हें लोगों से बख्शीश मिलती है।

पहचान हैं कैसिनो:- लास वेगास और वेनिस से काफी हद तक समानता रखने वाले मकाऊकी अब पहचान ही बन चुका है गैंब्लिंग। जिन लोगों की गैंब्लिंग में बिलकुल दिलचस्पी नहीं है, वे भी यहां आकर एक बार किस्मत आजमाना चाहते हैं। कहा जाता है कि जबसे मकाऊ में वेनेशियन रिसॉर्ट बना, कैसिनो के लिए लास वेगास जाने वाले जाने वालों की संख्या घट रही है। यहां का कैसिनो अब दुनिया का सबसे विशाल कैसिनो बन चुका है। अब यह दुनिया भर के पर्यटकों में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां स्लॉट मशीनें 6 हजार से अधिक हैं, जबकि गेमिंग मशीनों की संख्या 800 है। यहां के कैसिनोज में क्लाएंट्स जब गैंब्लिंग करते हैं तो उनकी सेवा के लिए वहां का लोकल रिसॉर्ट स्टाफ 24 घंटे तैनात रहता है। ये कैसिनो 24 घंटे- 365 दिन चलते रहते हैं।

इसके अलावा सैंड्स में भी पर्यटकों की संख्या खास तौर पर कैसिनो के आकर्षण से ही बढ़ रही है। लास वेगास सैंड्स कॉर्पोरेशन का यह होटल मुख्यतः वहां के कैसिनोज के लिए ही मशहूर है। जुआरियों का गढ़ कहे जाने वाले लास वेगास शहर में शेल्डन एडल्सन के कई कैसिनोज हैं।

वेनिस के नाम पर रिसॉर्ट:- मकाऊ का वेनेशियन रिसॉर्ट नवविवाहित दंपतियों के लिए बेहद रोमांटिक स्थान है। पूरे 1 करोड़ पांच लाख वर्गफुट में बने इस रिसॉर्ट में सात सितारा सुविधाओं से लैस तीन हजार लग्जरियस सुइट्स हैं। इस रिसॉर्ट में 108 कॉन्फ्रेंस हॉल हैं, जो बतौर बिजनेस सेंटर मकाऊ की अहमियत दर्शाते हैं। रिसॉर्ट की हर चीज में एस्थेटिक वैल्यू जुड़ी है। चीनी और इटैलियन आर्किटेक्चर का खासा उपयोग यहां दिखता है। रोम का वेनिस यहां हर चप्पे पर नजर आता है। यहां अभ्यागतों का स्वागत करती है लेजी रिवर। रिसॉर्ट के चारों तरफ बनाई गई इस कृत्रिम नदी में गंडोला (छोटी नाव) चलाते हैं इटैलियन गंडोलियर। गंडोला चलाते-चलाते वे अपने खास अंदाज में इटैलियन भाषा में सुमधुर आलाप लेते हैं और गंडोला में बैठे पर्यटकों का सफर और भी रोमांटिक बनाते हैं। इसी लेजी रिवर में बना यूरोपियन टॉवर हमेशा पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार रहता है। टॉवर में मल्टीप्लेक्स के स्क्रीन की तरह एलसीडी स्क्रीन 24 घंटे वेनेशियन इवेंट की झलक दिखाते रहते हैं।

भीतर इमारतों की छतें कई तरह की आकर्षक चित्रकारी से सजी हैं। जगह-जगह रखे संतरों के फलों से लदे मेटल के बड़े-बड़े गमले बरबस ध्यान खींचते हैं। नक्काशी के काम से सजी छतें, जगमगाते शैंडेलियर्स और एक मंद सी अरोमा खुशबू ऐसा आभास देती है जैसे हम किसी दूसरी दुनिया में आ गए हों। छतों पर कारीगरी के लिए 24 कैरट का 1 टन सोना इस्तेमाल किया गया है। दूसरी मंजिल पर बना थीम मॉल द ग्रैंड कैनल शॉपिज एक और अजूबा है। रेप्लिका ऑफ वेनिस की तर्ज पर बने मॉल के बीचोंबीच है एक कैनल। कैनल के दोनों तरफदुनिया के सर्वश्रेष्ठ ब्रैंड्स की 350 बड़ी दुकानें हैं। इस कैनल में गंडोला राइड के दौरान यहां नजर आता है तारों से भरा नीला आकाश। गंडोलियर ही बताता है कि यह आकाश कोई सचमुच का नहीं, बल्कि कृत्रिम है। इसके विशाल स्टेडियम में 15 हजार दर्शक एक साथ बैठ कर कार्यक्रम का लुत्फले सकते हैं। यहां का इंडोर स्टेडियम रिमूवेबल फ्लोर से बनाया गया है।

खरीदारी कहां करें:- वेनेशियन मकाऊ रिसॉर्ट के भीतर बने ग्रेंड कैनल शॉपिंग सेंटर में सारे ब्रैंडेड परिधानों तथा अन्य वस्तुओं की दुकानें हैं। जो पर्यटक खास कर स्थानीय बाजार देखना चाहते हैं, उनके लिए मकाऊ के डाउन टाउन मार्केट में काफी सस्ता बाजार है, जिसे सनमालो मार्केट कहते हैं। यहां मोलभाव का मौका भी होता है। इसीलिए स्त्रियां यहां घंटों शॉपिंग कर लेदर के सामान, कपड़े, बैग्स, पर्स व कॉस्मेटिक्स खरीदती हैं।

खानपान:- चीन में अधिकतम लोग नॉन-वेजिटेरियन फूड खाने वाले हैं। इसलिए लंबे अरसे तक यहां शाकाहारी खाना मिलना बड़ा मुश्किल था, पर बढ़ते भारतीय शाकाहारी पर्यटकों से पास्ता, आलू जैसे चीजें आसानी से मिलती हैं। इसके अलावा तायपा में भी ताजमहल नामक काफी बढ़िया भारतीय खाना उपलब्ध कराने वाला रेस्टोरेंट है, जिसमें तंदूरी रोटी से लेकर राजमा चावल और अरहर दाल से लेकर काली दाल तक सभी भारतीय व्यंजन मिल जाते हैं। इक्कीसवीं सदी के इस नये यूरोप से पर्यटक जिंदगी भर मिलने वाली खुशियां समेट कर निकलता है और स्वतः स्फूर्त ढंग से कह देता है.. हो.आय लाय.मकाऊ. यानि कि हे मकाऊ मुझे तुमसे प्यार हो गया है।

जरूरी जानकारियां..

कैसे पहुंचें:- हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उतर कर मकाऊ जा सकते हैं। मकाऊ के लिए सीधे इंटरनेशनल फ्लाइट्स भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा हांगकांग के शुन ता सेंटर स्थित फेरी टर्मिनल से मकाऊ जाने के लिए शानदार फेरी बोट्स भी उपलब्ध हैं। अधिकतर लोग इसी रास्ते जाना पसंद करते हैं।

स्थानीय भ्रमण:- मकाऊ शहर के भीतर घूमना काफी आसान है। हर बस पर गंतव्य स्थान का नाम लिखा होता है। जो भी यात्री बस में चढ़ता है ड्राइवर के निकट रखे एक डिब्बे में निर्धारित किराया डाल देता है। अकसर यहां की स्थानीय बसों में कंडक्टर नहीं होते। होते हैं सिर्फ ड्राइवर। किराये के पैसों का सारा कामकाज सिर्फ विश्वास के आधार पर ही चलता है। साइट सीइंग के लिए लोकल गाइड साथ न हो तो भी नक्शा लेकर आप पूरा शहर घूमने का आनंद ले सकते हैं।

मुद्रा:- मकाऊ की मुद्रा है पटाका या मकाऊ डॉलर, पर वैसे यहां हांगकांग डॉलर्स भी चलन में हैं। विदेशी मुद्रा की अदला-बदली यहां अधिकतर बड़े होटलों और बैंकों में आसानी से हो जाती है। वैसे खरीदारी के लिए सभी क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल भी होता है।

मौसम:- मकाऊ में साधारणतः 4 मौसम होते हैं। मार्च से मई के बीच यहां बसंत के दिन होते हैं। मई से सितंबर के अंत तक गर्मी, सितंबर से दिसंबर तक शरद और फिर दिसंबर से मार्च तक जाड़े के दिन होते हैं। वैसे अमूमन यहां का तापमान गर्मियों के दिनों में 22 सेंटीग्रेड, ठंड में दिन का तापमान 9-10 सेंटीग्रेड और रात में 4-5 डिग्री तक पहुंच जाता है। ठंड के दिनों में यहां आने वालों के लिए ऊनी परिधान जरूरी होते हैं।

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