Ranchi : राजीव रंजन पर वित्तीय अनियमितता का मामला, नियुक्ति में गड़बड़ी समेत कई शिकायत…

▪︎झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव रंजन पर वित्तीय अनियमितता, नियुक्ति में गड़बड़ी समेत कई शिकायत, 2 सदस्यीय कमिटी करेगी पूरे मामले की जांच

▪︎शिकायतें मिलने के बाद मुख्य सचिव ने दिया आदेश, स्वास्थ्य सचिव ने बनाई कमिटी

▪︎हमेशा विवादों में रहे हैं राजीव रंजन, साहेबगंज में महिला डॉक्टर को घर बुलाकर बदतमीजी करने के बाद डीसी पद से हटाए गए थे

रांची : वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारी और झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति के परियोजना निदेशक राजीव रंजन एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन पर एड्स कंट्रोल सोसाइटी में वित्तीय अनियमितताओं, नियुक्तियों में मनमानी तथा एनजीओ के चयन में भी गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की शिकायत मुख्य सचिव सुखदेव सिंह तक पहुंची और उन्होंने इसमें इनकी संलिप्तता देखते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए।

मुख्य सचिव के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग के सचिव केके सोन ने दो सदस्यीय उच्चस्तरीय कमिटी बनाई है, जो राजीव रंजन पर लगे सारे आरोपों की जांच करेगी। इस कमिटी में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद झा पंकज और उप सचिव राजेश कुमार शामिल हैं।

कमेटी के सदस्यों को आदेश दिया गया है कि वे झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति की उन सभी फाइलों की जांच करें, जब से राजीव रंजन ने यहां पदभार संभाला है।

▪︎पैसों के लेनदेन से संबंधित कई ऑडियो क्लिप्स सामने आए

मालूम हो कि यहां पर बड़ी संख्या में गैर सरकारी संगठनों का चयन किया जाता है और उन्हें पैसे दिए जाते हैं ताकि वे राज्य भर में एड्स के प्रचार प्रसार और एड्स मरीजों के हित में कार्य करें। यहां पिछले 12-13 वर्षों से कार्यरत एनजीओ को इस बार राजीव रंजन ने हटा दिया और नए एनजीओ का चयन कर लिया। इन पर आरोप है कि उन्होंने इस एनजीओ के चयन में मनमानी की और जिन लोगों ने पैसे ऑफर किए उन्हें काम मिला और जिन्होंने पैसे देने से मना कर दिया उन्हें हटा दिया गया। इस सम्बंध में पैसों के लेनदेन वाले कई ऑडियो क्लिप्स भी सामने आए हैं।

▪︎नाको के गाइडलाइंस का उल्लंघन कर की गई नियुक्तियां

इसके अलावा इन पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में हुई नियुक्तियों में भी भारी गड़बड़ी की है। ऐसे लोगों को रख लिया गया है जिनके पास विज्ञापन के अनुसार ना तो पूरी डिग्री है ना ही पद के लिए जरूरी अनुभव। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) की सभी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर ये नियुक्तियां की गई हैं।

यह सोसाइटी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा दिए गए फंड से पूरी तरह से संचालित होती है। यहां दस लाख रुपए से अधिक खर्च करने के लिए विभागीय सचिव का अनुमोदन आवश्यक है। इनपर आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमोदन लिए ही सारे खर्चे किये हैं। आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर TRY नामक एक एनजीओ को एक करोड़ से अधिक रुपये प्रचार-प्रसार के लिए आवंटित किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया एजेंसी का चयन कर उसे भी लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया है।

▪︎अनुबंध पर कार्यरत हैं अधिकतर कर्मी, सेवा मुक्त करने की धमकी देकर गलत कार्य करवाने का लगा है आरोप

इस सोसाइटी में 3 डॉक्टरों को छोड़ कर सभी कार्यरत कर्मी अनुबंध पर नियुक्त होते हैं। इनका सभी कर्मियों से व्यवहार बेहद बुरा रहता है। हमेशा कर्मियों को भला-बुरा कहना, सेवा से मुक्त करने की धमकी देते हैं और इसी धमकी की आड़ में सारे गलत काम करने का दवाब बनाते हैं। इसके अलावा ऑफिस की लड़कियों पर भी इनकी गलत नजर रहती है, लेकिन नौकरी खोने के डर से इनके खिलाफ कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता।

▪︎विवादों से रहा है पुराना नाता, हटाये गए रहे उपायुक्त पद से

इससे पहले वर्ष 2019 में इन्हें साहिबगंज जिले के उपायुक्त के पद से हटा दिया गया था। उस समय एक महिला डॉक्टर को घर बुलाकर इन्होंने उनके साथ बदतमीजी की थी। इनके ही खिलाफ तत्कालीन आईएएस अधिकारी मुखप्रीत सिंह भाटिया ने इनकी फाइल पर लिख दिया था कि मैंने अपने 27 साल के करियर में ऐसा निकम्मा अधिकारी नहीं देखा।

पिछले लोकसभा चुनाव में ये ऑब्जर्वर बनकर भेजे गए थे। वहां लाखों का सामान खरीद लिया। पैसे नहीं दिए। इस मामले की जांच जारी है।

एक बार में ये वर्तमान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का से भी एक नाले के घरेलू विवाद में उलझ गए थे। रांची के मेयर्स रोड में उस समय दोनों अधिकारियों का अगला-बगल आवास था। ये घटना भी उस वक्त अखबारों की सुर्खियां बनी थीं।

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